CELEBRATE NAVARATRI DIFFERENTLY THIS TIME!

Written by Sneh Desai on October 6, 2018

Celebrate Navratri Differently This Time




If you are wondering how you can enjoy Navaratri differently this time, here’s something for you. Navaratri is a favorite amongst us Indians. More often than not, we are in complete awe of the larger-than-life festivities, food, dance & celebrations. Each year, most of us wait for these nine days to turn up! However, it is high time that we celebrate Navaratri for more than what just meets the eye. Have we ever viewed the grand occasion of Navaratri as an opportunity to seek something larger than ourselves? This is why today’s post is dedicated to all those who are looking for some extra inspiration this festive season & are looking to celebrate Navaratri a little differently & yet enjoy a little more than usual!

At the end of the day, Navaratri is a fest for rejoicing the triumph of good over evil. It is celebrated to honour the divine Goddess Durga who assassinates the demon Mahisasura to restore peace. The nine days of Navaratri are dedicated to worshipping the nine different forms of Goddess Durga, namely – Shailaputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skandamata, Katyayani, Kaalratri and Mahagauri (in ascending order). Each of them have a back story of their own but the morals that they teach us in unison synchronize perfectly, i.e., to let the power within you unleash to its fullest. Each story signifies how the light within us can win over the dark side of humanity irrespective of the hurdles.

Moreover, Navaratri reminds us of our roots as a nation. We inherently are a country full of innate virtues. Together we have the strength to easily overcome all obstacles. So when a festival such as Navaratri comes along, we as a nation are rejuvenated to see this inherent goodness which makes India one of the greatest nations in the world. It is reminiscent of what we stand for as Indians & what the great Indian values really mean to each one of us.

In today’s day & age when crime, violence & abuse is on the rise and corruption is at its peak, to repeatedly fester our minds with negative thoughts is nothing new! And with each passing day it is becoming more & more difficult to redirect the frequency of our thoughts from outright negative to even remotely hopeful. Under such circumstances, who & what can cure us of such pessimism? Believe it or not but turning to the divine genuinely cures us of our ailing hearts. How? The answer is simple – empathy. The holy days of Navaratri recognizes the spirit of empathy wherein everyone is viewed as spiritual beings and others’ pain or happiness is treated with equal respect & compassion. It is such a simple way to restore balance amongst ourselves because it helps our conscience move beyond the right & wrong to accept people & circumstances just as they are.

Navaratri reflects the presence of positivity irrespective of the negativity surrounding us. The traditional rituals create an element of devotion & awakening. It is a call to our duties, to look at the bright side, to overcome our shortcomings & to emerge victorious. It shows us how we too are capable of something more than what we think our potential is.
Finally, Navaratri is a doorway to accept & get rid of our sins & to turn our divine eyes within ourselves for some diligent soul-searching. Amidst all the noise & delusions it helps us to find the pathway to knowledge. It encourages us, in its own way, to begin our spiritual journey & find limitlessness – where there are no boundaries, no hurdles, no obstacles but endless joy & happiness. To see & treat everyone the way you would want to be treated!
You can keep the above points in mind while playing garba so that you understand the essence and deeper meaning while enjoying this longest festival of dance!



इस बार नवरात्र थोड़ा अलग तरीके से मनाएं!

यदि आप सोच रहे हैं कि इस बार आप नवरात्र का आनंद अलग तरीके से कैसे ले सकते हैं, तो यहां आपके लिए कुछ है। नवरात्र हम भारतीयों का सबसे पसंदीदा त्यौहार है। अक्सर, हम जीवन से बढ़कर हो रहे इन उत्सवों, भोजन, नृत्य और समारोहों के पूर्ण विस्मय में होते हैं। हर वर्ष, हम बहुत बेसब्री से इन नौ दिनों का इंतजार कर रहे होते हैं! हालांकि, समय आ गया है कि हम नवरात्र का जश्न मनाने के लिए सही कारण चुने, न की वह जो सिर्फ दिखता हो। क्या हमने नवरात्र के भव्य अवसर में कभी बड़ा कुछ खोजने का मौका ढूंढा है? यही कारण है कि आज का पोस्ट उन सभी लोगों को समर्पित है जो इस उत्सव के मौसम में कुछ अतिरिक्त प्रेरणा की तलाश में हैं। वे जो नवरात्र का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं और उसमें थोड़ा अधिक आनंद भी लेने के लिए तैयार हैं!

आखिर, नवरात्र बुराई पर भलाई की जीत का आनंद लेने का उत्सव है। यह दिव्य देवी दुर्गा का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने शांति बनाने के लिए राक्षस महिषासुर की हत्या की थी। नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के नौ विभिन्न रूप, अर्थात् शैलापुत्री, ब्रह्मचारिनी, चंद्रघांत, कुशमंदा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्री और महागौरी (छोटे से बड़े क्रम में) की पूजा करने के लिए समर्पित हैं। उनमें से प्रत्येक की अपनी पिछली कहानी है, लेकिन वे हमें एक जैसी सिख देती हैं। अपने भीतर की शक्ति को पूरी तरह से मुक्त कर देने की सिख वे हमें देती हैं। प्रत्येक कहानी बताती है कि बाधाओं के बावजूद हमारे भीतर के प्रकाश से हम बुराई पर कैसे जीत सकते है।

इसके अलावा, नवरात्र हमें एक राष्ट्र के रूप में हमारी जड़ों की याद दिलाता है। हम स्वाभाविक रूप से ऐसा देश है जो सहज गुणों से भरा हुआ हैं। साथ में हमारे पास, मिलकर सभी बाधाओं को आसानी से दूर करने की ताकत है। इसलिए जब नवरात्र जैसे त्योहार आते हैं, तो हम इस स्वाभाविक भलाई को देखने के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से जीवंत होते हैं जो भारत को दुनिया के सबसे महान राष्ट्रों में से एक बनाता है। यह याद दिलाता है कि हम भारतीय होने का मतलब क्या हैं और महान भारतीय मूल्यों का हर एक व्यक्ति के लिए वास्तव में क्या मतलब है।

ऐसे समय में जब अपराध, हिंसा और दुर्व्यवहार बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार अपने चरम पर है, हमारे दिमाग में बार-बार नकारात्मक विचार आना कुछ भी नया नहीं है! आने वाले हर दिन के साथ नकारात्मक विचारों से दूर होकर आशावादी बनना और अधिक कठिन हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में, इस तरह के निराशावाद के कारणों का क्या इलाज हो सकता है और वह कौन कर सकता हैं? विश्वास कीजिये या मत कीजिये, लेकिन दिव्यता की ओर मुड़ने से सच में हमारे बीमार दिल का इलाज होता है। कैसे? जवाब सरल है – सहानुभूति से। नवरात्र के पवित्र दिनों में सहानुभूति की भावना को महत्त्व दिया जाता हैं। इस समय सभी को आध्यात्मिक प्राणियों के रूप में देखा जाता है और दूसरों के दर्द या खुशी को एक जैसा सम्मान और करुणा दी जाती है। यह हमारे बीच संतुलन बनाने का एक आसान तरीका है क्योंकि यह हमारे विवेक को सही और गलत से दूर हटकर लोगों और परिस्थितियों को स्वीकार करने के लिए आगे बढ़ने में मदद करता है।

हमारे आस-पास की नकारात्मकता के बावजूद नवरात्र हमें सकारात्मकता से भर देता है। वह परंपरागत अनुष्ठान भक्ति और जागृति लेकर आती हैं। वह हमारे कर्तव्यों के प्रति, अच्छाइयों को देखने के लिए, हमारी कमियों को दूर करने और विजयी होने के लिए आह्वान है। यह हमें दिखाती है कि हम हमारी क्षमता के मुकाबले कुछ और ज्यादा कर सकते हैं।

अंत में, नवरात्र हमारे पापों को स्वीकार करने, उन से छुटकारा पाने और कुछ दिव्य आत्म-खोज के लिए अपनी दिव्य आंखों को अपने भीतर की ओर मोड़ने का एक मार्ग है। सभी शोर और भ्रम के बीच यह हमें ज्ञान का मार्ग खोजने में मदद करता है। यह हमें अपना आध्यात्मिक मार्ग शुरू करने और असीमता खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है – जहां कोई सीमा नहीं है, कोई बाधा नहीं है, कुछ मुश्किल नहीं है लेकिन अंतहीन खुशीयां और आनंद है। आप हर किसी को वैसा देख सकते है और उनसे वैसा बर्ताव कर सकते है जैसा की आप चाहते है की आप के साथ हो!

आप गरबा खेलते समय इन बिंदुओं को ध्यान में रख सकते हैं ताकि आप नृत्य के इस सबसे लंबे त्यौहार का आनंद लेते हुए उसका सार और गहन अर्थ समझ सकें!

Share