Are You Surrounded By Toxic People Or Harmonious Ones?

Written by Sneh Desai on March 24, 2018

Learn how to know are you surrounded by Toxic People ?




The people we surround ourselves with unintentionally influence our thoughts, words and eventually our actions. Although, there is no doubt about the fact that you can be a lone-ranger in order to change your life for the better but we live in a society. And we are in some way or another surrounded by people everywhere. And we need each other in order to bring a positive change. Thus, we need to surround ourselves with people who are harmonious and not toxic. But how do we determine the difference?

1. Conversation

– One of the easiest ways to determine whether a person is toxic or harmonious is by the simplest tools provided to mankind. Conversation. Toxic people generally talk about themselves and keep interrupting or interjecting someone else mid-sentence. It shows a sense of narcissism and more or less a complete lack or interest in the other person. Harmonious people tend to not just hear but also listen to what you have to say and provide a noteworthy feedback too. They are emotionally attached to a conversation and tend to really invest in what you have to say.

2. Disagreements

– You can spot a really closeted toxic person too by analyzing how they respond to disagreements. Open-minded and harmonious people have a habit to may or may not overreact to disagreements at the forefront but eventually liberal people tend to see your point of view and perspective and respect it even if they disagree. This is the basal difference. It is okay to disagree, but how one reacts to it determines whether he/she is toxic or harmonious. This point needs no further stressing. We have all seen the infamous newsroom debates on T.V. enough to know about disagreements and its varied reactions.

3. Control

– Self-control and really using your will power to control certain habits in order to inhabit a more positive lifestyle is completely different from the kind of control I am talking about here. Toxic people feel the need to CONTROL – and this control is generally directed towards everyone else but themselves. They want to control what someone else eats, talks, or even thinks! Basically, they are manipulative only to feel a little better about their own insecurities. Harmonious people are inclusive of others’ different traits. They are OKAY with it and are more tolerable. They do not feel the need to manipulate or control.

4. Negative

– Again, a very staple method to differentiate between people. However, this step really depends on what you want out of life. Do you want a positive change or are you happy with the monotony or even negativity that you are currently living in? Toxic people are extremely negative. And this negativity is directed towards others more than it is towards themselves. Trying to find faults in everything, constantly pointing out to someone else’s flaws, gossiping, making fun of others’ weaknesses etc. are some of the numerous negative vibes that toxic people tend to carry along themselves. It is alright to joke or fool around once in a while – but when it becomes a habit it is extremely toxic. Because once you are in and around such negativity, you subconsciously also start to think like the people around you. Harmonious people on the other hand are not overtly negative. They may be despairing about their own lives (unfortunately) but they definitely do not bring others down. One of the best ways to help such toxic people is to bring them to my signature event ‘Change Your Life’.

5. Team Work

– Toxic people have the worst time working in teams or in groups because they are not good with people simply because they see so many flaws in others such that they start to detest them. They tend to be extremely aloof until and unless they are the people in charge! That’s their hugest tell-tale sign. A toxic person hates group activities until he/she is made to lead the said group. This again denotes their narcissistic, self-centered and selfish demeanour. Harmonious people can work with others quite well and are actually quite happy to put aside their ego in order to work for the betterment of their team’s overall performance.

You can choose to gift my ‘Formula for Life’ book(Also Available in Gujarati, Hindi & Marathi) to such people around you which can help them generate positive thoughts and build better relationships with them.

These are the most basic and extremely simple methods to judge whether you are surrounded by the kind of people you want to. Above and beyond this always listen to your instincts. Because more often than not vibes don’t lie!



आप जहरीले लोगों से घिरे हुए है की मैत्रीपूर्ण लोगों से?


जो लोग हमारे इर्द-गिर्द होते हैं वे अन्जाने में हमारे विचारों को, शब्दों को, और अंत में हमारे काम को भी प्रभावित करते हैं| जबकि इस बात में कोई संदेह नहीं है की अपनी ज़िन्दगी बेहतर बनाने के लिए आप अकेले ही काफी हैं, लेकिन हम समाज में रहते हैं| और हम एक या दूसरी तरह से हर जगह पर लोगों से घिरे हुए हैं| और एक हकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमें एक दुसरे की बहुत जरूरत है| अतः हमें अपने आप को मैत्रीपूर्ण लोगों से घिरा हुआ रखना चाहिए नाकि जेहारीले लोगों से| लेकिन यह फ़र्क कैसे जानें?

१. वार्तालाप

– व्यक्ति जहरीला है की मैत्रीपूर्ण यह जानने का एक सबसे आसान तरीका है मानवजात को प्राप्त सबसे सहज साधन – वार्तालाप| जहरीले लोग अपने बारे में ही ज्यादातर बातें करते हैं और अन्य लोगों की बातों में अवरोध डालते हैं या किसी और के वाक्य को बीच में ही काटते हैं| यह उनका अहंकार, या दुसरे व्यक्ति में दिलचस्पी का अभाव दिखाता है| मैत्रीपूर्ण लोग आप जो भी कहते हैं उसे न सिर्फ सुनते हैं, उस पर ध्यान भी देते हैं और उसके बारे में विचारणीय जानकारी भी देते हैं| यह लोग आपकी बातों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए होते हैं और आप जो कहते हैं उस में अपनी पूँजी भी लगाते हैं|

२. वाद-विवाद

– एकान्त प्रिय जहरीले व्यक्तियों को आसानी से पहचानने का दूसरा सरल तरीका है वे वाद-विवाद को किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं उसका विश्लेषण करके| ग्रहणशील और मैत्रीपूर्ण लोगों की आदत होती है की वादविवाद की शुरुआत में वे तीव्र प्रतिक्रिया दें या न भी दें पर अंततः वे आपके दृष्टिकोण और आपके परिपेक्ष्य का आदर करेंगे, बावजूद इसके कि वे आप से असहमत हैं| यह बुनियादी फ़र्क है| असहमत होना एक बात है, पर वे कैसी प्रतिक्रिया देते हैं उस से यह निश्चित होता है की वे जहरीले हैं या मैत्रीपूर्ण| इस तथ्य पर ज्यादा दबाव [महत्त्व] देने की जरुरत नहीं है| हम सब ने टी.वी. के कुख्यात समाचार खंड में होने वाली बहस काफी देखी है तथा असहमति और उसके विभिन्न प्रत्याघातों को भलीभांति जानते हैं|

३. संयम

– यहाँ पर जिस संयम की बात मैं करने जा रहा हूँ वह आत्म संयम या कई खराबा आदतों के खिलाफ संयम रखना, ताकि एक अधिक हकारात्मक जीवन शैली प्राप्त हो सके, से एकदम अलग है| जहरीले लोगों को नियंत्रित करने की ज़रुरत हमेशा महसूस होती है – और यह नियंत्रण खुद को छोड़ कर बाकि सब के लिए होता है| दुसरे लोग क्या खाते हैं, क्या बातचीत करते हैं, यहाँ तक की क्या सोचते हैं, इन सब पर वे अपना नियंत्रण चाहते हैं! मूलतः ये लोग केवल इसिलिए षड्यंत्रात्मक होते हैं ताकि खुद की असुरक्षितता की भावनाओं के बारे में थोडा अच्छा महसूस कर सकें| मैत्रीपूर्ण लोग औरों की अलग-अलग आदतों को साथ लेकर चलते हैं| वे उनके साथ राजी होते हैं तथा अधिक सहनीय होते हैं| उन्हें षड़यंत्र करने की या नियंत्रित करने की जरुरत नहीं महसूस होती|

४. नकारात्मकता

– एक और अत्यधिक प्रधान तरीका इन दो तरह के लोगों में भेद करने का| हालाँकि यह उपाय आपको जिन्दगी से क्या चाहिए उस पर आधारित है| आपको हकारात्मक परिवर्तन चाहिए या आप इस निरसता पूर्ण और नकारात्मकता भरी जिन्दगी, जो आप अभी जी रहे हैं, उस में खुश हैं? जहरीले लोग अत्यंत नकारात्मक होते हैं| और यह नकारात्मकता खुद की ओर नहीं बल्की औरों की तरफ
अधिक निर्देशित होती है| हमेशा औरों की क्षतियाँ ढूंढते रहना, दूसरों की त्रुटियों की ओर ऊँगली करना, हमेशा दूसरों के बारे में गपशप करना, दूसरों की कमजोरियों का मजाक उड़ाना, इत्यादि, नकारात्मक स्पंदन पैदा करने वाले अनगिनत लक्षणों में से हैं, जो जहरीले लोग अपने साथ लाते हैं| किसिका एकाद बार मजाक करना या मुर्ख बनाना ठीक है पर जब यह आदत बन जाए तो यह विषाक्त असर पैदा करती है| क्योंकि एक बार आपके अन्दर या आसपास ऐसी नकारात्मकता फ़ैल जाय तो आप भी अवचेतन रूप से ऐसा सोच ने लगते हैं| मैत्रीपूर्ण लोग प्रकट रूप से नकारात्मक नहीं होते| वे (दुर्भाग्यवश) अपनी खुद की जिंदगी को लेकर निराश हो सकते हैं पर वे दूसरों को निचे नहीं खींचते| ऐसे जहरीले लोगों की मदद करने का सबसे बेहतर एक तरीका है उन्हें मेरे चिन्हक कार्यक्रम ‘चेंज योर लाइफ’ में लाना|

५. सहयोग

– जब जहरीले लोगों को दूसरों के सहयोग से काम करना पड़ता है तब उनका सबसे ख़राब समय होता है, क्योंकि वे लोगों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं करते, केवल इसीलिए क्योंकि उन्हें दूसरों में इतनी सारी त्रुटियाँ नज़र आती हैं कि वे उनसे नफ़रत करने लगते हैं| जहरीले लोग तब तक बहुत अलग रहना पसंद करते हैं, जब तक उन्हें उस समुदाय का प्रभारी न बनाया जाये! यह उनकी सबसे बड़ी चुगलखोर निशानी है| जहरीला व्यक्ति सामूहिक गतिविधियों को नापसंद करता है जब तक उसे उस समुदाय की आगेवानी करने न मिले| यह इनके आत्मकामी, आत्मकेंद्रित और स्वार्थी आचरण की निशानी होता है| मैत्रीपूर्ण लोग दूसरों के साथ अच्छे से काम कर सकते हैं और अपना अहंकार अलग रख कर समुदाय की भलाई एवं बेहतरी के लिए काम करने में खुश होते हैं|

आप अपने इर्दगिर्द के ऐसे लोगों को मेरी किताब ‘फार्मूला फॉर लाइफ’ (गुजराती, हिंदी और मराठी में भी उपलब्ध है) भेंट देना पसंद कर सकते हैं जिससे उन्हें हकारात्मक विचार उत्पन्न करके अच्छे संबंधों का निर्माण करने में मदद मिलेगी|

यह नितांत मूलभूत पध्धतियाँ है जिन से आप जान सकते हैं की आप जैसे लोग चाहते हैं वैसे लोगों से घिरे हुए हैं या नहीं| इन सारी बातों के उपरांत आप अपने सहज ज्ञान पर भी ध्यान दें| क्योंकि अधिकतर बार स्पंदन झूठ नहीं बोलते|

Share