HOW TO BUILD GOOD HABITS

Written by Sneh Desai on July 29, 2017

Good Habits


Habits are the small decisions you make and actions you perform every day. Your life today is essentially the sum of your habits. How in shape or out of shape you are? How happy or unhappy you are? How successful or unsuccessful you are? Everything is as a result of your habits. What you do, day-in-day-out, makes you the person you are today, your belief system and your personality.
In the light of the above, to build good habits is a behavioral change which requires a fresh start, patience and perseverance keeping in mind how significant the change could be to you and the people around you.

1. Start small, silly! Change of habits is a struggle which needs constant upkeep and motivation. But this journey needs to start with something small which should not be something entirely insignificant. Our willpower declines as and when our day progresses and subsequently our motivation does too. Hence, picking a habit that is too easy but not unimportant can help you inculcate it without the need of either much motivation or a lot of stress. For example, instead of directly exercising early in the morning for an hour, start with just waking up early first! And then gradually start exercising for a few minutes till you know you can do it for an hour; and so on and so forth.

2. Simple disciplines every day! Be constant. Instead of taking on something too big every now and then, just do small good things every day. Every tiny grain of effort towards doing something good on a continual basis is better than making errors of judgment about taking up something incredibly huge right at the beginning. Along the way, your willpower and motivation will increase, which will make it easier to stick to your habit. Discipline is key – just simple ones! To help you remain on track or disciplined, Sneh Desai has designed a powerful product ‘The Last Lap’ which will ensure your everyday action in order to achieve any results you want. You cannot NOT achieve your goals with this product.

3. Be reasonable! Let momentary motivation not go to your head so much that you lose vision and become preposterous. Be practical with yourself. Break the habit you want to pursue into smaller parts; this way you will gain a steady momentum and the habit will become easier to accomplish. For example – if you want to build up to 20 minutes of meditation every day,split it into two segments of 10 minutes at first.

4. Quickly get back on track! In case while building a habit, you fail – there should be a quick mechanism for rehabilitation so that you get back on track. You shouldn’t expect to fail, but you should plan for failure. So quit being a perfectionist; it is not an extremist situation! Everybody fails, but only those who get back on track quickly succeed!

5. Patience for sustenance! New habits should feel easy, especially in the beginning. If you stay consistent and continue increasing your habit it will get hard enough, fast enough. Learning to be patient is perhaps the most critical skill of all. You can make incredible progress if you are consistent and patient. Patience is everything. Do things at a pace which you can sustain.

6. Set a reminder! If you’re a human, then your memory will fail you (most of the times!). This is why a reminder is such a critical part of forming new habits. Reminder does not depend on motivation; it depends on strategically managing your new behavior with your old one. Since all of us are visual beings, setting up a visual reminder is more effective. For example, you want to become more grateful then remind yourself that before taking your meals, you will focus on one thing that you’re grateful for. This way every time you sit for breakfast, lunch or dinner you shall remember to say thanks!

7. Reward yourself! It’s important to celebrate. We want to continue doing things that make us feel good. And because an action needs to be repeated for it to become a habit, it’s especially important that you reward yourself each time you practice your new habit. Give yourself some credit and enjoy each success. Sneh Desai shares some secret habits in detail that all the successful people follow (but people don’t know) in his ‘Winning Habits’ Seminar.

TAKEAWAY: Decide on which habits are important to you; the ones you want to relentlessly pursue instead of listening to others and follow their footsteps. Just be patient and consistent.

अच्छी आदतें कैसे बनती हैं?

आदत क्या हैं? रोज किये हुए छोटे निर्णय जिनका आप अमल करते हो वही आदत है| आपकी आजकी जिन्दगी आपकी आदतों का ही सारांश है| आप कितने स्वस्थ हैं या नहीं हैं? आप खुश या नाखुश हैं? आप कितने सफल या असफल हैं? यह सारी बातें आदतों का ही परिणाम है| दिन भर में आप जो करते हैं, उसी के कारण आज आप जो हैं वह बने हो, यही आपकी सही मान्यता और व्यक्तित्व है|
उपर जो कहा है उसके प्रकाश में, अच्छी आदतें अपनाना एक स्वभावजन्य बदलाव है जिसके लिए यह ध्यान में रखना होगा की यह बदलाव आपके लिए तथा आपके आसपास के लोगों के लिए कितना आवश्यक है; और फिर इसके लिए नए सिरे से शुरुआत करने की, धीरज की और दृढ़ता की जरूरत होगी|

१. छोटे से शुरू करें, मूर्ख! आदतों को बदलना संघर्ष हैं जो की सतत पुष्टि व उत्तेजना मांगता है| पर यह सफ़र किसी छोटी बात से, जो बिलकुल निरर्थक न हो, शुरू करना चाहिए| हमारा आत्मसंयम दिन बढ़ने के साथ कम होता जाता हैं और साथ ही हमारी उत्तेजना भी कम होती है| अतः एक आसान सी और थोड़ी उपयोगी भी हो ऐसी आदत डालने में काफी सरल होता है और इसके लिए आपको अधिक तनाव या प्रेरणा की आवश्यकता भी नहीं होगी| उदहारणतः; रोज सुबह सीधे १ घंटा व्यायाम शुरू करने के बदले पहेले सुबह जल्दी उठने की आदत बनायें| फिर बाद में, धीरे धीरे कुछ क्षणों के लिए व्यायाम शुरू करना चाहिए और जब आपको लगे की आप १ घंटा कर सकते हो तब बढ़ाना चाहिए; जिसे फिर आगे बढ़ाते हुए कायम करना चाहिए|

२. हर रोज़ सरल अनुशासन! अटल बनो| हमेशा कुछ बहुत बड़ा ठान लेने के बजाय, छोटी छोटी अच्छी चीजे रोज करनी चाहिए| शुरुआत में ही कुछ आश्चर्यजनक रूप से बड़ा करके गलतियाँ करने के बदले कुछ छोटा, मगर अच्छा करते रहने का हर एक अविरत प्रयास अधिक बेहतर है| साथ साथ आपकी संकल्प शक्ति और उत्तेजना भी बढ़ेगी, जिससे आपको आदत से चिपके रहने में मदद मिलेगी| इसकी एक ही गुरुचाबी हैं – अनुशासन| बहुत सरल है| अपने मार्ग पर डटे रहने के लिए या अनुशासन में रहने के लिए डॉ.स्नेह देसाई ने एक बहुत ही कार्यक्षम प्रस्तावना बनाई हैं “ध लास्ट लैप” जो आप के रोज के प्रयास और जो परिणाम आपको पाने हो उसमे मदद करेगी| इस की मदद से आप जो लक्ष्य पाना चाहते हो वह नहीं पाओगे ऐसा हो ही नहीं सकता|

३. तर्कसंगत बनें! क्षणिक उत्तेजना से आपका दिमाग भ्रमित हो जाएँ और अपना लक्ष्य खो दें और हास्यास्पद बन जाएँ यह भी ठीक नहीं होगा| अपने आप के साथ वास्तविक बने | आप जो भी आदत अपनाना चाहते हो उसे छोटे हिस्सों में बांट दो; इस तरह से आपको स्थायी आवेग मिलेगा और आदत डाल लेने में सरलता होगी| उदाहरणतः – आपको २० मिनिट ध्यान की आदत डालनी है, तो आप उसको १०-१० मिनिट के दो हिस्सों में विभाजित कीजिए|

४. जल्द ही सही मार्ग पर लौट आएँ! नई आदत आत्मसात करने की प्रक्रिया में आप नाकाम हो सकते हो – पुनरुध्धार की प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि आप वापस पटरी पर आ सकें| आपको असफलता की अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, परन्तु निष्फलता के लिए तैयार जरूर होना चाहिए| अतः आदर्शवादी बनना छोड़ दो; यह दुनिया का अंत नहीं है! हर कोई निष्फल हो सकता है, पर वही लोग सफल होते हैं जो जल्दी से सही मार्ग पर लौट आते हैं !

५. बने रहने के लिए धीरज! नई आदतें सरल लगनी चाहिए, खासकरके शुरुआत में| अगर आप आदत के प्रति दृढ रहें और उसे बढ़ाते ही रहें तो वह शीघ्र ही बहुत कष्टदेय बन जाएगी| शांत और संयमी रहना शायद सबसे महत्वपूर्ण कुशलता है| अगर आप धीरजवान और सातत्यपूर्ण हो तो आप अविश्वसनीय प्रगति कर सकते हो; सब्र ही सब कुछ है| आप इतनी ही गति से क्रियाएँ कीजिए जितनी आप बनाए रख सकें|

६. स्मरणपत्र को नियत करें! अगर आप इन्सान हैं तो आपकी याददाश्त आपको असफल बना सकती हैं [अधिकतर बार]! इसीलिए नई आदत डालने का नाजुक और जरुरी भाग एक स्मरण पत्र है| स्मरणपत्र प्रेरणा पर आधारित नहीं होता; वह आपकी नई आदत को युक्ति पूर्वक पुरानी आदत से बदलता है| जो दिखता हैं उसे ही हम सब ज्यादा याद रखते हैं; अतः सामने दिखाई दिखने वाला स्मरण पत्र ज्यादा असरकारक होता है| उदहारणतः – अगर आपको ज्यादा आभारी होना हैं ‘तो खाना खाने से पहेले अपने आपको आभार मानने के लिए याद कराओ ताकि आप उस चीज पर ध्यान केन्द्रित कर सकोगे जिसके लिए आप आभारी [कृतार्थ] हो| इस तरह जब भी आप नाश्ता करने या खाना खाने बैठोगे तब आप आभार व्यक्त करना नहीं भूलोगे!

७. खुद को ईनाम दें! प्रशंसा करना जरुरी है| हमें वही चीजें करते रहनी चाहिए जो हमें ख़ुशी दें| चूंकि एक कार्य बार बार करते रहने पर ही वह आदत बनता है, तो यह जरुरी हैं की जितनी बार आप अपनी नयी आदत का प्रयोग करें आप अपने आप को हर बार पुरस्कृत करें| अपने आप को थोडा यश दें और हर सफलता का आनंद लें| डॉ.स्नेह देसाई अपने “विनिंग हैबिट्स” सेमिनार में सफल व्यक्तियों की गुप्त आदतों के बारे में [जो लोगों को पता नहीं होती] विस्तार से बताते हैं |

इतना ले जाओ: कौन सी आदतें आपके लिए जरुरी हैं यह निश्चित करो: जो आपके लिए जरुरी हैं उसका निरंतर अनुसरण करो, दूसरों की और ध्यान न देकर उनके कदम पर चलने के बजाय| धीरज से काम लें और सुसंगत तथा दृढ़ रहें|

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