DO YOU HAVE A RICH MIND?

Written by Sneh Desai on January 5, 2018

rich mind



The one big boon that this day and age has provided us with is to be able to openly talk about our mental health, thus separating the stigma that used to be attached to it. However, that does not solve the actual problem. For those lucky few, who are able to assess their mental wellness, an aware mind is a rich mind. Unfortunately, while we take care of our physical self just fine, when it comes to our mental health most of us are stumped. Why? Because when you come to define the parameters of how you feel inside – there is no black or white, i.e., we are unable to set quantifiable goals. So let’s start now:-

Negativity:

The one true enemy to your mental richness is negativity. More often than not, keeping our circumstances ceteris paribus, we ourselves jam our heads with inane negative thoughts. Most of it comes through either overthinking or by placing too much importance on what others think/feel/say about you; all of which binds us a lot more. Do you do that? How often do your thoughts wander on trivial things that only amounts to increasing stress & negativity? Does that make you feel mentally heavy or caged? If the answer to any of these questions is affirmative, you need to truly start thinking more…positively.. for a change.

Contribution:

If the thought of giving something precious away makes you cringe, I have bad news for you. Such behaviour is reflective of how narrow your mindset is. Only someone who has the heart to give abundantly without expectations, can receive in abundance. Thoughts of giving naturally stem from the positive change you want to bring to this world. If contribution & sacrifice is one of the most important aspects of your life, you are headed in the right direction; if you constantly think of others’ well-being without inflicting hurt by mere thoughts, the richness of your mind is more precious than all the jewels in the world. Preserve it and it will only grow more!

Grateful:

While most of us reading this have a roof over our head and food to eat, we are not grateful for these vital tools of survival and how they separate us from the millions who are deprived of it. That is being rich and being immensely thankful for the same is the bottom-line of having a rich mind. It is the simplest and the most powerful means of going from rags to riches. How often do we take a beat to just appreciate where we are in life and what we have?? If you regularly want to follow a practice of being grateful, I have designed a very unique kit ‘The Last Lap’ that would not only help you be grateful from inside but also lead you to your goals.

(Mis)Judgement:

The one thorn that pricks all of mankind is unsolicited judgement; it is absolutely uncalled for let alone advocated. If you are constantly looking at others and judging them for how they look, what they wear, what they say, where they go, what they do, then life is going to be a battlefield; and it is going to come at you with a bigger army than you are ready for! Physical aspects are ever changing, instead look at a person’s inward beauty and be rest assured that it will put you to shame.

Abundance:

Thoughts should be filled with the energy of abundance instead of meagre means. Abundant love, health, wealth, goodness, greatness, success – not just for you but your loved ones, relatives, acquaintances, lost friends, even strangers and the whole of mankind. The most powerful thought that one can generate is that there is more than enough for everybody to be able to live a life of abundance than inadequacy.

Fear:

People who eat, sleep and breathe in fear can never extend a hand of kindness – not for themselves, definitely not for others. Because they are already trapped, and no amount of riches in the world will make them truly happy, because they are unable to love. Love sets you free, fear traps you in a cage of self-loathing and suffering. Which one do you choose?
If you are wondering how to achieve all the above things together or more, come to my signature event 2- days ‘Change Your Life’ Workshop and experience the change there and then only.
To sum it up: “Being rich isn’t about money, it is a state of mind.” – Harvey Mackay

क्या आपके पास एक समृध्द मन है?

आज के युग का बहुत बड़ा वरदान है अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुल कर चर्चा कर सकना, जिसके कारण उससे जुडा कलंक दूर हो गया है| लेकिन इससे मौजूदा समस्या हल नहीं होती| उन थोडेसे भाग्यशाली लोगों के लिए जो अपनी मानसिक स्वस्थता आंक सकते हैं, एक जागृत मन एक समृध्द मन है| दुर्भाग्यवश, जहाँ हम अपने बाह्य शरीर की देखभाल अच्छे से करते हैं, वहीँ जब मानसिक स्वास्थ्य की बात आती है तो हम चकरा जाते हैं| क्यों? क्योंकि जब हम भीतर से कैसा महसूस होता ही उसके परिमाण निश्चित करने लगते हैं तो – कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं लिखा होता – अर्थात् – हम प्रमाणित करने वाले लक्ष्य नहीं निश्चित कर सकते| तो, आओ अभी शुरू करें:-

नकारात्मकता:

आपकी मानसिक समुध्दी की सही माइनों में एक ही दुश्मन है, और वह है नकारात्मकता| अधिकतर बार, अपने हालात पूर्ववत रखकर, हम अपने सरों को बेकार के नकारात्मक विचारों से भर लेते हैं| इसका ज्यादातर हिस्सा अतिशय सोचने के कारण या अन्य लोग अपने बारे में क्या सोचेंगे या कहेंगे उस बात को अत्यधिक महत्त्व देने के कारण होता है; यह सारी बातें हमें और भी ज्यादा जकड लेती हैं| क्या आप ऐसा करते हो? आपके विचार कितनी बार तुच्छ बातों की ओर सरक जाते हैं जिससे केवल आपके तनाव तथा नकारात्मकता में वृध्दि होती है? क्या इससे आप मानसिक रूप से बोझिल या पिजरे में कैद होने जैसा महसूस करते हो? यदि उपरोक्त किसी भी प्रश्न का उत्तर हाँ है, तो सही में आपको अधिक सोचने की ज़रुरत है…लेकिन हकारात्मक तरह से…एक बादलाव के लिए ही सही!

योगदान:

यदि किसी बहुमूल्य वस्तु दे देने के विचार से आप शर्मिंदगी महसूस करते हैं, तो मेरे पास आपके लिए एक बुरी खबर है| ऐसा व्यवहार आपके संकुचित मानसिक पूर्वग्रह को दर्शाता है| केवल वही व्यक्ति जो दिल खोल के, किसी भी अपेक्षा के बिना अधिक मात्रा में दे सकता है, अधिक मात्रा में पा भी सकता है| स्वाभाविक रूप से देने के आपके विचार, दुनिया में आप जो हकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं उसी से शुरू होते हैं| यदि योगदान & बलिदान आपके जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं तो आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं; केवल विचारों से दु:ख पहुंचाने के बजाय, यदि आप हर वक्त अन्यों के कल्याण के बारे में सोचते हैं, तो आपके मन की समृध्दी दुनिया के सारे पेशकिमती हीरों से भी अधिक मूल्यवान है| इसे संभाल के रखें; यह बस बढती ही जाएगी!

आभारी:

हम में से अधिकतर लोग जब यह पढ़ रहे हैं तब हमारे सर पर छत है और खाने के लिए हमारे पास काफी है, लेकिन जीवित रहने के इन अत्यावश्यक साधनों के लिए, और किस तरह वे जिनके पास यह सब नहीं है उनसे हमें अलग करते हैं, उसके लिए हम आभारी नहीं हैं| यही है अमीर होना, और इन सब के लिए पूरी तरह से आभारी होना समृध्द मन की आधार रेखा है| चीथड़ों से संपत्ति तक जाने का यह सबसे सरल और सबसे सशक्त तरीका है| हम कितनी बार कुछ क्षण के लिए दम लेकर खुद ज़िन्दगी में कहाँ हैं इस बात को, व हमारे पास क्या-क्या है उस बात को, सराहते हैं? यदि आप आभारी होने की नियमित आदत डालना चाहते हो, तो मैंने एक विशिष्ट किट ‘द लास्ट लैप’ बनाई है जो आपको ना केवल अंदर से आभारी होने में मदद करेगी लेकिन आपको अपने लक्ष्यों तक भी पहुंचाएगी|

(गलत) फैसला:

एक काँटा जो मनुष्य जाति को चुभता है वह है अनापेक्षित फैसला; यह एकदम ही बिन बुलाया होता है, और सलाहकारी होने की तो बात ही जाने दो| यदि आप हमेशा दूसरों के देखते हो और वे कैसे दिखते हैं, क्या पहनते हैं, क्या कहते हैं, कहाँ जाते हैं, क्या करते हैं, उस पर से उन्हें आँकते हो तो, जीवन एक रणभूमि बन जाएगी; और यह आप पर आप अपेक्षा करो उससे कई गुना बड़े लश्कर के साथ हमला बोल देगी! बाह्य अवस्थाएँ हर वक्त बदलती रहती हैं, अतः व्यक्ति की भीतरी सुन्दरता को देखें और यकीन मानों की यह आप को शर्मिंदा कर देगी|

बहुतायत:

विचार दुर्बल युक्तियों के बजाय बहुतायत की उर्जा से भरे हुए होने चाहिए| बहुत सारा प्यार, स्वास्थ्य, धन, अच्छाई, महानता, सफलता – केवल खुद के लिए ही नहीं बल्कि अपने प्रियजनों, रिश्तेदारों, जान-पहचान वालों, खोए हुए दोस्तों, अन्जान लोगों के लिए भी, और समस्त मानव जाति के लिए| सबसे सशक्त विचार जो कोई भी कर सकता है वह यह है की हर एक के लिए अपर्याप्तता नहीं, बल्कि बहुतायत की जिंदगी जीने के लिए सब कुछ ज़रुरत से ज्यादा मौजूद है|

भय:

जो लोग भय में ही खाते, सोते, और साँस लेते हैं वे कभी भी नेकी का हाथ नहीं बढ़ा सकते – खुद के लिए नहीं और दूसरों के लिए तो बिलकुल भी नहीं| क्योंकि वे पहले से ही जकड़े हुए हैं, और दुनिया भर की चाहे जितनी भी समृध्दी वे पा लें, कभी सुखी (खुश) नहीं हो सकते, क्योंकि वे प्यार नहीं कर सकते| प्यार आपको आझाद करता है, लेकिन भय आपको आत्म-घृणा और पीड़ा के पिंजरे में कैद करता है| आप किसे चुनते हो?

यदि आप सोच रहे हैं की उपरोक्त सारी चीज़ें एक साथ या उनसे भी ज्यादा कैसे हासिल की जाएँ, तो मेरे चिन्हक कार्यक्रम ‘चेंज योर लाइफ’ के २-दिवसीय वर्कशॉप में आओ और बिलकुल वहीँ पर बदलाव का अनुभव करो|
सारांश में कहें तो:
“अमीर होना पैसे के बारे में नहीं है, यह मन की एक स्तिथि है|” – हार्वी मैके

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