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Being well-informed about the happenings in your country and around the globe is essential in making sure that people perceive you as a “woke person”, i.e., one who is well-versed with the important, plaguing issues, as well as for general know-how. The sources for the same however, can sometimes be extremely misleading on a very personal level. Yes, today I am talking about the effects of news media, i.e., how truly helpful news channels or newspapers really are! I talk about how negative thoughts are formed in my signature event ‘Change Your Life’ where I share how newspapers/ channels are one of the negative sources for the same. Hopefully it shall be an eye-opening read for you, so let’s directly delve into this:-


The news media are, for the most part, the bringers of bad news….and it’s not entirely the media’s fault, bad news gets higher ratings and sells more papers than good news. – Peter McWilliams

Simplistically put, the media thrives on negativity. The one huge reason for the growing popularity of news media platforms is the fact that it thrives on negativity and keeps filling your brain with toxicity from around the globe. What happens when one person focuses on pessimism? His life will reflect it. Now imagine what will happen if lakhs and lakhs of people not only consume but are made to believe what a terrible state of affairs we are living in? Unfortunately our mind is accustomed to grasp negativity quicker than positivity because of either years of feeling inadequate or because of years of the lack of knowledge about what one positive thought can do to your life. News channels and newspapers are well aware of the same and take a BIG advantage of this weakness to garner higher TRPs for themselves!


America is a country of inventors and the greatest of inventors are the newspaper men. – Alexander Graham Bell

Well, India is no different. It really is a universal truth as far as the media industry is concerned. It is all about twisting facts to your advantage. If you find this as something difficult to believe in, talk to any actor in our country and they will tell you how media manipulates a story and presents the facts in their own subjective manner in order to make sure that the said story seems more “appealing” to its target audience. Sometimes it is almost as if you are using your power to brainwash people! And guess what? They are being successful. There are very few media outlets today that truly focus on the real news instead of being the origin of baseless gossip.


A newspaper is a device for making the ignorant more ignorant and the crazy crazier – H.L. Mencken

Yes, because news channels are so happily and graphically misguiding. In an era where all of us are exposed to more information available for consumption to each of us than ever before, we are unable to differentiate between good information and bad information. Whereas commercially inclined media houses tend to feed our fears and manipulate us to spend our money in the product that they are advertising! Thus, the reliance and trustworthiness upon the information from these sources is a matter of huge concern. Stories are manipulated according to the people sponsoring or backing the financial bandwagon of the newspapers or media channels. So be very careful what you choose to believe in, because there is a very calculated reason for why a piece of news is presented the way it is presented. Read ‘The Power of Subconscious Mind’ by Dr. Joseph Murphy to understand its effect more.


A newspaper is a circulating library with a high blood pressure. – Arthur Baer

There is no doubt in it especially with high levels of insensitivity and defamation. Most channels use their respective platform to pass on vulgar pictures of celebrities or public figures as “news” especially in the name of “pop-culture”. In newspapers we generally see how an article is written about a very sincere struggle or problem of a particular celebrity and along with it (in order to garner more readers, and in order to “retain” the existing ones), they attach a very graphically insensitive picture. We all know about the tiff that Deepika Padukone has had in the past with Times of India. Similarly, news-channels tend to defame people very selfishly and slyly, by posing an opinion and showcasing it as if were the opinion of the general public thus leading to misconduct.


Early in life I had noticed that no event is ever correctly reported in a newspaper. – George Orwell

Why? Because today Indian news channels and papers have their very own political inclinations that they are very cunningly trying to feed their audiences as truth. Switch on your TV at 9 p.m. and there will be debates on any particular topic, and if you view it till the end, you shall realize how you learnt nothing in that hour, just as the people debating on TV because they would not let each other speak at all! Is this news or just noise? Think about it.

क्या समाचार चैनल या समाचार पत्र खतरनाक होते हैं?


अपने देश और दुनिया भर में होने वाली घटनाओं के बारे में अच्छी तरह से जानकारी होना, यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि लोग आपको “सजग व्यक्ति” समझें, यानी, ऐसा व्यक्ति जो महत्वपूर्ण, परेशान करनेवाले मुद्दों के साथ-साथ सामान्य जानकारी से भी अच्छी तरह परिचित है। हालांकि, इसके लिए स्रोत कभी-कभी बहुत ही व्यक्तिगत स्तर पर बेहद भ्रामक हो सकते हैं। हां, आज मैं समाचार मीडिया के प्रभावों के बारे में बात कर रहा हूं, यानी, समाचार चैनल या समाचार पत्र वास्तव में कितने उपयोगी हैं! मैं मेरे हस्ताक्षर कार्यक्रम ‘Change Your Life’ (चेंज योर लाइफ) में नकारात्मक विचार कैसे बनते हैं, इस बारे में बात करता हूं जहां मैं साझा करता हूं कि समाचार पत्र / चैनल नकारात्मक स्रोतों में से एक हैं। उम्मीद है कि यह आपके लिए एक आंख खोलने वाला पाठ होगा, इसलिए चलिए सीधे इसमें शामिल हो जाएं: –


समाचार मीडिया, ज्यादातर, बुरी खबरों को आगे लेकर आने वाले होते हैं …. और यह पूरी तरह से मीडिया की गलती नहीं है, बुरी खबरें उच्च रेटिंग प्राप्त करती हैं और अच्छी खबरों से ज्यादा बेची जाती हैं। – पीटर मैकविलियम्स

सीधी बात यह है कि, मीडिया नकारात्मकता पर फलती-फूलती है। समाचार मीडिया प्लेटफार्मों की बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह तथ्य है कि यह नकारात्मकता पर उभरता है और दुनिया भर की ख़बरों से आपके मस्तिष्क को जहर से भरता रहता है। क्या होता है जब एक व्यक्ति निराशावाद पर केंद्रित होता है? उसका जीवन इसे प्रतिबिंबित करेगा। अब कल्पना करें कि अगर लाखों-लाख लोग न केवल यह सुनेंगे बल्कि यह मानने लगेंगे कि हम किस भयानक स्थिति में रह रहे हैं तब क्या होगा? दुर्भाग्यवश, हमारा दिमाग सकारात्मकता से कहीं अधिक नकारात्मकता को समझने का आदी है, क्योंकि इस बारे में वर्षों से ज्ञान की कमी के कारण या अपर्याप्तता महसूस करने के कारण सकारात्मक विचार आपके जीवन में क्या अच्छाईयां ला सकती है यह हम सोच भी नहीं सकते। समाचार चैनल और समाचार पत्र यह बात अच्छी तरह से जानते हैं और अपने लिए बड़ी टीआरपी हासिल करने के लिए इस कमजोरी का बड़ा फायदा उठाते हैं!


अमेरिका आविष्कारकों का देश है और सबसे बड़े आविष्कारक समाचार पत्र चलानेवाले होते हैं। – अलेक्जेंडर ग्राहम बेल

खैर, भारत अलग नहीं है। जहां तक मीडिया उद्योग का संबंध है, यह वास्तव में एक सार्वभौमिक सत्य है। यह आपके लाभ के लिए तथ्यों को घुमाने के बारे में है। यदि आपको यह विश्वास करने में कुछ मुश्किल लगता है, तो हमारे देश में किसी भी अभिनेता से बात करें और वे आपको बताएंगे कि कैसे मीडिया एक कहानी को तोडती-मरोड़ती है और तथ्यों को अपने खुद के व्यक्तिनिष्ठ तरीके से प्रस्तुत करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहानी अपने लक्षित दर्शकों के लिए अधिक आकर्षक लगे। कभी-कभी यह होता है जैसे आप लोगों का ब्रेनवाश करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग कर रहे हैं! और अंदाज लगाइये की क्या होता है? वे सफल हो रहे हैं। आज बहुत कम मीडिया केंद्र हैं जो बेकार की गपशप के बजाय वास्तविक समाचार पर ध्यान देती हैं।


एक समाचार पत्र अज्ञानी को और अज्ञानी, और पागल को ज्यादा पागल बनाने के लिए एक उपकरण है। – एच.एल. मेनकेन

हां, क्योंकि समाचार चैनल इतने खुशी से और सजीव ढ़ंग से गुमराह कर रहे हैं। ऐसे युग में जहां हमें पहले से कहीं अधिक जानकारी मिल रही है और हम उसके उपभोग के लिए उपलब्ध हैं, हम अच्छी जानकारी और बुरी जानकारी के बीच अंतर करने में असमर्थ हैं। जबकि व्यावसायिक रूप से प्रवृत्त मीडिया घर हमारे डर को बढ़ाते हैं और जिस उत्पाद का वे विज्ञापन कर रहे हैं उसपर हमारा पैसा खर्च करने के लिए हमें चालाकी से प्रेरित करते हैं! इस लिए, इन स्रोतों से जानकारी लेने पर निर्भर रहना और भरोसा रखना बड़े चिंता का विषय है। समाचार पत्रों या मीडिया चैनलों के व्यावसायिक लाभ को प्रायोजित करनेवाले या समर्थन देने वाले लोगों के अनुसार कहानियां गढ़ी जाती हैं। इसलिए सावधान रहें कि आप किस पर विश्वास करना चुनते हैं, क्योंकि समाचार का एक टुकड़ा किस तरह प्रस्तुत किया जाता है उसका एक सुनियोजित कारण होता है। इसके प्रभाव को और अच्छी तरह समझने के लिए डॉ. जोसेफ मर्फी द्वारा लिखित ‘The Power of Subconscious Mind’ (दी पावर ऑफ़ सबकॉनशियस माइंड) पढ़ें।


समाचार पत्र उच्च रक्तचाप देनेवाला एक घूमता पुस्तकालय है। – आर्थर बायर

विशेष रूप से असंवेदनशीलता और मानहानि का उच्च स्तर देखते हुए इस बात पर कोई संदेह नहीं होता है। अधिकतर चैनल मशहूर हस्तियों या लोकप्रिय व्यक्तियों के अश्लील चित्रों को “समाचार” के रूप में, विशेष रूप से “पॉप-संस्कृति” के नाम पर फ़ैलाने के लिए अपने संबंधित मंच का उपयोग करते हैं। समाचार पत्रों में हम आम तौर पर देखते हैं कि एक विशेष सेलिब्रिटी के बहुत ही गंभीर संघर्ष या समस्या के बारे में एक लेख लिखा गया है और इसके साथ-साथ (अधिक पाठकों को आकर्षित करने के लिए और मौजूदा लोगों को “बनाए रखने” के लिए), वे कुछ असंवेदनशील चित्र जोड़ देते हैं। दीपिका पादुकोण का टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ अतीत में हुए कहा-सुनी के बारे में हम सभी को पता है। इस तरह, समाचार-चैनल एक राय बनाकर ऐसे दिखाते है जैसे यह आम जनता की राय है और लोगों को बहुत स्वार्थी तरीके से और स्वेच्छा से बदनाम करते हैं, इस प्रकार दुर्व्यवहार की ओर ले जाते है।


जिंदगी के शुरुआत में ही मैंने देखा था कि समाचार पत्र में किसी भी घटना की सही रिपोर्ट नहीं की जाती है। – जॉर्ज ऑरवेल

क्यूं? चूंकि आज भारतीय समाचार चैनलों और पत्रों के अपने स्वयं के राजनीतिक झुकाव हैं और वे इसे अपने दर्शकों को सच्चाई के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। रात नौ बजे अपना टीवी शुरू करें और आप देखेंगे की किसी विशेष विषय पर बहस हो रही है और यदि आप इसे अंत तक देखते हैं, तो आपको पता चलेगा कि आपने इतने समय में कुछ भी नहीं सीखा। क्योंकि टीवी पर बहस करते लोग एक दूसरे को बिल्कुल बोलने नहीं देते! क्या यह समाचार है या सिर्फ शोर? इसके बारे में सोचो।

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