6 WAYS TO RESET YOUR MIND AND MOOD

Written by Sneh Desai on March 29, 2017

6 WAYS TO RESET YOUR MIND AND MOOD


Change is the only constant. Rule of change? RESET! Reboot your mind to let go of the grudges you have been holding on, to get over the past and to look at a future which is abundant. Do not let what has passed to bog you down. It is a difficult task because the present is only this fleeting moment whereas the past sums up the hugest parts of our lives. So where should the starting point be?

Begin with positive mental clarity. Being positive is an extremely important principle and also the hardest to keep loyal to. But if life needs harmony, honor the positive energy that will lead you to a healthy, happy and wholesome existence. Consciously change your thought process and focus on things that make you happy, unabashedly and uninhibitedly. This practice is extremely important to help you carry out what you need to despite negativity. Life is hard, but a voluntary decision to change your thoughts could leave you feeling at ease with the ever-changing circumstances. Not just that, practicing positivity also leads to clarity of mind. You become aware of things and people who truly make you happy in a soul-satisfying manner without feelings of malign.

mpw

Don’t let others ‘push your buttons’. We tend to meet certain people in our lives who, for no apparent or explicable reason, naturally tend to not agree with our opinions. We always find ourselves at crossroads with them. Maybe it is not their fault, maybe it is their fault, but that is not what requires your attention. Your attention should be dedicated to not let them provocate you consciously or unconsciously. Keep an open mind and heart. Take your work seriously but not yourself. Have a good laugh sometimes over yourself if need be.

Meditate. Pause, Reflect and Meditate. Meditation starts with accepting certain harsh realities of life- like history cannot be changed; and you certainly don’t want it to repeat itself. Hence, instead of feeling victimized, complaining and playing the blame-game, accept and practice meditation to not repeat these mistakes again. Meditation helps you keep your cool and helps to think before you act. It gives you the kind of control you’d like to have as the driver of your own vehicle called Life.

Travel (also in Time). When life gives you lemons, travel. Travel because it gives you a life that is beyond your immediate environment. Travel because it lays out experiences that are new. Travel because it helps you expand your mind and explore new areas. But before you physically travel, there is a shorter route to calm yourself as well – time travelling. When things get hard, pause and let your mind travel years into the future to have to evaluate that particular distressing situation and its importance! Contemplate and reason out with yourself if it is worth it to get so worked up about that specific incident if it has no meaning for existence in your bright future. Most of the time, the answer shall be no. It takes a few minutes to do this exercise and it saves you a ton of complications and emotional turbulence.

Keep a Journal. The best way to check your day-to-day emotions is to track them by keeping a journal. Write down your pent up feelings and let it all down in a manner that helps you channel it in a productive manner. This makes you aware of the little things that perturb you more than they should and helps you to consciously make your peace with them consequently helping you make peace with your mind!
Empathize and be compassionate. Generally people tend to gossip because apparently there is nothing more satisfying than the knowledge of someone else’s miseries being a tad bit more miserable than yours! Chuck this attitude. Instead replace it with compassion. Really listen to others and help them out till the extent to which you can and if not, then empathize. Evaluate your behavior with others and your task is half done. You shall feel a little more worthy if you stretch out that helping hand. More than half of the negativity travels away if you make a decision as such.

It is only dark till you open your eyes and your mind. So make Life your new high instead of being in a bad mood perpetually to practice emotional well-being. RESET NOW!

तरोताज़ा हो जाओ: अपने मन व मनोदशा को दोबारा ठीक करने के ६ तरीके:

दुनिया में एक ही चीज़ स्थायी है – बदलाव| बदलाव का नियम? दोबारा ठीक होना! अपने मन को फिरसे शुरू व जागृत करने के लिए जिन द्वेषों को मन में बसाये हुए हो उन्हें जाने दो, अतीत को पीछे छोड़ दो, और जिस भविष्य में बहुत है उसकी ओर नज़र करो| बीते हुए कल के दलदल में खुद को फँसने मत दो| यह एक मुश्किल काम है क्योंकि वर्तमान एक उडाता हुआ पल है जबकि हमारा अतीत हमरे जीवन का सबसे बड़ा लेखा जोखा है| तो कहाँ से शुरू करें?

mpw

सकारात्मक मानसिक स्पष्टता से शुरू करो: सकारात्मक होना एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम है और इससे वफादार रहना सबसे मुश्किल है| लेकिन यदि जीवन में तालमेल ज़रूरी हो तो जो हकारात्मक ऊर्जा आपको स्वस्थ, खुशहाल, व सम्पूर्ण ज़िन्दगी की ओर ले जाए उसका आदर करो| अपने विचारों को अपने पूरे होशहवास में रहते हुए बदलो और जो चीज़ें आपको सुख दें उन पर अपना ध्यान, निर्लज्ज होकर व उन्मुक्त ढंग से, केन्द्रित कीजिए| नकारात्मकता होने के बावजूद आपको जो काम पूरे करने हैं उन्हें करने के लिए यह आदत बहुत ज़रूरी है| जीवन कठिन है, परन्तु खुद के विचार बदलने के स्वैच्छिक प्रयास के कारण आपके मन को, हर वक्त बदलते हालातों में भी शान्ति का अनुभव होगा| केवल यही नहीं, हकारात्मकता की आदत मन में के विचारों की स्पष्टता की ओर ले जाएगी| आप उन चीज़ों व लोगों से अवगत हो जाते हैं जो आपको आत्म-संतुष्टि के साथ, व किसी भी हानिकारक विचार के बगैर, सम्पूर्ण सुख देते हैं|

दूसरों को आपके ‘बटन दबाने का मौका ना दें|’ अपने जीवन में हम ऐसे कई लोगों से मिलते हैं जो, किसी भी प्रत्यक्ष या सार्थक कारण बिना ही, हमारे मंतव्यों से किसी भी तरह से सहमत नहीं होते हैं| हम खुद को ऐसे लोगों के साथ हमेशा मतभेदों से घिरा पाते हैं| शायद उनकी गलती नहीं है, या शायद उनकी गलती है परन्तु आपका ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए| आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए की वे लोग आपको जान बूझकर या बिना जाने उत्तेजित ना करें| अपने मन व विचारों को खुला रखो| अपने काम को गंभीरता से लो, खुद को नहीं| कभी ज़रुरत पड़े तो खुद पर जोर से ठहाका भी लगा लो|

चिंतन करो | रुको, सोचो, और चिंतन करो| जीवन की कठोर सच्चाइयाँ, जैसे की – इतिहास बदला नहीं जा सकता, और आप कतः नहीं चाहते की वह खुद को दोहराए, को अपनाने से ही चिंतन शुरू होता है| अतः शोषित होने के एहसास, तकरार करने के, व एक दुसरे को दोषी कहने के बजाय, इन गलतियों को मान लो और इन्हें कभी ना दोहराने की कसम खा लो| चिंतन आपके मन को शांत रखता है और कुछ भी करने से पहले सोचने में सहायता करता है| आप अपने ‘जीवन’ नामक गाडी पर जिस प्रकार का नियंत्रण चाहते हैं, ठीक उसी तरह का नियंत्रण केवल चिन्तन ही आपको दे सकता है|

यात्रा करो (समय में भी)| जब ज़िन्दगी आपको नीम्बू दे तो शरबत बनाओ और यात्रा करो| यात्रा करो क्योंकि इससे आपको अपने समीपवर्ती वातावरण के परे की ज़िन्दगी प्राप्त होगी| यात्रा करो क्योंकि इससे नए अनुभव प्राप्त होते हैं| यात्रा करो क्योंकि यह आपके मन का विस्तार करने तथा नयी जगहों को खोजने में मददरूप बनता है| लेकिन शारीरिक यात्रा करने से पहले आपके मन को शांत करने के लिए एक छोटा रास्ता भी है – समय की यात्रा| जब जीवन कष्टदेय हो जाए, तो थम कर अपने मन को भविष्य में आने वाले वर्षों की यात्रा कराके उस खास, मगर दु:खद परिस्थिति व उसके महत्त्व का मूल्यांकन करने दो! सोच कर निश्चित करो की इस परिस्थिति का आपके उज्जवल भविष्य पर कितना असर पड़ सकता है और फिर सोचो की इसके पीछे खुद को दुखी करना चाहिए या नहीं| आप पायेंगे की ज्यादातर बार उत्तर ‘नहीं’ ही होगा| यह कार्य करने में कुछ ही मिनट लगते हैं लेकिन इससे आपकी मन-भर की चिंताएं व ज़ज्बाती अशांति दूर हो जाती हैं|

बहीखाता (डायरी) रखो| अपने रोज़िन्दा के ज़ज्बातों की जाँच करने का सबसे बेहतर तरीका है बहीखाता (या डायरी) रखना| अपने सारे दबे हुए ज़ज्बातों को उसमें लिख लीजिये और उन सब बातों को इस तरह से देखो की उनसे आपको स्कारात्मता से आगे बढ़ने में मदद हो| इससे आपको पता चलेगा की आपको कौनसी छोटी-छोटी बातें ज़रुरत से ज्यादा तकलीफ दे रही हैं और आपको उनके साथ सचेत होकर समाधान करने में सहायता होगी जिसके फल:स्वरूप आपको मानसिक शान्ति प्राप्त होगी|
हमदर्द व दयावान बनो| लोग ज्यादातर गपशप केवल इसलिए करते हैं क्योंकि दूसरों की कठिनाइयाँ खुद की कठिनाइयों से थोड़ी बढ़कर हैं, यह जानकार उनके मन को एक अजीबसी ख़ुशी मिलती है! इस रवैये को त्याग दो| इसकी जगह पर सहानुभूति महसूस करो| दूसरों को सच्चे दिल से सुनो और उनकी जब तक हो सके तब तक मदद करो, और यदि ऐसा नहीं कर सकते तो, हमदर्द बन जाओ| दूसरों के साथ के अपने व्हावाहार का मूल्यांकन करो और आपका आधा काम तो वैसे ही हो जायेगा| जब आप मदद का हाथ आगे बढ़ाते हैं तो आप खुद को थोडा और नेक व काबिल पाते हैं | आधे से ज्यादा नकारात्मकता ऐसा निर्णय करते ही दूर हो जाती है|

अँधेरा केवल तब तक ही है जब तक की आप अपनी आँखें व मन नहीं खोलते| अतः हमेशा खराब मनोभाव रखने के बजाय भावनात्मक सुख की आदत डालो और जीवन को अपना नया नशा बनाओ| अपनी मनोदशा अभी, इसी वक्त ठीक कर लो!

Share