HOW TO FIND YOUR IDEAL SOULMATE ?

Written by Sneh Desai on August 25, 2018

How to find your soulmate




One of the most staple questions that I am asked time and again is – Is there such a thing as soulmates? Or Will I ever find my soulmate? It is a very common dilemma amongst my young audiences. If I may explain this in today’s social median language, all of the people from this generation are literally looking for #RelationshipGoals. Although I wouldn’t be shocked even if married men/women are still searching. Jokes apart, soulmate is a very vague term and can be given meaning according to how you want it. If you can speak to someone non-stop without getting bored then he/she maybe your soulmate, if someone helps you without any expectations/explanations/questions then such a person could be your soulmate, if a person is able to listen to you intently then he could be your soulmate, if someone supports you through thick and thin without complaints then he could be your soulmate too.

Thus, what I am trying to say is that the first step towards finding your ideal soulmate is to define it in your own terms. What qualities should a person have in order to be your true soulmate – maybe someone you can spend a lot of time with without getting bored? You know what I mean? The term “soulmate” is like the concept of say, Santa Claus – if you believe in it then it shall exist for you and if you don’t then it won’t! Simple. There’s not a lot of fuss. It completely depends on what you want to believe. Take some time out and think about the kind of qualities that you admire in people instead of vices that you would like to avoid. This means that whenever you think about this you should always say something like – I want someone who helps me in keeping my cool, instead of saying I don’t want someone who makes me angry all the time!

This brings us to the next point, concentrate only on the positive. Whenever you say a sentence which alarms your brain to avoid a particular thing, then more often than not, the same fear will turn true for you. Because the brain does not distinguish between the kind of information you feed it. It will accept everything at face value. So learn to speak positively even to yourself, especially when you are trying to actively find your true soulmate. The best way to deal with this and make sure you speak positively is by observing people around you and noticing their truly appealing qualities. Learn to look at the positive side of the people you meet every day; slowly and steadily you shall see a drastic change in how you feed information to your brain. And one day you shall see that your soulmate too shall be an amalgamation of all the beautiful qualities that you have admired in others.

The next step after this is to believe. Have the faith and the patience to let your life do the magic trick. Don’t lose hope or become very negative or toxic. Let things take its time. The best things in life take time. And what should you do in the meantime apart from being positive? Learn to love yourself. The fundamental requirement of moving towards #RelationshipGoals is to first learn to love your own qualities and be proud of who you are. If you yourself begin to detest or despise your personality how can you expect someone else to love it or accept it? So try and always be at your best behaviour, look your best and NEVER settle for less than what you deserve. You just have one life and let it be your best. Always demand for perfection because only then can you receive the best from the rest. Also, one of the most important things is that don’t make this process the sole purpose of your life. Live your life by prioritizing yourself and without any hesitations and compromise. Because the moment you feel like you need a soulmate to make your life complete is when you shall never be able to achieve wholesome satisfaction.

In my 4-days camp ‘Ultimate Life’ (Where we spend one whole day on relationship), we invite married and unmarried participants to indirectly understand how they can find a perfect match for them or if they are married how they can find a soulmate in their spouse. As it’s all about how you see them. Once the perception is changed, everything changes.



अपना आदर्श आत्मीय जीवनसाथी (सोलमेट) कैसे खोजें?


बार-बार पूछे जाने वाले सबसे प्रमुख प्रश्नों में से एक है – क्या आत्मीय जीवनसाथी (soulmate) ऐसी कोई चीज है? या क्या मैं कभी अपने आत्मीय जीवन साथी को ढूंढूं पाऊंगा? यह मेरे युवा दर्शकों के बीच एक बहुत ही आम दुविधा है। अगर मैं आज की सामाजिक औसत भाषा में इसे समझा सकता हूं, तो इस पीढ़ी के सभी लोग सचमुच #रिलेशनशिप गोल्स की तलाश में हैं। विवाहित पुरुष / महिलाएं अभी भी इसकी खोज कर रहे हैं, इस बात से मैं चौंकूंगा नहीं। मजाक बाजु में रखकर बात करें तो आत्मीय जीवनसाथी एक बहुत ही अस्पष्ट शब्द है। इसे आप जैसा चाहे वैसा अर्थ दे सकते है। यदि आप बिना ऊबे किसी से नॉन-स्टॉप से बात कर सकते हैं तो वह शायद आपका सोलमेट हो सकता है। अगर कोई आपको उम्मीदों / स्पष्टीकरण / प्रश्नों के बिना मदद करता है तो वह व्यक्ति आपका सोलमेट हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति आपके प्रश्नों को गौर से सुनता है तो वह आपका सोलमेट हो सकता है। अगर कोई बिना शिकायत किये दुख और सुख में आपका साथ देता है तो वह भी आपका सोलमेट हो सकता है।

मैं यह कहने की कोशिश कर रहा हूं कि अपने आत्मिक जीवन साथी को खोजने की दिशा में पहला कदम होता है की आपका आत्मिक जीवनसाथी यानी सोलमेट कैसा हो यह आपने तय करना। एक व्यक्ति को आपका सच्चा साथी होने के लिए क्या गुण होने चाहिए। वह ऐसा व्यक्ति हो सकता है जिसके साथ आप बिना ऊबे बहुत समय बिता सकते हैं? आपको पता हैं की मेरा मतलब क्या है? “सोलमेट” यह शब्द सांता क्लॉस की अवधारणा जैसा है – यदि आप इसमें विश्वास करते हैं तो यह आपके लिए मौजूद होगा और यदि आप नहीं करते तो यह नहीं होगा! इतना सरल है। बहुत कठिन नहीं है। यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप क्या विश्वास करना चाहते हैं। कुछ समय निकालें और उन गुणों के बारे में सोचें जिस कारण आप लोगों की तारीफ करते हैं। उन बुराईयों के बारे में भी सोचे जिन्हे आप टालना चाहते हैं। इसका मतलब यह है कि जब भी आप इसके बारे में सोचते हैं तो आपको हमेशा कहना चाहिए – मुझे कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जो मुझे धैर्य रखने में मेरी मदद करता है। मैं किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं चाहता जो हर समय मुझे गुस्सा दिलाता है!

यह हमें अगले बिंदु पर लाता है- केवल सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित कीजिये। जब भी आप कोई ऐसा एक वाक्य कहें और आपका दिमाग उस चीज़ से बचने के लिए अलार्म दें, तो अक्सर, वही डर आपके लिए सच हो जाएगा। क्योंकि जो जानकारी आप आपके मस्तिष्क को देते हैं उसके बीच वह अंतर नहीं करता है। वह सब कुछ जैसा दिखता है वैसा ही स्वीकार करेगा। तो अपने आप से सकारात्मक रूप से बोलना सीखें, खासकर जब आप सक्रिय रूप से अपने सच्चे साथी को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका है यह सुनिश्चित करना कि आप अपने आस-पास के लोगों को और उनके आकर्षक गुणों को देखते हुए सकारात्मक बोलना। आप जिन लोगों से मिलते हैं, उनके सकारात्मक पक्ष को देखना सीखें। धीरे-धीरे आप अपने दिमाग को जानकारी कैसे देते हैं इसमें एक बड़ा परिवर्तन देखेंगे। और एक दिन आप देखेंगे कि आपका जीवन साथी भी उन सभी खूबसूरत गुणों का एकीकरण होगा जिसकी आपने दूसरों में प्रशंसा की है।

इसके बाद अगला कदम विश्वास करना है। अपने जीवन में जादू की चाल चलने के लिए विश्वास और धैर्य रखें। आशा न खोये या बहुत नकारात्मक या कटु न रहे। चीजों को अपना समय लेने दीजिये। जीवन में सबसे अच्छी चीजें पाने के लिए समय लगता हैं। इस बिच सकारात्मक होने के अलावा आपको क्या करना चाहिए? खुद से प्यार करना सीखिए। # रिलेशनशिपगोल्स की ओर बढ़ने की मौलिक आवश्यकता है, सबसे पहले अपने गुणों से प्यार करना सीखें और आप खुद पर गर्व करें। यदि आप अपने व्यक्तित्व को घृणित या तुच्छ समझते हैं तो आप किसी और से इसे प्यार करने या इसे स्वीकार करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? तो कोशिश करें की आप हमेशा अपना सबसे अच्छा व्यवहार करें। सुन्दर दिखें। आप जिस योग्य हैं उससे कम पाने के लिए कभी भी तैयार न रहें। आपके पास सिर्फ एक जीवन है और इसे सर्वश्रेष्ठ बनने दें। हमेशा उत्कृष्टता की मांग करें क्योंकि केवल तभी आपको दूसरों से अच्छा मिल सकता हैं। इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक यह है कि इस प्रक्रिया को अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य न बनाएं। अपने आप को प्राथमिकता देकर और बिना किसी हिचकिचाहट तथा समझौता किए अपना जीवन जिये। जिस पल आप यह महसूस करते हैं की आपको अपने जीवन को पूर्ण करने के लिए एक सोलमेट की आवश्यकता है तब आप कभी भी पूर्ण संतुष्टि प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

मेरे 4-दिनों के शिविर ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ) (जहां हम रिलेशनशिप पर एक पूरा दिन बिताते हैं) में, हम विवाहित और अविवाहित प्रतिभागियों को अप्रत्यक्ष रूप से यह समझने के लिए आमंत्रित करते हैं कि वे उनके लिए एक आदर्श जोड़ीदार कैसे प्राप्त कर सकते हैं। और यदि वे विवाहित हैं तो वे एक-दूसरे में अपना सोलमेट कैसे ढूंढ सकते हैं। धारणा बदल जाने पर, सब कुछ बदल जाता है।

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