5 Things to learn from Sridevi’s Life

Written by Sneh Desai on March 3, 2018

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24th February 2018 will go down in history as the day which marked the end of an era with the untimely demise of an icon and a personality so big that it created a void in the hearts of millions. While there were many newsmakers and TRP-seekers who went onto unnecessarily exploit the unfortunate incident – both on air and on social media – what we are missing out on is the fact that we need to remember Sridevi for who she was and how she became this humongous superstar and garnered so much of love instead of speculating insensitively.

1. Willing to learn

– Although Sridevi started really young and belonged to a completely different culture, she learned a completely new language and adjusted to a drastically different work environment in order to expand her horizons as an actor. It seems really easy from an outsider’s viewpoint but learning a new language is extremely challenging and adapting to a new workplace even more so. Basically, she reached the zenith of success after a lot of struggles and extreme hard work. One of the most important things to note here is her willingness to learn. After a point of time, all of us become really passive about learning new things in order to expand our personalities by placing our egos before our work, thus becoming an obstacle to our own selves. This is one of the most important learnings from Sridevi. To go out of our comfort zones and constantly be willing to learn!

2. Personal Care

– It is extremely imperative that we take care of ourselves. In order to take control and love our lives, we need to start taking care of ourselves first. Sridevi was the embodiment of the same. There was never a frame that looked dull if she were in it. She was always graceful and paid a lot of attention to her health. She always had a beautiful smile on her face and we have all seen how well-dressed she always was! Thus in order to feel good about our lives we must look and be the part, and things will always change for the better for us! Taking care of yourself never goes out of style and there’s not a face which doesn’t look beautiful with a smile!

3. Responsibility

– It was not as if Sridevi did not get offers to act in films even well after she was married. But it was her own prerogative to take a hiatus and concentrate on being a good homemaker. She was a responsible wife and a great mother. She always referred to her daughters as her life and what a wonderful job she has done in raising them! Just the sense of sacrifice that she had is remarkable and that too without feeling a sense of guilt or regret or remorse in following her responsibility over doing movies. Sometimes drunk in passion, we forget our basal responsibilities in life. In the lust of following our hearts we forget that irrespective of everything we have certain duties in life which we need to take care of and these duties cannot be taken away from us or be carried out by someone else. In fact it should not be any other way – we are responsible for certain things in life and we should be unafraid to make certain sacrifices in order to gain control over our responsibilities!

4. Age

– For Sridevi age was in fact just a number. Out of the fifty-four years of her life she had been working for fifty! She started off when she was a child and never looked back since. Until recently she had great movies lined up for herself showing us clearly that no matter what age she was at the top of her game. It does not matter what your age really is, whether you are four or fifty, Sridevi was proof of showing us how we can be whoever we want to be and achieve everything that we want to as well as take care of our responsibilities and be highly successful in every sphere of life!

5. Respect Time

– I think that the most important lesson that we could actually incorporate from Sridevi’s life (or in fact her unfortunate demise) is to be able to respect the time we have all been given. Our fate is not in our hands, which is why we don’t know how much time we really have. Every minute, every second counts. Do what you love right now because we don’t know if we’ll get the opportunity later. In fact like Sridevi, make opportunities instead of seeking them! You are all you need!

श्रीदेवी के जीवन से सीखने लायक ५ बातें

२४ फरवरी २०१८ – इतिहास गवाही देगा कि इस दिन एक युग का अन्त हुआ जब एक मूर्तिरूप प्रतिमा तथा एक दिग्गज व्यक्तित्व की अकाल मृत्यु लाखों लोगों के ह्रदय में एक खालीपन छोड़ गई| हालांकि ऐसे कई पत्रकार और टी.आर.पी.-जिज्ञासु थे जिन्होंने बेवजह ही इस दुर्घटना का लाभ उठाया – हवाई तथा सामजिक, दोनों माध्यमों से – जो बात हम से छूट रही है वह यह है कि अत्यधिक सोचने के बजाय, हमें श्रीदेवी को केवल इसी बात के लिए याद करना चाहिए कि वह क्या थीं और कैसे इतनी विशाल व सर्वश्रेष्ठ अदाकारा बनी जिसने इतना सारा प्यार पाया|

१. सीखने की चाह

– हालांकि श्रीदेवी ने बहुत ही छोटी उम्र में काम करना शुरू किया था, और वह एक बिलकुल ही अलग संस्कृति से थीं, फिर भी उन्होंने एक पूरी तरह से नई भाषा सीखी और एक जबर्दस्त रूप से विभिन्न कार्य परिस्थिति से अनुकूल हो गईं क्योंकि उन्हें अपने ‘अदाकारा’ की क्षितिज को बढ़ावा देना था| बाहरी व्यक्ति के दृष्टिकोण से देखा जाए तो एकदम आसान लगता है, लेकिन नई भाषा सीखना एक बड़ा ही चुनौती भरा काम है और नए कार्यक्षेत्र से अनुरूप होना उससे भी ज्यादा| मूलतः, उन्होंने अपनी कामयाबी की चरम सीमा काफी सारी तकलीफों और अत्यंत कठोर परिश्रम के बाद ही पाई| यहाँ पर सोचने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात है उनकी सीखने की तैयारी| एक समय ऐसा होता है जब हम सभी सीखने के बारे में निष्क्रिय हो जाते हैं, जिससे हम खुद के लिए ही अवरोध बन जाते हैं| श्रीदेवी से सीखने वाली यह सबसे महत्वपूर्ण बात है| अपने आराम-देय स्थिति से बाहर निकल कर हमेशा सीखने के लिए तत्पर!

२. निजी देखभाल

– यह अत्यंत अनिवार्य है की हम खुद की अच्छी देखभाल करें| अपनी ज़िन्दगी पर काबू पाने के लिए और उससे प्यार करने के लिए, हमें सबसे पहले खुद की देखभाल करना शुरू करना होगा| श्रीदेवी इसे बात की साक्षात मूर्त रूप थीं| यदि वह किसी फ्रेम (तस्वीर) में हो तो वह फ्रेम नीरस दिख ही नहीं सकती थी| वह हमेशा सुन्दर दिखती थीं और अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देतीं थीं| उनके चहरे पर हमेशा ही एक मनोहर मुस्कान होती थी और हम सब ने देखा ही है कि वह कितने अच्छे कपड़े पहनतीं थीं! अतः खुद के बारे में अच्छा लगने करने के लिए हमें भी उस भूमिका जैसा दिखना व महसूस करना चाहिए, जिससे हमारे लिए चीज़ें अपने आप ही बेहतर हो जाएँगीं! खुद की देखभाल करना कभी भी पुराना नहीं होगा, और ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो हँसता हुआ सुन्दर नहीं दीखता!

३. ज़िम्मेदारी

– ऐसा नहीं है की शादी के बाद श्रीदेवी के पास फिल्मों में काम करने के प्रस्ताव नहीं आए| लेकिन एक अंतराल लेकर एक अच्छी गृहिणी बनना उनके खुद का विशेष अधिकार था| वे एक ज़िम्मेदार पत्नी और एक श्रेष्ठ माँ थीं| वह हमेशा अपनी बेटियों को ‘मेरी ज़िन्दगी’ कहतीं थीं और उन्हें बड़ा करने में उन्होंने उत्कृष्ट काम किया है! केवल उनका बलिदान का एहसास ही उल्लेखनीय है और वह भी बिना किसी दोषी होने के एहसास या अफसोस या पछतावे के| कभीकभार अपनी कामयाबी के नशे में हम अपनी मूलभूत ज़िम्मेदारियाँ भूल जाते हैं| अपने दिल के पीछे दौड़ाने की चाह में हम यह भूल जाते हैं कि, हर चीज़ से पृथक होकर, जीवन में, हमारे भी कई कर्तव्य हैं जिन्हें हमें ही सम्पन्न करना है और यह कर्तव्य ना हमसे दूर हो सकते हैं और नाही कोई और इन्हें पूरा कर सकता है| सच्ची बात तो यह है कि यह किसी दूसरी तरह से होना भी नहीं चाहिए – जीवन में कुछ बातों के लिए सिर्फ हम ही ज़िम्मेदार हैं और अपनी उन जिम्मेदारियों पर काबू पाने के लिए कोई भी बलिदान देने से हमें डरना नहीं चाहिए!

४. उम्र [अवस्था]

– श्रीदेवी के लिए उम्र केवल एक अंक ही था| चौवन साल की उनकी आयु में से उन्होंने पचास साल काम किया! जब वे एक छोटी सी बच्ची थीं तब से ही उन्होंने काम शुरु कर दिया था और फिर आज तक कभी भी पीछे मुड कर नहीं देखा| अभी तक उनके पास कई उत्कृष्ट फिल्में थीं जो साबित करतीं हैं कि उनकी उम्र चाहे कुछ भी थी फिर भी वे अपने काम में सबसे ऊपर ही थीं| आपकी उम्र क्या है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की, आप ४ के हैं या ५० के, श्रीदेवी इस बात का प्रमाण थीं जिसने दिखा दिया कि हम चाहे जो भी हों, लेकिन जो भी हम बनना चाहते हैं वह हम बन भी सकते हैं और जो भी पाना चाहें वह सब कुछ पा भी सकते हैं, और साथ में हम हमारी जिम्मेदारियाँ निभा सकते हैं और जिन्दगी के हर क्षेत्र में सम्पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हैं|

५. समय का आदर करें

– मैं मानता हूँ की श्रीदेवी के जीवन से (या यूँ कहें कि उनकी अकाल मृत्यु से) सबसे महत्वपूर्ण पाठ जो हमें उठाना चाहिए वह यह है की हमें जो समय मिला है उसका आदर करें| हमारी तक़दीर हमारे हाथ में नहीं है, और हमें कितना समय मिला है यह भी हमें पता नहीं है| हर पल, हर क्षण का महत्त्व होता है| आपको जो पसंद है उसे अभी करो, क्योंकि हमें नहीं पता की बाद में हमें दूसरा मौका मिलेगा या नहीं| वास्तव में श्रीदेवी की तरह मौके खुद बनाएँ बजाय इसके की मौके की राह देखें! आप को जो भी कुछ चाहिए वह सब कुछ आप खुद ही हो!

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