HOW FOCUSED ARE YOU ON YOUR GOALS?

Written by Sneh Desai on February 16, 2018

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Goals, dreams, ambitions, aspirations – by whatever name called are measured by the passion, hard work and focus you decide to dedicate to them for them to materialize. When we look at really successful people, most of us only see the bling, glamour and the lavish lifestyle. However, what is important to imbibe from these people is the love and hard work they put in and CONTINUE to put in till date. Let’s assess how focused you are:-

1. Dreamer or Achiever?:

All the important things in life begin with one very simple yet effective measure – planning! For your goals to become reality you need to create a plan. This is the core difference between dreamers and achievers. Dreamers have a vague notion of what they want in life and end up being highly delusional or are lost simply because they don’t plan ahead to give a certain potency to their dreams! On the other hand achievers create a plan and get a clear picture of what they want and how to go about it. Which one are you? (If you’d want to move towards being an Achiever and learn how to plan your goals with the right method, come to my Signature event ‘Change Your Life’ and be a part of Achievers’ Team.)

2. The Noise:

It is about commitment. If you are a 100% committed to your goal, you will cut the noise. The word ‘noise’ here has many connotations. It is the immediate environment around you, it is the disturbing social media alerts, it is everything that takes up your time with the intention to waste it, it is the negative people who are constantly pulling you down, it is the number of people/relatives who are asking you to take a shortcut or do something else – IT IS everything and everyone who pulls you away from where you want to go.

3. Routine:

It is about the discipline at the end of the day. Working hard intensely one day is still nowhere close to getting up every day despite your circumstances and giving your 200%. Focused people tend to be more organized and disciplined. They follow a routine to back up their aspirations and are seldom deterred from it. Needless to say, this routine is also made to be dynamic, i.e., they are flexible about their routine in the ever-changing and fickle environment that we live in.

4. No Plan B:

Having a so-called “Plan B” is a very misleading and uninspiring change that you might later use as an excuse for dropping out of your Plan A. It is also reflective of how misguided or unsure you are of your own goals. It is the opposite of being focused! Not unless you have an absolute NEED to drop your actual goals and work (from scratch, that too) towards anything, entirely diametrically opposite, should you adopt this lame excuse of a Plan B. It is only to side-line your actual vision.

5. Vent Out Correctly:

Focused people know how to respond to failure – venting out the anger correctly. No excuses, no regrets, no blame-game, nothing. Just utilizing the pent-up energy in improving their work. Positivity helps you a great deal here too. If you are an inherently or even a mechanized positive person you would rather turn the negativity into a positive force helping your work instead of wasting yours and others’ time and energy in explanations.

6. Self-Analysis:

Do you look for constructive criticism or for blind praises that feed your ego needlessly? A certain level of self-analysis and a critical eye is pertinent to growth, both yours and your work’s. Achievers, as mentioned above, look for criticism more than they look for praise because not until you are in touch with reality can you work better. They don’t surround themselves with yes-men and in no circumstances do they cage themselves in the shackles of denial and an echo-chamber.

Hopefully the above will stand true for you and if not, you know what to change now! It is never too late to educate yourself to your shortcomings and emerge better than before. And when it comes to your goals in life? It is of all the more significance. (Want to learn more about your Goals and how to set or achieve it with the right formula and strategies? Order a copy of my unique ‘Goal Setting DVD’ today.)


लक्ष्य, सपने, इच्छाएँ, आकांक्षाएँ – चाहे जो भी नाम हो, उनका सही मापदंड उन्हें पूरा होने के लिए आप उनकी ओर कितने जूनून, कड़ी मेहनत, और केन्द्रित रहकर बढ़ते हैं इस बात पर निर्भर होता है| जब हम सही में सफल लोगों के देखते हैं, तो हम में से अधिकतर लोगों को केवल उनकी वह चमक-दमक, वह मोहक अंदाज़, और ठाठदार जीवन शैली ही नज़र आती है| लेकिन, इन लोगों से महत्व की बात जो सीखने व आत्मसात करने जैसी है वह है उनकी कड़ी मेहनत और काम के प्रति प्यार जो वे लगातार करते आ रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे| आओ देखें उनका ध्यान कितना केन्द्रित होता है:-

१. स्वप्नद्रष्टा या सफल व्यक्ति?:

जीवन की हर महत्वपूर्ण बात केवल एक ही सरल परन्तु असरदार परिमाण से शुरू होते हैं – आयोजन! अपने लक्ष्यों को हकीकत में परिवर्तित करने के लिए आपको कोई योजना बनाने की आवश्यकता है| स्वप्नद्रष्टा और सफल व्यक्ति में यही तो मूलभूत फर्क है| स्वप्नद्रष्टाओं के पास जीवन में क्या पाना है इसका एक धुंधला चित्र होता है, और अंत में अत्यधिक भ्रमित बन के रह जाते हैं या पूरी तरह से खो जाते हैं, केवल इसी लिए क्योंकि उन्होंने अपने सपनों को निश्चित सामर्थ्य देने के लिए पहले से कोई आयोजन नहीं किया होता! दूसरी तरफ, सफल व्यक्ति आयोजन करते हैं और उन्हें क्या हासिल करना है उसका स्पष्ट चित्र बनाकर उसे कैसे पाना है यह भी जानते हैं| आप कौन हैं? (यदि आप सफल बनने की ओर बढ़ना चाहते हैं और अपने लक्ष्य के लिए सही तरह से आयोजन करना सीखना चाहते हैं, तो मेरे चिन्हक कार्यक्रम ‘चेंज यौर लाइफ’ में आइये और सफल व्यक्तियों की टीम का हीस्सा बन जाइए|)

२. वह आवाज़:

यह वचनबध्दता के बारे में है| यदि आप अपने लक्ष्य से १००% वचनबध्द हैं, तो आप सारे आवाज़ बंद कर देंगे| यहाँ ‘आवाज़’ शब्द के अनेक संकेतार्थ हैं| यह आपके इर्द-गिर्द का वातावरण है, परेशान करने वाले सामजिक माध्यमों की सूचनाएँ हैं, यह वह सब कुछ है जो आपका समय ले लेता है और उसे बरबाद करता है, यह वह सारे नकारात्मक व्यक्ति हैं जो आपको नीचे खींच रहे हैं, यह वह सारे लोग / सम्बन्धी हैं जो आपको किसी दूसरी ओर का संक्षिप्त मार्ग दिखा रहे हैं या कुछ और करने की सलाह दे रहे हैं – यह वह सारी बातें या लोग हैं जो आपको अपने लक्ष्य से दूर ले जा रहे हैं|

३. नित्य-कर्म:

अंत में यह केवल अनुशासन के बारे में है| एक दिन डट कर अत्यधिक काम करना, अपनी परिस्थिति जो भी हो फिर भी रोज़ जल्दी उठकर अपने काम को अपना २००% देने के सामने कुछ नहीं है| जिनका ध्यान लक्ष्य पर है वे लोग अधिक व्यवस्थित और अनुशासित होते हैं| वे एक सुनिश्चित दिनचर्या का आचरण करते हैं और उससे कदाचित ही हटते हैं| यह कहने की ज़रुरत नहीं है कि यह दिनचर्या स्फूर्त भी होती है, अर्थात, हम जिस नित्य-बदलते और अस्थिर वातावरण में रहते हैं उसी के हर स्थिति के अनुरूप, यह लोग अपने दिनचर्या को ढालते जाते हैं|

४. कोई दूसरी योजना नहीं:

तथा-कथित ‘दूसरी योजना’ (प्लान बी) तैयार रखना बड़ा ही भ्रामक और निरुत्साह करने वाला होता है और बाद में आप इसे अपनी मुख्य योजना (प्लान ए) छोड़ने का बहाना बना सकते हो| यह उस बात का भी संकेत देता है की आप कितने पथभ्रष्ट और अपने लक्ष्य के प्रति कितने अनिश्चित हो| यह ध्यान केन्द्रित रखने के बिलकुल विपरीत है! जब तक बिलकुल ही ज़रूरी नहीं होता कि आप अपने लक्ष्य छोड़ कर फिरसे किसी पूर्णतया विरीत ध्येय के लिए कार्य करें (और वह भी एकदम पहले से), केवल तभी आपने इस ‘दूसरी योजना’ (प्लान बी) का बहाना अपनाना चाहिए| यह केवल आपकी असली परिकल्पना को उपव्यवसाय बनाने के लिए है|

५. सही तरह से गुस्सा बाहर निकालिए:

जिन लोगों का ध्यान अपने लक्ष्य पर केन्द्रित होता है वे नाकामयाबी का सामना करना भी जानते हैं – और अपना गुस्सा सही तरह से बाहर निकालते हैं| कोई बहाना नहीं, कोई अफ़सोस नहीं, कोई दोषारोपण नहीं, कुछ भी नहीं| उस एकत्रित हुई उर्जा का उपयोग अपना काम सुधारने में करना है| यहाँ हकारात्मकता भी आपको काफी सहायता कर सकती है| यदि आप स्वभाव से ही या यांत्रिक रूप से एक हकारात्मक व्यक्ति हैं तो आप नकारात्म्कता को एक हकारात्मक शक्ति में बदलना पसंद करेंगे, ऐसी शक्ति जो आपको अपने काम में मदद करती है, नाकि आपका और अन्यों का समय व उर्जा सफाई देने में बरबाद करती है|

६. आत्म-विश्लेषण:

क्या आप तर्कसाध्य समीक्षा पसंद करते हो या अंधी प्रशंसा, जो आपके अहम् का बेमतलब ही पोषण करती है? कुछ हद तक खुदका तथा खुद के काम का आत्म-विश्लेषण और समीक्षात्म्क नजर आगे बढ़ने के लिए योग्य होते हैं| जैसा कि उपर कहा है, सफल व्यक्ति तारीफ़ से ज्यादा समीक्षा को ढूंढते हैं क्योंकि जब तक आप वास्तविकता के सम्पर्क में नहीं होते तब तक आप बेहतर काम नहीं कर सकते| वे अपने आप को चापलूसों से घिरा हुआ नहीं रखते और किसी भी परिस्थिति में अपने आप को इंकार की जंजीरों और गूँज-कक्ष में नहीं जकड लेते|

आशा है की उपरोक्त सभी बातें आप के लिए भी सही हों और यदि नहीं, तो आपको मालूम है की तुरंत क्या बदलना है| अपनी त्रुटियों को जानकार पहले से बेहतर बनकर उभरने के लिए कभी भी बहुत देर नहीं हुई होती| और जब आपके जीवन के लक्ष्यों की बात हो तब? फिर तो यह और भी अधिक महत्वपूर्ण है| (क्या आपको अपने लक्ष्यों के बारे में और उन्हें सही सूत्रों व युक्तियों से हासिल करने के लिए कैसे शुरुआत करें इसके बारे में जानना है? मेरे विशिष्ट ‘Goal Setting DVD’ के लिए आज ही आदेश दे दीजिए|)

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