5 R’s of Success- Which One is Yours?

Written by Sneh Desai on April 14, 2018

5 Rules of success which one is yours_02




The term “success” is extremely subjective. Unlike achieving goals, success is more of a vision-statement and is quite relative. This means that what one person might consider success, might not qualify as the same for some other person. Which does not nullify any one person’s belief of success – it just shows how subjective and relative it is; to each his own. Success can be interpreted in many ways depending upon what your idea of success really means. Thus, in order to determine what SUCCESS can mean for you, read on:-

1. Responsibility

– Responsibility or kartavya is one such factor to be taken into consideration while finding the ability to give meaning to your individualistic definition of “success”. Responsibility here does not only mean the ability to be able to carry out your duties with utmost genuineness but also refers to being the best at what you do. Is that your definition of success? Being the best at carrying out your responsibility – it could be in your profession, as a family-man, as a citizen or/and as a human being. If so, then you can be termed as a successful person only after having met your duties with due respectfulness and after having others satisfy with them too.

2. Religion

– People whose aim in life is to be able to attain a certain level of religious/spiritual happiness consider themselves to have succeeded in life after having achieved the same. Here too your religious beliefs are subjective, i.e., it is solely your own and individualistically belonging to you. But what is important to understand here is that if you are a religious/spiritual person and if you achieve what you had aimed for in alignment to your faith, then you can call yourself successful.

3. Relief/Aid

– There are many people who are motivated in life by compassion, i.e., their belief is that they shall consider themselves successful only if they are able to positively influence or assist someone who is materialistically and emotionally less privileged than them. Thus, once such a person is able to earn enough or is able to take out sufficient time from his/her schedule in order to help another soul, they feel like they have achieved success. For such people showing kindness, politeness and love in a loveless and ruthless world is a feat of its own and thus for them success becomes a broader spectrum than an inward looking exercise.

4. Respect

– For certain people, respect is holy. Everything about them is only asking others to respect them for who they are. And they make sure they demand such respect from others through thoughts, words and actions. For them making smaller profits is okay as long as they are respected for their work ethics and rationale. Once they find this respect in the eyes of their loved ones they consider themselves to be successful. Hence, whether it is in relationships or work, they are only eyeing for acclaim, esteem, admiration, acceptance, praise and reverence, it is what keeps them going and gives them the reassurance that they are on the path to achieving success.

5. Riches

– Material amenities are extremely vital for some people. The so-called joy of being able to live their life with a certain level of certainty/surety of being able to afford the best of facilities for themselves is a high for them. Hence, their life is dedicated to acquiring riches and generating wealth for a life of financial freedom. And all of their efforts are dedicated towards the same – getting a better job, investing more, taking bigger risks to get bigger returns etc. are ways in which they feel like life is giving them the validation of being successful or at least the fact that they are on their way to achieving huge success.

In one of my premium programs, ‘Ultimate Life- 4-days Camp’, I talk about what success really means and how you can achieve the same in each area of your life.
The above mentioned five R’s of determining your definition of success are all-encompassing. Thus, it could be so that your definition could comprise of one or more of the aforesaid factors, the priority of which shall depend upon what you need to derive out of your life given your time, efforts and more importantly, your vision.



कामयाबी के पाँच ‘आर’ – आपका कौनसा है?


‘कामयाबी’ शब्द बड़ा ही व्यक्तिपरक है| लक्ष्य पाने जैसी न होकर, ‘कामयाबी’ एक दूरदर्शिता-वाक्य है और काफी सापेक्ष है| इसका अर्थ यह हुआ की एक व्यक्ति जिसे कामयाबी मानता हो, ज़रूरी नहीं की कोई अन्य व्यक्ति भी उसी को कामयाबी मानता हो| इससे किसी के भी कामयाबी में का विश्वास शून्य नहीं हो जाता – यह केवल इस बात को स्पष्ट करता है की कामयाबी कीतनी व्यक्तिपरक तथा सापेक्ष है; पसंद अपनी अपनी| कामयाबी को अनेक तरह से व्यक्त किया जा सकता है, क्योंकि यह आपके नजरिये पर निर्भर है की आप किसे कामयाबी समझते हो| अतः, यह जानने के लिए की कामयाबी का मतलब आपके लिए क्या है, आगे पढ़ें:-

१. ज़िम्मेदारी (रेस्पोंसिबिलिटी)

– “कामयाबी” की आपकी व्यक्तिगत परिभाषा को ढूँढने के लिए ‘ज़िम्मेदारी या कर्तव्य’ एक महत्वपूर्ण पहलू है जिस पर गौर करना चाहिए| यहाँ पर ज़िम्मेदारी का मतलब केवल इतना ही नहीं है कि अपने सारे कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाएँ, लेकिन इसका मतलब यह भी है की अपने काम में सर्वश्रेष्ठ हों| क्या यही है आपकी कामयाबी की व्याख्या? अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में सर्वश्रेष्ठ होना – फिर यह आपकी नौकरी हो सकती है, या पारिवारिक सदस्य के तौर पर, या नागरिक तथा मानव जात के तौर पर भी हो सकता है| यदि ऐसा है, तो आप एक कामयाब इंसान कहला सकते हो अगर आप अपनी सारी जिम्मेदारियाँ पूरे आदर के साथ निभाते हैं और दूसरों को भी संतुष्ट करते हैं तो|

२. धर्म/मज़हब (रिलिजन)

– जिन लोगों का लक्ष्य एक विशेष स्तर का धार्मिक/आध्यात्मिक सुख पाने का होता है, वे लोग उस स्तर तक पहुँचने पर खुद को कामयाब मानते हैं| यहाँ पर भी आपकी धार्मिक मान्यताएँ व्यक्तिपरक हैं; अर्थात, यह केवल आपकी खुदकी हैं और यह सिर्फ आपकी ही संपत्ति है| परन्तु यहाँ पर समझने की बात यह है की आप एक धार्मिक/आध्यात्मिक व्यक्ति हैं और यदि आपने वह लक्ष्य पा लिया जो आपके विशवास की मार्गरेखा पर खरा उतरता हो, तो आप खुद को कामयाब कह सकते हो|

३. राहत/सहायता (रिलीफ)

– ऐसे कई लोग हैं जो दयाभाव से प्रेरित होते हैं; अर्थात वे खुद को तभी कामयाब मानते हैं जब वे किसीको हकारात्मक तरह से प्रभावित कर सकें या ऐसे किसी व्यक्ति को मदद कर सके जो खुद से भौतिक व भावनात्मक तरह से कम सौभाग्यवान हो| अतः, जब भी ऐसे व्यक्ति चाहिए उतना कमाने लगते हैं, या अपने मशगूल जीवन से कुछ समय निकाल सकते हैं ताकि वह किसी और की मदद कर सके, तो उन्हें लगता है की वे कामयाब हो गए हैं| ऐसे लोगों के लिए एक प्रेम रहित व कठोर दुनिया में दयालुता, शिष्टता, और प्यार दिखाना अपने आप में एक महान कार्य है और इसी कारण से उनके लिए कामयाबी केवल भीतर में झाँकने से परे एक अधिक विस्तृत विस्तार है|

४. आदर /अदब /इज्जत (रिस्पेक्ट)

– कुछ लोगों के लिए आदर/इज्जत पवित्र है| वे दूसरों से केवल इतना चाहते हैं की वे जो भी हैं उसके लिए लोग उनका आदर करें| और इस तरह का आदर उन्हें विचारों, बातों, तथा कार्यों से मिले इस बात को वह सुनिश्चित करते हैं| अगर उनकी आचार निति और औचित्य की सराहना होती हो तो कम मुनाफा भी उन्हें ठीक लगता है| एक बार जिन्हें वह प्यार करते हैं उनकी आँखों में जैसा चाहिए वैसा आदर वे देख लेते हैं, तो अपने आपको कामयाब मानते हैं| अतः रिश्ते में या काम में, उनकी नजर प्रशंसा, सम्मान, प्रशस्ति, स्वीकृति, तारीफ, तथा आदर पर ही टिकी होती है| यही सब उनके चालक बल हैं और यही उनको यकीं दिलाते हैं की वह कामयाबी पाने के सही रास्ते पर हैं|

५. दौलत/धन/संपत्ति (रिचेस)

– भौतिक सुख सुविधाएँ कई लोगों के लिए बहुत मत्वपूर्ण होती हैं| हम अपने लिए उत्तम सहूलियत खरीदने की शक्ति रखते हैं और एक विशष स्तर का जीवन जी सकते हैं इस बात का तथा-कथित आनंद ही उनके लिए किसी नशे से काम नहीं होता| अतः उनकी जिन्दगी दौलत हासिल करने और संपन्न हो कर आर्थिक स्वतंत्रता पाने के लिए समर्पित होती है| और उनके सारे प्रयत्न उसी तरफ समर्पित होते हैं – बेहतर नौकरी पाना, ज्यादा पूंजी लगाना, ज्यादा कमाने के लिए अधिक बड़ा जोखिम लेना इत्यादि रास्तों से उन्हें लगता है की जिन्दगी उन्हें सफलता की पुष्टि देती है| या फिर उन्हें लगता है की वह भारी सफलता पाने के रास्ते पर है|

मेरे एक लाभदायक कार्यक्रम ‘अल्टीमेट लाइफ’ के ४-दिवसीय शिबिर में ‘कामयाबी’ सही में क्या है इसकी चर्चा मैं करता हूँ और इसे आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में कैसे हासिल कर सकें यह बताता हूँ|
उपरोक्त पाँचों ‘र’ कामयाबी की आपकी हर व्यख्या को समाविष्ट करते हैं| अतः, यह संभव है कि आपकी परिभाषा उपरोक्त तत्त्वों में से एक से अधिक का समावेश करती हो, जिसकी प्राथमिकता आपको ज़िन्दगी से क्या पाना है और उसके लिए आप कितना समय देते हो, कीतनी मेहनत करते हो, और सबसे महत्वपूर्ण बात आपकी दूरदर्शिता पर निर्भर रहेगी|

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