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Anger-management of the self is one thing, but having to deal with someone who is perpetually angered by the tiniest of things is a battle – more so if that said someone is a family member. When someone close to you is angered or frustrated in a jiffy, you really need to be able to deal with it as amicably as possible. Here are some basic ideas and ways of how you can do the same:-

1. Do NOT try to change them

– No matter how righteous or wrong the anger of the other person is, do NOT try to change them or charge at them. Because guess what? Things will take a turn for the worse. You cannot constantly change someone; it is wiser to be able to adapt according to their mood-swings instead. Imagine if someone charged at you for being who you are and for expressing what you wanted to express? Wouldn’t that be really caging? So if someone is by nature an angry person, you trying to stop them would make them angrier. So don’t.

2. Listen instead

– If the other person is yelling or shouting at you (with or without reason) do not feel the need to shout back or pass a sarcastic comeback. Instead, just listen. Sometimes we assume that listening to an angry person is futile because they are unbecoming of themselves. However, more often than not, such anger is laden with honesty – so listen. Maybe you will find out something which you didn’t know about your own nature. Maybe you will find out about a silly fault of your own doing. Listening gives you the power of responding to a negative reaction with ease instead of impulse, while educating yourself about some of your own faults.

3. Do not engage

– A family member who is an angry person by nature will be perturbed by EVERYTHING. But you don’t need to engage with them or counter them about EVERYTHING! It is so easy – just pick your battles. Sometimes, you might need to show your loved one of how ill-justified their anger can become – but do this selectively. For example – if your parent keeps nagging about your little lazy habits, take a note of those habits and try not to repeat them instead of verbally explaining yourself in order to counter such an argument EVEN IF YOU ARE RIGHT (in your head). Engage when matters are of more importance. For example, if someone at home is angry about your choice of career (which presumably you have chosen after assessing your passion), then engage yourself but be extremely mild about your dealings.

4. Talk it out

– Sometimes our parents and siblings are just angry because a completely unrelated matter is disturbing them. We have seen this so often with Indian fathers. They tend to take out the anger related to work at home just so that they can vent out the negative energy. So instead of feeling bad about it why don’t you just ask them? Talk to them about the other spheres of their lives. It is therapeutic and really helps both of you to feel better.

5. Be compassionate

– Talking through a situation is incomplete until and unless you actually understand the perspective of the other person. Be compassionate if your family member is going through a tough time! And just to respect their emotions, swallow your pride and bear the anger! However, sometimes if they cross a line do not be impulsive in your replies – be compassionate. Say things like – “Please calm down.”, “Let’s discuss.”, “You are hurting me please let’s talk a little later.”, “I understand why you are angry, but please listen to what I want to say too.”

6. Shower some love

– Many a times when matters reach a stage where even talking seems like a dangerous territory just shower some love on your loved one! Do what they want without questioning, make them laugh, give them a tight hug, go to the movies together, show them that you are grateful to have them around and in no time will all the anger melt away!

These are some of the important ideas to follow. In my signature 2-days event ‘Change Your Life’, I work in depth of this matter where participants realize the true reasons behind any behaviour of any person; especially their family members.

The above mentioned points are the do’s of dealing with an angered family member. However, no matter what, do not break ties or do anything overtly silly or extreme just to prove a point. Anger is a very common emotion and it can dissipate just as quickly if you want it to!

परिवार के क्रोधित सदस्यका सामना करने की ६ युक्तियाँ (के ६ तरीके)

खुद के क्रोध को काबू में रखना एक बात है, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति का सामना करना जो छोटे से छोटी बात पर हर वक्त क्रोधित होता है, एक जंग है – और जब वह व्यक्ति अपने ही परिवार का कोई सदस्य हो तब एक बहुत बड़ी जंग है| जब कोई अपना, पलक झपकने की देर में गुस्सा होता हो, तो उसके साथ हो सके उतना नरमी व मैत्रीभाव से पेश आना चाहिए| यहाँ दी गई मूलभूत युक्तियाँ और तरीके हैं जिनकी मदद से आप यह आसानी से कर सकेंगे:-

१. उन्हें बदलने की कोशिश ना करें

– सामने की व्यक्ति का क्रोध चाहे जितना भी सही या गलत क्यों ना हो, उन्हें बदलने या उन पर हावी होने की कोशिश कभी भी ना करें| क्योंकि जानते हो क्या होगा? बात और भी बिगड़ जाएगी| आप हर वक्त किसी को बदल नहीं सकते; उनकी मनस्थिति की तरह से खुद को ढाल लेना बेहतर होशियारी होगी| सोचिये की कोई आपको आप जो हो वह बनने से रोक रहा हो या आप जो कहना चाहते हो उसे कहने से रोक रहा हो तो? क्या यह सही माइनों में बंदी बनाना नहीं है? अतः यदि कोई स्वभाव से ही गुस्सेवाला हो, तो उन्हें रोकने से उनका गुस्सा और भी बढ़ जाएगा| अतः ऐसा ना करें|

२. उसके बदले सुनें

– यदि कोई आप पर (किसी वजह से या बिना वजह ही) चिल्ला रहा हो तो उस पर चिल्लाने या कोई अशिष्ट वाक्य बोलने की इच्छा मत करना| इसके बदले, सिर्फ सुनें| कभी कभी हम सोचते हैं की क्रोधित व्यकित की बात सुनना व्यर्थ है क्योंकि वे अपने आपे में नहीं हैं| फिर भी, अधिकतर बार, ऐसा क्रोध सच्चाई से लदा-भरा होता है – अतः सुनें| संभव है की आपको अपने ही स्वभाव के बारे में कुछ ऐसा मालूम हो जो आप जानते ही नहीं थे| शायद आपको अपनी कोई मूर्ख सी गलती पता चले| सुनने से आपको एक नकारात्मक प्रतिक्रिया को आसानी से उत्तर देने की क्षमता प्राप्त होती है नाकि आवेग में आकर, और साथ में आप खुदको अपनी ही किसी गलती के बारे में जानकारी दे सकेंगे|

३. तर्क-वितर्क ना करें

– परिवार का वह सदस्य जो स्वभाव से ही गुस्से वाला है वह हर बात पर क्रोधित होगा| लेकिन आपको उससे हर बात पर बहस करने की या उसे गलत साबित करने की ज़रुरत नहीं है! यह बहुत ही आसान है – अपने झगड़े चुनिए| कभीकभार आपको अपने प्रियजन को यह दिखाने की ज़रुरत होगी कि उनका क्रोध कितना नाजायज है – लेकिन यह भी चुनिन्दा बार ही कीजिये| उदाहरणतः – यदि आपके माँ-बाप आपको अपनी छोटी-छोटी आलसी आदतों के लिए हर वक्त डाँटते हैं, तो ऐसी बहस का सामना करने के लिए, मौखिक रूप से खुद को समझाने के बजाय, उन आदतों की नोंध रखें और उन्हें ना दोहराने की कोशिश करें – आप सही हो फिर भी| तभी बहस करें जब बात ज्यादा महत्वपूर्ण हो| उदाहरणतः, अगर घर का कोई सदस्य आपके पेशे के चुनाव को लेकर गुस्सा हो (जो आपने अपनी रूचि के अनुसार चुना है), तो ज़रूर बहस करें, लेकिन इस परिस्थिति का सामना बिलकुल शांत मन व वाणि से करें|

४. कह डालो

– कई बार हमारे माता पिता या हमारे भाई-बहन गुस्सा होते हैं क्योंकि कोई बिलकुल असंबंधित बात उन्हें परेशान कर रही होती है| हमने यह बात कई बार भारतीय पिताओं के साथ होती देखी है| काम से सम्बन्धित गुस्सा घर में निकालने की उनकी आदत होती है ताकि उनकी नकारात्मक उर्जा वे बहार निकाल सकें| अतः उनकी बातों का बुरा मानने की बजाय आप उनसे पूछ क्यों नहीं लेते? उनकी जिन्दगी के दुसरे कार्यों के बारे में उनसे बात कीजिये| यह शांतिदायक होने के साथ-साथ, आप दोनों को अच्छा महेसुस करने में मदद करेगा|

५. सहानुभूतिशील बनिए

– किसी भी परिस्थिति पर चर्चा करना तब तक अधुरा है जब तक आप सामनेवाले व्यक्ति का दृष्टिकोण नहीं समझते| अगर आपके परिवार का कोई सदस्य कठिन समय से गुजर रहा है तो उसके प्रति सहानुभूतिशील बनिए! और उनके भावावेश को मान देने के लिए अपना गुरुर भूल जाइए और उनका गुस्सा सह लीजिए! फिर भी कभी वह कुछ मर्यादा से बहार हो जाए तो प्रत्युत्तर में आवेगी मत बनिए – बल्कि सहानुभूतिशील बनिए| इस तरह का कुछ कहिये – “शांत हो जाओ” , “चलो हम बात/चर्चा करते हैं” , “आप मुझे दुःख पहुंचा रहे हैं, हम कुछ देर बाद बात करते हैं|” , “मैं जनता / जानती हूँ की आप गुस्सा है, पर आप मुझे जो कहना है वह भी सुन लीजिये|”

६. कुछ प्यार बरसाइए

– कई बार ऐसा होता है की विषयवस्तु ऐसे मुकाम पर पहुँचती है की अब बात करना भी डरावनी सीमा में प्रवेश कर चुका होता है; ऐसे में अपने प्रियजनों पर प्यार बरसाइए! उन्हें जो चाहिए वह, कोई सवाल किये बिना, कीजिए; उन्हें हंसाइये; उन्हें कस कर आलिंगन दीजिए; साथ में सिनेमा देखने जाइए; उन्हें एहसास कराएँ की उनका होना तुम्हारे लिए कितना महत्त्वपूर्ण है और देखते ही देखते, कुछ ही समय में, सारा गुस्सा पिघल जाएगा!

यह कुछ महत्वपूर्ण युक्तियाँ है जिनका अनुसरण करना चाहिए| मेरे दो दिनके चिन्हक कार्यक्रम ‘चेंज योर लाइफ’, में मैं विस्तारपूरक इस विषय पर कार्य करता हूँ जहाँ कार्यक्रम में सहभागी लोगों को किसी भी व्यक्ति के विशिष्ट बर्ताव के सच्चे कारण पता चलता है; खास करके उनके परिवार के सदस्यों का|

उपरोक्त मुद्दे कुटुंब के किसी गुस्सा हुए व्यक्ति को समझाने के लिए हैं| फिर भी, चाहे कुछ भी हो जाए, अपनी बात साबित करने के लिए रिश्ता मत तोड़ दीजिये, या कोई और पागलपन न करें, या कोई हद न तोड़ें| गुस्सा एक सर्व सामान्य आवेग है और यदि आप चाहें तो बहुत ही जल्दी दूर हो सकता है!

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