How Lying Affects your Relationship ?

Written by Sneh Desai on December 8, 2018

How Lying Affects Relationship



Lying is vicious. All of us are aware of this fact, and yet we don’t stop ourselves from lying when it comes to our relationships. When this becomes a habit, there are too many insecurities & uncomfortable circumstances that we tend to put ourselves through. We conveniently forget the stress that we put on ourselves and the other person while continuing the said behaviour!

In my 4-days program ‘Ultimate Life’, I always stress upon this point where participants ultimately understand that ‘Truth will set you free.’ Today I want to address this issue and bring light on how lying affects our relationships and trust me it is never in a good way. It always has a toxic effect on everyone involved in the relationship.

It is a web:

We are all aware of the adage ‘a web of lies’. Why is it a web? Because to avoid one lie you need ten more. To prevent those ten, you need a hundred more. And this goes on & on unless you are exhausted. Thus, if you are not a master story-teller who has no boundaries whatsoever concerning the length you shall go to in order to ensure a certain image of yourself, stop lying! It is not worth it!

Instills Fear:

Needless to say a web of lies brings along with itself a lot of fear. Fear that someone might uncover your truth, the fear of getting exposed to your insecurities, fear that people will judge you etc. This goes beyond count. Lying instills fear that you don’t need the burden of. When one truth can set you free why strain your relationships with the headache of lying? If someone does not like you the way you are, then great! This way you can find out the truth about your relationship before taking it to a more serious level. Better sooner than later, right?

Razor-sharp Memory:

If you can remember a million lies to hold onto one relationship, you can definitely remember the actual, significant details of your relationships! Instead of lying, be sensitive & pay more attention to the little things that make you & the other person happy. Lying only leads to more mistrust, regrets & deceit. You will only end up having trust issues because of pushing your luck beyond a certain point with your white lies. Then it shall become difficult to bring the relationship back to normal!

Tendency to Change:

Lying will subconsciously make you lose your true self in front of the other person. You will constantly feel the need to put up a fake demeanor & put forth “an act” merely because of your unwillingness to be honest! Isn’t it a big price to pay? And believe me, if the other person is a true friend, he/she will be able to understand the difference in your behavior very easily! Consequentially, complications, arguments & fights will become inevitable!

Tedious Efforts:

Instead of making voluntary efforts in hiding every lie ever told to save your relationship, you can make efforts to save it by simply being truthful! Truth is bitter no doubt, but it also tests the purity of your relationships & saves you from innumerable efforts which are not only tedious but are highly unnecessary!

During the relationship session of my signature event ‘Change Your Life’ Workshop, participants dissolve years of fights and misunderstandings where they simply speak the truth. So be more honest & noble in your relationships unless you like the additional drama lying brings along with itself! However, if you want straight-forward, simple & happy relations in each sphere of your life, learn to be sensitively honest instead of being forthright with your white lies! Why don’t you pick up your phone and dial the number of that one person you have not been truthful to? Why don’t you tell him/her your honest account right now? Not unless you actually do it will you understand the power of truth!

झूठ कैसे आपके रिश्ते को प्रभावित करता है

झूठ बोलना दृष्टता है। हम सभी यह सच्चाई जानते हैं लेकिन फिर भी जब हम अपने रिश्तों की बात करते हैं तो हम झूठ बोलने से खुद को नहीं रोकते। जब यह आदत बन जाती है, तो हम अपने आप को कई असुरक्षित और असुविधाजनक परिस्थितियों में डालते हैं। हमने अपने व्यवहार से खुद को और दूसरे व्यक्ति को जो तनाव दिया था उसे हम आसानी से भूल जाते हैं!

मेरे 4-दिवसीय कार्यक्रम ‘अल्टीमेट लाइफ’ में, मैं हमेशा इस बात पर जोर देता हूं और अंत में सहभागियों के समझ में आता है कि ‘सत्य आपको मुक्त कर देगा।’ मैं आज झूठ बोलना हमारे संबंधों को कैसे प्रभावित करता है इस मुद्दे पर बात करना चाहता हूं और इसे समझाना चाहता हूं। झूठ बोलना कभी अच्छा नहीं होता है। यह हमेशा हर संबंध के हर किसी पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है।

1. यह एक जाल है:

हम सब ‘झूठ का जाल’ के बारे में जानते हैं। यह एक जाल क्यों है? क्योंकि एक झूठ से बचने के लिए आपको दस और झूठ बोलने की जरूरत पड़ती है। उन दस को रोकने के लिए, आपको सौ और चाहिए। और यह तब तक यह चालू रहता है जब तक आप थक नहीं जाते। इस प्रकार, यदि आप कोई बड़े कथाकार नहीं हैं जो आपनी छवि बनाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं, तो झूठ बोलना बंद कीजिये! यह फायदेमंद नहीं है!

2. मन में डर बैठता है:

यह बताने की जरूरत नहीं है की झूठ का जाल अपने साथ डर लेकर आता है। डर रहता है कि कोई आपकी सच्चाई बता सकता है, सबके सामने अपनी असुरक्षा खुली हो जाने का डर, डर कि लोग आप का आकलन करेंगे आदि।
ऐसी अनेक बाते है जिसकी गिनती नहीं कर सकते। आपको झूठ बोलने के डर के बोझ की जरूरत क्यों रखना चाहिए? जब एक सच्चाई आपको मुक्त कर सकती है तो झूठ बोलने के सिरदर्द से अपने रिश्तों को क्यों ख़राब करें? अगर कोई आपको पसंद नहीं करता है तो भी चलेगा! इस तरह आप अपने संबंध को आगे बढ़ाने से पहले अपने रिश्ते के बारे में सच्चाई जान सकते हैं। बाद में समझने से अभी इसी समय समझ जाना ज्यादा अच्छा है, है ना?

3. अति तेज स्मरणशक्ति:

यदि आप एक रिश्ते को पकड़े रखने के लिए दस लाख झूठ याद कर सकते हैं, तो आप निश्चित रूप से अपने रिश्तों के सही, महत्वपूर्ण बातें याद कर सकते हैं! झूठ बोलने के बजाय, संवेदनशील रहें और उन छोटी चीजों पर अधिक ध्यान दें जो आपको और दूसरे व्यक्ति को खुश करते हैं। झूठ बोलने से अविश्वास, पछतावा और छल बढ़ता है। एक निश्चित बिंदु के बाद, आप अपने सफ़ेद झूठ के कारण केवल अविश्वास को ही जन्म देंगे। फिर रिश्ते को सामान्य करना मुश्किल हो जाएगा!

4. बदलने की प्रवृत्ति:

झूठ बोलने से आप दूसरे व्यक्ति के सामने अपना सच्चा चरित्र खो देंगे। आपको लगातार नकली व्यवहार करने की आवश्यकता महसूस होगी और ईमानदार होने की आपकी अनिच्छा के कारण ही हमेशा एक “नाटक” करना पड़ेगा! क्या यह एक बहुत बड़ी कीमत नहीं है? मेरा विश्वास कीजिये, अगर दूसरा व्यक्ति एक सच्चा दोस्त है, तो वह आपके व्यवहार के अंतर को आसानी से समझ पाएगा/पायेगी! परिणाम यह होगा की बहस, झगड़े और कठिनाईयां निश्चित ही होंगे।

5. कष्टदायक प्रयास:

अपने रिश्ते को बचाने के लिए कहे गए हर झूठ को छिपाने में स्वयं प्रयास करने के बजाय, आप इस रिश्ते को सच्चाई से बचाने का प्रयास कर सकते हैं! इसमें कोई संदेह नहीं है की सच्चाई कड़वी होती है, लेकिन यह आपके रिश्तों की शुद्धता की भी परीक्षा लेती है। यह आपको बहुत सारे थकाऊ और अनावश्यक प्रयासों से बचाती है!

मेरे कार्यक्रम ‘चेंज योर लाइफ’ वर्कशॉप के रिलेशनशिप सत्र के दौरान, सहभागी वहाँ सच बोलकर वर्षों पुराने झगड़े और गलतफहमीयों को दूर करते हैं। तो आप अपने रिश्तों में अधिक ईमानदार और अच्छे रहें और झूठ बोलने के साथ होनेवाले ड्रामा से बचे। अगर आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में सीधा-साधा, सरल और खुशियों भरा संबंध चाहते हैं, तो अपने सफेद झूठ के साथ जीने के बजाय संवेदनशीलता से ईमानदार होना सीखें! आप अपना फोन उठाकर उस व्यक्ति का नंबर क्यों नहीं डायल करते जिसके साथ आपने झूठ बोला था? आप उसे अभी अपनी सच्चाई क्यों नहीं बताते? जब तक आप वास्तव में ऐसा नहीं करते हैं, तब तक आप सच की शक्ति को नहीं समझेंगे!

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