Getting Things Done

Written by Sneh Desai on September 9, 2017

Getting Things Done




Productivity is all about time management; which in turn is highly essential in maintaining a healthy work environment and increasing your efficiency thereby allowing new-found effectiveness to give a boost to your self-esteem. It is a lot more about self-discipline, i.e., making a responsible choice and sticking through a make-believe system. Anything complicated can be tackled if it is broken down into easy manageable tasks or steps.

Take a look for yourself:-

    Step 1: A SYSTEM : Find what works for you dynamically
  • The world is ever-changing and adapting to it is half the job done. Hence, a system is required that can dynamically adjust to this world without taking away your work-proficiency and potency.
  • Create healthy habits and rituals. Exercise and stay energetic instead of starting your mornings on a drab and lifeless note. A good start is extremely important. Eat healthy throughout the day and maintain hygiene levels to perfection. These things seem small but in the long run they help you to stay more focused and productive.
  • Start with knowing your strengths and weaknesses well enough. This way you know the kind of work you will be able to handle under pressure and which ones will make you feel vulnerable and directionless.
  • Find out at what time during work you feel the most energetic, and choose the most dreadful tasks to complete at that time – so that you are most focused. And when you feel weary or tired you can take on your favorite tasks to help you cope with your mood-swings thereby maximizing your productivity.
  • Try and assimilate your tasks into smaller categories and proceed accordingly; instead of taking a large chunk and feeling overworked. You can learn and apply this productive quality with one of Sneh Desai’s products called ‘The Last Lap’ where you are given a proven kit (to be applied over a year) to gradually achieve your goals easily and effortlessly.
  • Learn to build a healthy interpersonal relationship with your employees and subordinates. Learn to say no and you will automatically function from a position of choice and responsibility thereby getting a lot more things done than usual.
  • Find out the reasons that stress you out at work and either try and steer clear from them or face them. For example, deadlines. Either approach it head on or work small quantities every day, to avoid building unnecessary last-minute pressure. If you really want to get rid of your stress, join Sneh’s 4- days ‘Ultimate Life Camp’ where you learn the techniques and secrets of being stress-free forever.
    • Step 2: TAKE OUT TIME: Time Management
  • Give yourself the luxury of social-media detox. Keep your smartphones at bay or at least give your WiFi a rest for good. If computers tempt you, then make your notes physically on a notepad instead of taking it down on your computer. In case your work does not require you to connect to the internet, keep it off!
  • Work for an hour or 50 minutes and give yourself a ten or twenty minute break and not more than that! Break is essential to keep your stress-levels in control, but taking more than necessary is a waste of both time and energy. Keep an alarm to ensure self-control.
  • Find out mundane tasks that eat up small portions of your time but when accumulated make for a substantial bit. Keep a check on these tasks and use the saved time effectively. Build a routine. For example, set a particular time to check on your emails (both personal and work related) instead of haphazardly checking it every now and then.
  • Make good use of technology. Instead of Twitter, Facebook etc. use your smartphone to keep reminders and make to-do lists. Google Keep and Google Calendar do a splendid job. This way a lot of time is saved in trying to remember essential to-dos, because your phone reminds you instead!
  • Learn to pre-plan. Look at the time you take during a shower etc. as a window of opportunity to plan your day well in advance.
    • Step 3: REVIEW: Distinguish between goals and objectives
  • One of the most important steps in getting things done is to be able to distinguish between goals and objectives. Objectives are long-term and goals are more time-bound. Focus on your goals and you will achieve more.
  • Review and reestablish your system every few weeks.
  • Sort out your priorities and give weightage to such goals that need your immediate attention and may have an immediate consequence.
  • Keep a tab on the kind of work you are able to accomplish and the time you’re taking in accomplishing the same. If need be employ more self-control methods.
  • Focus on the present instead of the future.
  • Reflect on positive thoughts and things that motivate and inspire you.
  • Keep an open mind and heart and be honest to yourself about taking criticisms.
  • Take feedback from your employees and conduct discussions and review-procedures to see how you can improve.
  • TAKEAWAY: It is not a temporary method, these steps need constant upkeep. The more honest to it you are, the more your productivity. Everyone works differently and has a different environment. Hence, ponder over the above methods and choose wisely according to your needs and preferences. Build a system and adhere to it and change it as per the changing demands of your work.

    कार्य पूरे करे

    उत्पादकता समय के अनुशासन पर निर्भर है; जोकि काम करनेका स्वस्थ माहोल बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है| इससे आपकी कार्यक्षमता बढती है और नई प्राप्त असरकारकता के साथ आपके आत्म सम्मान को बढ़ावा मिलता है| यह ज्यादातर खुद को अनुशासन में रखने के बारे में है, उदाहरणतः – एक ज़िम्मेदार चयन करना और एक बनावटी योजना में बने रहना| कोई भी जटिल समस्याको आसानी से सुलझाया जा सकता है अगर उसे छोटे हिस्सों में बाँटकर सहज प्रबंधनीय कार्यों या स्तरों में परिवर्तित किया जाय|

    आप खुद ही देख लीजिये :-

      कदम १ : एक व्यवस्था : आपके लिए जोशीले ढंग से क्या काम करता है उसे खोजो
  • यह दुनिया प्रति क्षण बदलती है और उसके अनुरूप बनना आधा काम करने बराबर है| इसीलिए एक व्यवस्था ऐसी चाहिए जो आपकी क्षमता या काम करने की कुशलता को आपसे छीने बिना, जोशीले ढंग से दुनिया के साथ अनुकूलन करे|
  • अच्छी आदतों और रस्मों का निर्माण करें| हमेशा व्यायाम के साथ पूर्ण शक्तिशाली रूप से अपनी सुबह की शुरुआत करें नाकि नीरसता के साथ बेजान तरीके से| एक अच्छी शुरुआत बेहद जरुरी होती है| पुरे दिन अच्छा और स्वास्थ्य वर्धक खाएं और आरोग्य को बनाए रखें| यह दिखने में छोटी लगाने वाली बातें ही अंततः आपका ध्यान अधिक केन्द्रित रखती हैं और आपको उपजाऊ बनाती है|
  • अपनी ताकतों और कमजोरियों को भलीभांति जानते हुए दिन की शुरुआत कीजिए| इससे आपको अंदाज़ रहेगा की कौनसे प्रकार का कार्य आप दबाव में रहेते हुए भी संभाल सकते हो और किस प्रकार का कार्य आपको दिशाहीन और कमजोर बना सकता है|
  • पता लगाइए की आप काम करते समय कब सबसे ज्यादा चुस्त महसूस करते हैं, और सबसे नीरस व कठिन कार्य उसी समय कीजिए – ताकि आप सबसे ज्यादा केन्द्रित होंगे| और जब आप बहुत थके हुए हो तब आप अपने पसंदीदा कार्य करें जिससे आपको अपने मिज़ाज के परिवर्तनों को संभालने में मदद मिलेगी, जिससे आपकी उत्पादकता महत्तम हो जाएगी|
  • प्रयत्न करके अपने कार्य को छोटे विभागों में बाँट कर आत्मसात कीजिए और उसके मुताबिक आगे बढ़ें; बड़ी मात्रा में काम का बोझ उठाकर थकने से यह बेहतर होगा| आप इस उपजाऊ आचरण को सीख सकते हैं और इसका प्रयोग कर सकते हैं| डॉ.स्नेह देसाई के पुस्तक ‘धी लास्ट लैप’ में आपको एक अनुभूत उपकरण समूह (किट) [एक साल तक प्रयोग करने के लिए] दिया जाता है जो आपको अपने ध्येय को क्रमशः, सरलता से और बिना कष्ट के प्राप्त करा सकता है|
  • अपने कर्मचरियों के और अधीनस्थ साथियों के साथ तंदुरस्त आन्तरिक सम्बन्ध बनाना सीखिए| ‘ना’ कहेना सीखो और आप अपनेआप ही उत्तम और जवाबदेय अवस्था से काम कर पाओगे और हमेशा से ज्यादा काम करवा पाओगे|
  • आपके काम में दखल देने वाले या आपको जिससे तनाव महसूस होता है उसके पास ना जाएँ या उस पर प्रयत्न पूर्वक काबू पाकर उसका सामना करें| उदाहरणतः अंतिम तिथियाँ| या तो सीधे ही उनका सामना करें या हररोज थोडा थोडा कम करते रहें, जिससे अंतिम समय का दबाव दूर रख सकेंगे| अगर आप सही में तनाव मुक्त रहेना चाहते हो तो डॉ.स्नेह के ४-दिवसीय ‘Ultimate life camp’ में जुड़ें, जहाँ आप हमेशा तनाव मुक्त रहेने की तरकीबें और रहस्य सीख सकते हैं|
    • कदम २: समय निकालें : समय का प्रबंध
  • अपने आप को सामाजिक माध्यमों का विष हरण करने की समृध्धि दें| अपने स्मार्ट फोन को दूर रखें या वाय-फ़ाय को पूरी तरह से बंद रखें| अगर आपको कंप्यूटर आकर्षित करते हैं तो अपनी टिप्पणियाँ हाथ से किसी कापी में लिखें कंप्यूटर पर नहीं| अगर आपके काम में इन्टरनेट से जुड़ना जरुरी नहीं है तो इन्टरनेट बंद रखें|
  • ५० मिनिट या १ घंटे के काम के बाद खुदको १० या २० मिनिट का विराम दें, उससे ज्यादा नहीं! अपने तनाव के स्तर को काबू में रखने के लिए विराम लेना जरुरी है, पर जरुरत से ज्यादा विराम लेने से समय और शक्ति दोनों का व्यय होगा| खुद पर संयम रखने के लिए अलार्म रखें|
  • उन छोटे-छोटे व नीरस कार्यों को खोजिये जो आपके समय को अल्प मात्रा में कई बार खा जाते हैं, लेकिन जब इकठ्ठा किये जाएँ तो मात्रा काफी बढ़ जाती है| इन कामों पर काबू रखें और बचे हुए समय का असरकारक तरह से उपयोग करें| एक दिनचर्या बनाओ| उदाहरणतः, कभी भी और बार-बार अपने इ-मेल (निजी व व्यावहारिक) देखने के बजाय उनके के लिए एक समय नियुक्त कीजिये|
  • तकनीक का अच्छा इस्तमाल करें| ट्विटर, या फेसबुक के बजाय, स्मरण पत्र और करने वाले कामों की सूची रखने के लिए अपने स्मार्ट फोन का उपयोग करें| ‘गूगल कीप’ और ‘गूगल कैलंडर’ उत्तम कार्य कर हैं| इस तरह महत्त्व के कार्यों को याद करने का समय बचाया जा सकता है क्योंकि आप को याद करवाने का काम तो आपका फोन ही कर देता है|
  • आगे से आयोजन करना सीखें| नहाने इत्यादि में लगने वाले समय को अपने दिन का पूर्व आयोजन करने के लिए एक अवसर मानो|
    • कदम ३: समीक्षा: ध्येय और उद्देश्य का फर्क पहचाने
  • कार्य करने में एक महत्त्व का कदम है की आप ध्येय और उद्देश्य में का फर्क समझ सकें| उद्देश्य लम्बे समय का होता है जबकि ध्येय निश्चित समय से बंधा होता है| अपने ध्येय पर केन्द्रित रहिये और आपको ज्यादा प्राप्त कर सकोगे|
  • हर दो-चार हफ़्तों के बाद अपनी व्यवस्था की समीक्षा करें और उसे पुनः प्रस्थापित करें|
  • अपने कार्यों की प्रथमता को जानकर उन जरुरी कार्यों को प्राधान्य दें जिन्हें तुरंत आपके ध्यान की आवश्यकता है और जिनके परिणाम त्वरित नज़र आने वाले हों|
  • जो काम आप पूरा कर सकते हो और उस के लिए जो समय आप लेते हो उस पर ध्यान दीजिए| जरुरत लगे तो खुद पर अधिक नियंत्रण रखने के तरीके अपनाइए|
  • भविष्य पर ध्यान केन्द्रित करने के बजाय वर्तमान पर करें|
  • जो आपको प्रेरित व उत्साहित करें ऐसे हकारात्मक विचारों पर चिंतन कीजिये|
  • दिल और दिमाग खुला रखें और अपने आपसे प्रमाणिक रहते हुए आलोचना का स्वीकार करें|
  • अपने कर्मचारियों का प्रतिभाव जाने और वार्तालाप व समीक्षा कार्यक्रमों का आयोजन करें ताकि बेहतर कैसे हो सकते हैं यह जान सकें|
  • साथ ले जाएँ: यह कोई अस्थाई व्यवस्था नहीं है, इन कदमें को लगातार मरम्मत की जरुरत रहेती है| आप जितने ज्यादा इमानदार रहेंगे आपकी उत्पादन क्षमता उतनी बढ़ेगी| हर व्यक्ति अलग वातावरण में अलग तरह से काम करता है| अतः, उपरोक्त व्यवस्थाओं पर मनन कीजिए और आपकी जरूरतों व पसंद के अनुसार चुनिए| एक कार्य प्रणाली बनाईए और उससे चिपके रहीए और जरुरत के हिसाब से उस में बदलाव करते रहीए|

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