Are You Doing These 8 Things While Dealing With Your Team?

A team is defined by its members and hence it is essential that a team leader deals with the members smartly in order to make sure that they are effective and efficient together. Although sometimes dealing with too many different combinations becomes difficult and seems like a LOT more work than the actual work that the team is supposed to be focused on. Which is why an effective leader should keep the following in mind while dealing with the team members:-


A team leader needs to have an effective line of communication, i.e., a two-way conversation with his team members. There should be transparency about the goals of the team and the means to achieve those goals, so that all the team members are automatically united by one common thread. This is the very basis or the very foundation on which a team is supposed to work which should more or less define the ethics of its members.


Certain ground rules should be established at the very onset of team-building so that its members are sure of what they are expected to bring to the table from their end. For example, being on time, no cell phones during meetings, working in partnerships etc. All of these tend to show the level of seriousness attached to the work thereby stating its importance to every member.


After establishing certain strict ground rules, you should not be made to feel like you are above them, i.e., it should apply to the leader as much as it applies to the other members. This strategy of leading by example is what brings forth a feeling of equanimity within the team. This way the members know the kind of leader they are working with and how sincere they should be if their leader is so diligent.


One of the most important attributes to have in order to successfully run a team is to take interest in EVERYONE. Such openness of communication can happen only when there are no obvious hierarchical boundaries or walls in between the team members. When this happens, everyone feels like they are important and valuable and hence, they shall open up and be honest about their work and efforts.


It is OKAY to get emotional along with a team member so that they feel like they are respected and can feel quite “at home”. To do this it is essential for you to be unabashedly open about your passion and your goals attached with the work your team is doing. Always make sure that you portray the “showing of emotions” as a hallmark of strength and not as a weakness. This helps in resolving issues within team members as well.


Take care of your team members. Make sure they are well-fed, well equipped and given the best of facilities from your end. Because if you don’t do that, you shall only get excuses! In order to avoid unnecessary disputes take genuine care. It also ensures that your team is emotionally and mentally invested in the project.


Be vulnerable once in a while by making mistakes. To err is human and when the leader himself is open to accepting and then learning from his mistakes, the team members don’t feel too threatened or afraid of making certain mistakes themselves and actively learn from them. You don’t want the work environment to be toxic to a point that the members are unable to give their 100%! When you make a mistake, you humanize it and make your members feel that they can work at ease without taking unnecessary burden or pressure.


Last, but not the least, an effective leader is one who asks for feedback. So make sure you engage in a one-on-one conversation with each of your members and ask them about what they think of the work that the team is undertaking and where they are falling behind or having any difficulty. This way they feel like they are actively contributing to a larger picture.

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अपनी टीम के साथ काम करते वक्त क्या आप यह ८ चीज़ें कर रहे हैं?


किसी भी टीम की परिभाषा उसके सदस्यों से ही होती है, अतः यह अत्यंत ज़रूरी है की टीम का नेता सदस्यों के साथ होशियारी से पेश आए ताकि वे एक साथ काम करने में प्रभावशाली तथा निपुण साबित हों| हालाँकि एक ही समय में अनेक तरह की संगत से निपटना कठिन होता है और टीम जिस कार्य पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही है उस कार्य से कहीं ज्यादा भारी काम भी लगता है| इसीलिए एक अच्छे नेता को चाहिए कि वह टीम के सदस्यों के साथ काम करते वक्त निम्नोक्त बातें याद रखे:-

१. पारदर्शिता –

टीम के नेता के पास एक प्रभावशाली संचार प्रणाली होनी चाहिए, अर्थात अपनी टीम के सदस्यों के साथ दोतरफा संभाषण| टीम के अंतिम लक्ष्य के बारे में व उसे हासिल करने के मार्ग / उपायों के बारे में पूरी तरह से पारदर्शिता होनी ही चाहिए, ताकि टीम के सारे सदस्य अपने आप ही एक सामान्य धागे से बंध जाएँ| यही वह आधार या बुनियाद है जिस पर टीम कार्य करेगी और इसी से टीम के सदस्यों की आचारनीति की व्याख्या लगभग तैयार होगी|

२. बुनियादी नियम –

टीम के बनते वक्त ही कुछ बुनियादी नियम बना लेने चाहिए ताकि हर सदस्य यह जाने की उसने अपनी ओर से क्या साथ लाना है| उदाहरणतः, समय पर आना, सम्मेलन में सेल फोन ना लाना, जोड़ियों में काम करना, आदि| इन सब से काम से जुडी गंभीरता का स्तर स्पष्ट होता है जिससे हर सदस्य को उसका महत्व समझ में आता है|

३. आदर्श बनकर नेतृत्व –

कुछ सख्त बुनियादी नियम कायम करने के बाद, आपको उन सब से उपर होने जैसा महसूस नहीं होना चाहिए, अर्थात्, यह नेता के लिए भी उतने ही लागू होते हैं जितना अन्य सदस्यों के लिए| आदर्श बनकर नेतृत्व करने की कार्यनीति ही वह एक बात है जो टीम में समभाव की भावना जागृत करती है| इससे सदस्यों को मालूम होता है की वह कैसे नेता के साथ काम कर रहे हैं और जब उनका नेता ही इतना परिश्रमी है तो उन्हें कितना ईमानदार रहना चाहिए|

४. दिलचस्पी लें –

किसी भी टीम को कामयाबी से चलाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है हर सदस्य में दिलचस्पी लेना| संचार की ऐसी स्पष्टता तभी संभव है जब टीम के सदस्यों के बीच किसी भी जाहिर प्रकार की वर्गीकृत सीमाएँ या दीवारें ना हों| जब ऐसा होता है, तब सबको लगता है की उन सभी का महत्त्व है, सभी अनमोल हैं; और तभी, सारे सदस्य अपने काम व मेहनत को लेकर खुल कर व ईमानदारी से बात कर सकेंगे|

५. भावनाएँ व्यक्त करें –

किसी टीम के सदस्य के साथ भावनात्मक होना बिलकुल सही होता है ताकि उन्हें खुद का आदर हो रहा है ऐसा, तथा ‘घर जैसा अपनापन’ महसूस हो| ऐसा करने के लिए ज़रूरी है की आप भी आपकी टीम जो काम कर रही है उसेस जुड़े अपने जूनून तथा अपने लक्ष्य के बारे में निर्लज्जता से बिना किसी संकोच के, व खुले मन से बात करें| हमेशा यही दर्शायें कि भावनाओं को दिखाना मजबूती की निशानी है नाकि कमजोरी की| इससे टीम के सदस्यों की अंदरूनी समस्याएँ सुलझने में भी मदद होगी|

६. सच्ची परवाह करें –

अपने टीम के सदस्यों की परवाह कीजिये| निश्चित कीजिये की वे पेट भर खा रहे हैं, उनके पास सारी ज़रूरी सुविधाएँ हैं, और अपनी ओर से उन्हें सबसे अच्छी सहूलियतें दीजिये| क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते हो, तो आपको केवल बहाने ही मिलेंगे| अनावश्यक झगड़े या वादविवाद टालने के लिए सच्ची परवाह कीजिये| इससे यह भी निश्चित होता है की आपकी टीम भावात्मक तथा मानसिक रूप, दोनों ही तरह से, आपकी योजना में लगी रहेगी|

७. गलतियाँ कीजिये –

एकाद बार गलती करके कमज़ोर बनिए| गलती करना मनुष्य सहज स्वभाव है और जब नेता खुद गलतियाँ मानकर उनसे सीखने के लिए तैयार हो, तो टीम के सदस्यों को कुछ गलतियाँ करके उनसे सक्रीय रूप से सीखने का ना बहुत ज्यादा डर लगता है और नाही कोई खतरा महसूस होता है| आप कार्यक्षेत्र को इतना ज़हरीला नहीं बनाना चाहते जहाँ सदस्य अपना १००% ना दे सके! जब आप गलती करते हैं तब आप उसे मानवीय बना देते हैं और अपने टीम के सदस्यों को यह महसूस कराते हैं की वे भी निश्चिन्त होकर, बिना किसी अनावश्यक भार या दबाव के, आराम से काम कर सकते हैं|

८. उनका अभिप्राय पूछिए –

अंतिम, परन्तु अल्पतम नहीं, एक प्रभावी नेता वही है जो प्रतिपुष्टि (फीडबैक) माँगे| अतः निश्चित कीजिये की आप टीम के हर सदस्य के साथ रूबरू होकर बातचीत करें, और उन्हें पूछें की जो काम टीम ने हाथ में लिया है उसके बारे में उनकी क्या राय है और वे कहाँ पीछे पड़ रहे हैं या कैसी तकलीफ का सामना कर रहे हैं| ऐसा करने से उन्हें यह महसूस होगा कि वे भी सक्रीय रूप से बड़े ध्येय में योगदान दे रहे हैं|
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