THIS DIWALI, DO YOUR MENTAL HOUSE CLEANING

Written by Sneh Desai on November 3, 2018

Mental Cleaning on this Diwali




Diwali is a festival of lights no doubt, but before the grand celebration begins all of us are unanimously engaged in the process of “Diwali cleaning”. But this time, let Diwali cleaning not be confined to only the nooks & corners of our external worlds.

This Diwali let’s engage in mental house cleaning! Confused? Our brain is filled with unnecessary burden, pressure & negativity. We don’t realize it until something very catastrophic manifests in our lives which pushes us into despair. Such loss of hope suddenly brings out all the toxic words & circumstances we have fed our brain & leaves us confused. To avoid such sudden change of situations, it is essential to clean your mind of these things. And what better occasion than the grand festival of Diwali?

1. De-clutter: The first step towards cleaning anything is to declutter all the unused goods. Similarly, as far as your mind is concerned, you must accumulate your most frequent negative thoughts & declutter your mind off of them. Manage your thoughts by organizing your days & forming a routine. This will help your mind to be surer of what to expect every day. In turn, this will reinstate a sense of confidence & control.

2. Reinforcements: Positive affirmations or reinforcements help train your mind to be happier. Focussing on the good all the time is what assists your mind in the whole cleansing process. The point is to not be tired. We have always been experts at stuffing our brains with innumerable thoughts – AND we still have to DO THE SAME. The significant difference is that instead of the negative jargon, you train your mind to focus on the good things. Listen to positive affirmations on health, wealth or love from my free mobile application ‘Sneh Desai’.

3. Don’t obsess: Obsession is for the weak & wasted! Honestly, obsessing about the little things is killing your brain cells. It is keeping your mind preoccupied in unnecessary chat & training it to expect the worst. Because with obsession comes fear. And with practice, this fear cuts deep.

4. Fast-forward: A toxic habit that is subconsciously withholding us from our perfect lives is living in the past! How many hours in a day are you spending on reliving your past circumstances (irrespective of whether they are positive or negative)? Always remember, that the time you spend on focussing on your past, is the time you could have spent in shaping your bright future! Now it is your decision – do you want a better future or are you happy to go back & forth between your past & present and remain stagnant? In my ‘Change Your Life’ workshop, when we go through a process where we breakthrough from our past, people actually start living a new life.

5. Less reaction, more action: Reacting too much is exceptionally lethal. Sometimes our reactions are not under our control, and that is okay. But more often than not, how we respond to situations, people, words etc. is very much in our own hands. When we react before thinking, our actions render minimum. We are only ranting or complaining, but we need to act instead. Focus on your goals instead of complaining about the obstacles. Trust me; you will be better off!

6. Mindful Surroundings: How will your mind be at peace if your outer world is not? Sometimes, mindful surroundings help in keeping your thoughts in control. Outside influences like social media, people in your immediate vicinity etc. have a significant impact on how you look at things thus influencing your opinions & perspective. You become an average of people who you are surrounded by. So this year, make a new network of people who are more successful emotionally and financially.

7. Scrub, scrub, scrub: Every once in a while, scrub your mind by reviewing the cleansing process & keep a check on how you are doing & where you are lacking such that you may improve. To keep things neat & clean, it is important to cleanse on a daily basis and make it a habit!

चलिए, इस दिवाली हम अपने “मानसिक घर” की सफाई करते हैं!

दिवाली रोशनी का त्योहार है। इस भव्य उत्सव से पहले हम सभी “दीपावली की सफाई” करने में बिझी हो जाते हैं। लेकिन इस बार, दिपावली की सफाई को हमारे बाहरी संसार के कोनों तक सीमित न होने दें।

चलिए, इस दिवाली हम “मानसिक घर” की सफाई में जुट जाते है! क्या आप सोच में पड़ गए हैं? मतलब यह की, हमारा दिमाग अनावश्यक बोझ, दबाव और नकारात्मकता से भरा है। हम इसे तब तक नहीं समझते जब तक कि हमारे जीवन में कुछ विनाशकारी घटना नहीं होती है जो हमें निराशा में डाल देती है। इस तरह से आशा खो देने से अचानक वे सभी जहरीले शब्द और परिस्थितियां सामने आती है जो हमने अपने मस्तिष्क में बिठाये है। वे हमें भ्रमित कर देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अचानक आये परिवर्तन से बचने के लिए, इन चीजों को अपने दिमाग से साफ करना आवश्यक है। और इसके लिए दिवाली के भव्य त्यौहार से बेहतर अवसर कौनसा है?

1. अव्यवस्था दूर करना: कुछ भी साफ करने की दिशा में पहला कदम होता है उपयोग में न आनेवाले सभी वस्तुओं को अस्वीकार करना। इसी तरह, जहां तक आपके मन का सवाल है, आपको अपने मन में लगातार आनेवाले नकारात्मक विचारों को जमा करना होगा और उन्हें अपने दिमाग से निकाल देना होगा। अपने दिन को व्यवस्थित करके और दिनचर्या बनाकर अपने विचारों को नियंत्रित करें। इससे आपके दिमाग में हर दिन क्या उम्मीद की जा सकती है, यह तय करने में मदद मिलेगी। बदले में, इससे आत्मविश्वास और नियंत्रण की भावना दृढ़ होगी।

2. मजबूतीकरण: सकारात्मकता या मजबूतीकरण आपके दिमाग को खुश रहने में मदद करते हैं। हर समय अच्छी बातों पर ध्यान देने से इस पूरी सफाई प्रक्रिया में आपके दिमाग को सहायता मिलती है। इसमें थकना नहीं है। हम हमेशा हमारे दिमाग में असंख्य विचार भरते रहे हैं – और हमें अभी भी वही करना है। महत्वपूर्ण अंतर यह है कि नकारात्मकता के बजाय, आप अच्छी चीजों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने दिमाग को प्रशिक्षित करते हैं। मेरे मुफ्त मोबाइल एप्लिकेशन ‘स्नेह देसाई’ पर आप स्वास्थ्य, धन या प्यार पर सकारात्मक पुष्टि सुन सकते हैं।

3. जुनून मत कीजिये (ग्रस्त हो जाना): जुनून, कमजोर और बर्बाद हुए लोगों के लिए होता है! सच कहे तो, छोटी चीजों का जुनून आपके मस्तिष्क की कोशिकाओं को ख़त्म कर रहा है। यह आपके दिमाग को अनावश्यक बातों में व्यस्त रखता है और दिमाग को बुरी उम्मीदों के लिए प्रशिक्षण देता है। क्योंकि जुनून के साथ डर आता है। और समय के साथ, यह डर गहराई से समा जाता है।

4. फास्ट-फॉरवर्ड: एक बुरी आदत जो अवचेतन रूप से हमें अपना संपूर्ण जीवन जीने से रोक रही है, वह है भूतकाल में रहना! आप अपनी पिछली परिस्थितियों के बारे में सोचने पर कितने घंटे खर्च कर रहे हैं (भले ही वे सकारात्मक या नकारात्मक हों)? हमेशा याद रखें, कि जब आप अपने अतीत पर ध्यान केंद्रित करने पर जो समय खर्च करते हैं, वह समय आप अपने उज्ज्वल भविष्य को आकार देने में खर्च कर सकते थे! अब यह आपका निर्णय है – क्या आप एक बेहतर भविष्य चाहते हैं या आप अपने अतीत और वर्तमान के बीच अटके रहने और स्थिर रहने में ही खुश हैं? मेरे ‘चेंज योर लाइफ’ कार्यशाला में, जब हम ऐसी प्रक्रिया से गुजरते हैं जहां हम अपने अतीत से नाता तोड़ देते हैं, तो लोग वास्तव में एक नया जीवन जीना शुरू करते हैं।

5. कम प्रतिक्रिया दीजिये, ज्यादा काम कीजिये: बहुत अधिक प्रतिक्रिया देना बहुत खतरनाक होता है। कभी-कभी हमारी प्रतिक्रियाएं हमारे नियंत्रण में नहीं होती है और यह ठीक है। लेकिन ज्यादातर, हम परिस्थितियों, लोगों, शब्दों आदि का जवाब कैसे देते हैं, यह हमारे हाथों में होता है। जब हम सोचने से पहले प्रतिक्रिया देते हैं, तो हमारा काम बहुत कम होता है। हम केवल डींगे हाकते हैं या शिकायत करते हैं, लेकिन हमें इसके बजाय कार्य करने की जरूरत है। बाधाओं के बारे में शिकायत करने के बजाय अपने लक्ष्यों पर बस ध्यान केंद्रित कीजिये। विश्वास कीजिये; आप और कार्यशील हो जायेंगे!

6. चौकस परिवेश: यदि आपकी बाहरी दुनिया शांत नहीं है तो आपका दिमाग कैसे शांत रहेगा? कभी-कभी, सजग वातावरण आपके विचारों को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। बाहरी प्रभाव जैसे सामाजिक मीडिया, आपके पास पड़ोस के लोग इत्यादि आपकी राय और दृष्टी को बहुत प्रभावित करते है। आप उन लोगों जैसे औसत बन जाते हैं जिनसे आप घिरे हुए हैं। तो इस साल, उन लोगों का एक नया नेटवर्क बनाएं जो भावनात्मक और वित्तीय रूप से अधिक सफल हैं।

7. रगड़ रगड़ कर सफ़ाई कीजिये: थोड़े-थोड़े समय के बाद सफाई प्रक्रिया की समीक्षा कीजिये। आप यह काम कैसे कर रहे और उसे कैसे सुधार सकते हैं इस बारे में सोचिये। चीजों को साफ-सुथरा रखने के लिए, उसे हर दिन साफ करना और इसे आदत बनाना महत्वपूर्ण है!

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