“A reader lives a thousand lives before he dies, said Jojen. The man who never reads lives only one.”
― George R.R. Martin, A Dance with Dragons

Perception of the world we live in can be grappled by two methods – experience and books. Experience is a more hands-on approach to leading life but is somehow limited. Books, on the other hand, are treasure chests filled with imagination and truth alike; posing no boundaries or limitations to your adventures. However, reading is a habit not everyone is well acquainted with. Hence, let’s enumerate reasons as to how reading impacts us and why we should read more.

1.It helps improve your mind: There are numerous stories that one can read both fiction and non-fiction. It is found that those who read have a more attuned brain than those who indulge in other passive hobbies and activities. It improves your brain both psychologically and cognitively; thereby helping you in acquiring and processing information more efficiently.

2.Better focus and concentration: Reading a book is nothing like reading a newspaper or a magazine or even a blog. It takes concentrated effort to sit down with a book and try to decipher the information it provides. It sounds difficult, but the more you do it the easier it gets for you to block the outside world and immerse yourself into a completely new one.

3.It is informative: Unlike newspapers, who report mostly current affairs, reading books can provide you with detailed information on so many different cultures, religions, caste, creed and sects. Magazines and newspapers can only give you a gist of everything happening around the world; but books take that a step ahead. Furthermore, it innately immerses you in the physical world of where the story takes place making you want to explore and learn more.

4.Helps build your vocabulary: How many times have we tried and failed in trying to learn new words and wanting to use them differently every now and then to improve our confidence? How many online courses have failed to help us accomplish a better vocabulary? Reading makes it utmost fun. And it does not even require an extra effort! Once you start enjoying the process of reading, your vocabulary enhances itself. Especially with the advent of Kindle readers and the likes, there is an offline Oxford dictionary available at your fingertips. From looking up words, to knowing how to pronounce it, to the complete etymology of a given word – everything is as easy as pie!

5.It improves your verbal skills: When you know more, it is easier for you to communicate with utmost precision- meaning you are able to describe how you feel a lot better. Not only is it beneficial in day-to-day casual conversations but also helps in making an impression at work meeting etc.

6.It improves your writing skills: The one golden rule for writers everywhere is to read more and more and more! The more you read, the better you write. Reading helps you understand the mind and the authorial voice of the writer – which in turn makes an impression on your mind and how you would write and perceive the society you live in.

7.It improves your imagination: Unlike play writing or script writing, books are descriptive in nature. They don’t merely provide basic information of plot but also enhance it by delving deep into the minds of the characters and the world they live in. Hence, by default it helps you to improve your imagination. You find yourself in the world that the book creates and you start picturing it. Once you start reading, your mind becomes more pictorial and hence improves your imaginative and creative skills and your memory.

8.It makes you smarter and interesting: As stated earlier, books are informative. The more you consume the more knowledge you derive. It is basically research in a relatively short amount of time. Avid readers tend to display a better understanding of how things work and in general about people. In a competitive world as ours, being book-smart is essential- especially for children in their academics. It makes you interesting as well without being too forthcoming!

9.It reduces stress: Reading silently by yourself for sixty minutes a day can help slow-down your heart rate and ease tension in muscles. It relaxes you and thus reduces stress. According to a research, it works better than other methods of reducing stress like listening to music, going for a walk or having a cup of tea. This is because reading forces you to concentrate and to mentally get out of your current whereabouts and situations and transports your mind elsewhere completely.

10.It has entertainment value: Reading is not a chore. We read profusely because it has entertainment value – Something out of the box and beyond normal. It is a lot, lot better than sitting in front of the T.V.! Reading amuses us while improving our life skills – and there is no better deal!

TAKEAWAY – Instead of another paragraph of conclusion let’s end this how we started it – with a quote.

“I find television very educating. Every time somebody turns on the set, I go into the other room and read a book.”

– Groucho Marx

हमें अधिक क्यों पढ़ना चाहिए?

जोजें ने कहा “एक पाठक मरने से पहले हज़ार जिन्दगियां जीता है| जो मनुष्य पढता नहीं वह एक ही ज़िन्दगी जीता है |” 

– जॉर्ज आर. आर. मार्टिन, ‘अ डांस विथ ड्रैगन्स’

ये दुनिया की जिसमें हम रहेते हैं, उसका प्रत्यक्ष ज्ञान दो तरह से हमारी पकड़ में आ सकता है – अनुभव और किताबें| जिन्दगी जीने की पध्दती का मार्गदर्शन अनुभव से हो सकता है पर यह सिमित है| दूसरी ओर किताबें, खजाने कि संदुक की तरह कल्पना और सत्य से भरी हैं; जो हमारे साहस पर कोई सीमा या प्रतिबंद नहीं लगाते हैं| फिर भी, पढ़ना एक ऐसी आदत है, जीससे हर कोई अभ्यस्त नहीं होता| अतः एक एक करके कारण देने होंगे की पढने से हमारी जिन्दगी पर क्या प्रभाव पड़ता है और हमने क्यों ज्यादा पढना चाहिए|

१. मन को सुधारने में मदद करता है: काल्पनिक और वास्तविक दोनों ही तरह की अनगिनत कहानियाँ हैं जो हर कोइ पढ़ सकता है| यह देखा गया है की जो लोग निष्क्रिय शौक रखते हैं, उनकी तुलना में पढने वालों का दिमाग ज्यादा लय में होता है| यह आपके दिमाग को मनोवैज्ञानिक और ज्ञानात्मक दोनों ही तरीके से सुधरता है: जिससे ज्ञान को पाने में और उस पर प्रक्रिया करने में ज्यादा कार्यक्षमता रहेती है|

२. बेहतर ध्यान और एकाग्रता: पुस्तक पढना मतलब समाचार पत्र, पत्रिका या ब्लॉग पढ़ने जैसा बिलकुल नहीं है| कोई पुस्तक लेके बेठना और ध्यानपूर्वक प्रयत्न करके जो गूढार्थ दिया गया है उसे समझने में वक्त लगता है| सुनने में यह मुश्किल जरूर लगता है, पर जितना ज्यादा आप पढ़ोगे उतना ही, बाहरी दुनिया से विमुख होना, और खुद एक नई ही दुनिया में डूबा देना, सरल होता जायेगा|

३. यह शिक्षाप्रद है: समाचार पत्रों की तरह मात्र चालू घटना क्रमों के बारे में ही नहीं, बल्कि किताबें पढने से हमें अलग अलग संस्कृतियों, भाषाओं, जातियों, व संप्रदायों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है| समाचारपत्र या पत्रिकाएँ आपको सिर्फ आपके आसपास की दुनिया में क्या हो रहा है उसकी विस्तृत जानकारी देते हैं; जबकि किताबें इससे एक कदम आगे ले जाती है| और ज्यादा कहूँ तो वे [किताबें] आपको शारीरिक रूप से घटनास्थल पर सहजता से पहुंचाकर तल्लीन कर देती है जिसके फलःस्वरूप आप को अधिक जानकारी प्राप्त करने में तथा अधिक सिखने में मदद होती है|

४. आपका शब्द भंडार बढ़ाने में सहायक: अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हमने कितनी बार नए शब्द सीखना और उनका अलग अलग तरह से प्रयोग करने की कोशिश की है और नाकाम हुए? कितने ऑनलाइन कोर्स हमारे शब्द भंडार को बढ़ाने में निष्फल साबित हुए हैं? पढना इसे अत्यधिक मज़ेदार बना देता है| और उसके लिए ज्यादा प्रयत्न भी नहीं करना पड़ता! एक बार आप पढने की प्रक्रिया का आनंद लेने लगते हो, तो आपका शब्द भंडार अपने आप ही बढ़ता जाता है| खास करके ‘किंडल’ जैसे पाठकों के  आगमन के कारण ‘ऑक्सफ़ोर्ड’ जैसा शब्दकोष आपके अंगुलाग्रों पर उपलब्ध है| उस में शब्द को ढूँढने से, व उसके उच्चारण से ले कर शब्द की सम्पूर्ण व्युत्पत्ति तक – सब कुछ एकदम आसान हो जाता है|

५. आपकी शाब्दिक निपुणता सुधर जाती है: जब आप ज्यादा जानते हो, तो आपको अपनी बात एकदम सटीक तरीके से करने में आशिक आसानी होती है – अर्थात आप जो भी महसूस करते हो उसे आप बेहतर शब्दों से बयां कर सकते हो| रोज बरोज के सामान्य वार्तालापों में ही नहीं परन्तु कार्यस्थल के अधिवेशन आदि में भी आप प्रभावशाली साबित होते हैं|

६. आपकी लेखन शैली सुधर जाती है: हर जगह लेखकों के लिए सुवर्ण अक्षरों में लिखा हुआ एक ही नियम है – पढो, ज्यादासे ज्यादा पढो! जितना ज्यादा आप पढोगे उतना अच्छा आप लिखोगे| पढ़ ने से आपको लेखकीय दिमाग तथा वाणी को समझने में मदद मिलेगी – जिसे के चलते आपके दिलोदिमाग व लेखन शैली पर, तथा आप जिस समाज में रहते हो और उसको आप कैसे देखते-समझते हो – इन सब पर एक प्रभाव पड़ता है|

७. आपकी कल्पना शक्ति को उत्कृष्ठ बनाता है: नाट्यलेखन व कथानक लेखन से काफी भिन्न, किताबें वर्णनात्मक होती हैं| वे न केवल कथावस्तु की बुनियादी जानकारी देती हैं पर खूब छानबीन करके, पत्रों के दिमाग में घुसकर वे जहाँ व जिस दुनिया में रहते है वहीँ हमें ले जाती है| इस वजह से वे बकाया आपकी कल्पना शक्ति बेहतर बनाने में मदद करती है| आप अपने आप को किताब की दुनिया में पाते हो और आप उसका दृश्य बनाने लगते हो| एक बार आप किताब पढना शुरू कर देते हो तो आपका दिमाग चित्रात्मक हो जाता है, अतः आपकी कल्प्नात्मक और सर्जनात्मक शक्तियाँ तथा स्मरणशक्ति बेहतर हो जाती है|

८. यह आपको तेज़-तर्रार और रोचक बनाता है: आगे कहा वैसे, किताबें शिक्षाप्रद होती हैं| आप जितनी ज्यादा पढ़ते हो उतना ज्यादा ज्ञान आप पाते हो| यह मूलतः कम समय में किया गया संशोधन है| उत्साही वाचक चीजें कैसे काम करती है तथा सामान्यतः लोगों के बारे में अधिक समझ-बूझ दर्शाते हैं| हमारे स्पर्धात्मक जगत में “पुस्तक ज्ञानी” होना अति जरुरी है – खास करके बच्चों को उनकी बेहतर शिक्षा के लिए| यह आपको स्पष्टवादी ना बनाते हुए भी रोचक बनाता है|

९. यह तनाव कम करता है: दिन में ६० मिनिट शांतिसे मन में पढने से ह्रदय की गति को कम करने में मदद मिलती है, और माँसपेशियों में तनाव कम होता है| यह आपको विश्रांति देता है जिससे आपका तनाव कम हो जाता है| एक अन्वेषण के अनुसार, यह तनाव कम करने के अन्य तरीके जैसे संगीत सुनना, चलने जाना, या चाय पीना, से अधिक बेहतर साबित हुआ है| ऐसा इस लिए होता है क्योंकि पढना जबदस्ती से आपका ध्यान अपने हालातों व ठौर-ठिकानों से हटाके पूर्ण तरह से दूसरी जगह पर केन्द्रित करने व वहीँ पहुँच जाने में मदद करता है|

१०. इस में मनोरंजन के गुण भी शामिल है: पढना रोजका काम [उबाऊ काम] नहीं है| हम अधिक मात्रा में पढ़ते हैं क्योंकि उस में मनोरंजन के गुण भी शामिल है – कुछ जरा हटके और सामान्य से अधिक| यह टी.वि. के सामने बैठे रहने से तो बहुत ही ज्यादा बेहतर है! हमारी जिन्दगी की निपुणता को बढ़ाने के साथ साथ पढना हमारा मन भी बहलाता है – और इससे अच्छा सौदा हो ही नहीं सकता!

इतना ले जाओ – उपसंहार में एक नया परिच्छेद लिखने के बदले हमने जैसे शुरू किया था वैसे ही समाप्त करते हैं: – एक उध्दरण (उक्ति) के साथ…

“मैं टेलीविज़न को बहुत ही ज्ञान प्रद मानता हूँ| जब भी कोई इसे चालू करता है, मैं दुसरे कमरे में जा कर पुस्तक पढ़ता हूँ|”

ग्रौचो मार्क्स

Early to Rise: Benefits of Rising Early, and How to Do It

People struggling with inefficiency in managing time can really use the habit of waking up early each day; a habit which adds in with itself many a health benefits. However, this transition should be organic so that it can help you find your own niche to see what works out best for you and ultimately give you the best possible start to the day. It may be difficult, but an honest effort at waking up even 15 minutes earlier than usual could help you improve the quality of your life.

Here are a few great benefits of choosing to be an early riser over a night owl:-

    1. The Morning Sun: Sunlight, especially in the morning, is a great source of Vitamin D which helps in the absorption of calcium in the body thereby preventing the brittleness of the bones and teeth. The morning sun, being the grandeur of nature that it is, also is anti-depressant and helps fight against seasonal depression by releasing endorphin. It is the kind of healing-phenomenon that you surely don’t want to miss out on!
    2. mpw

      Better Sleeping Pattern: People who usually like working till late in the night are generally slacked down by perturbed sleep and exhaustion. From the bird’s eye view this habit seems productive and healthy, but in the long term it leads to a bizarre sleeping pattern and immense unrest. However, sleeping early and waking up early makes sure you get ample sleeping time and greet the following day with more visor than usual.

    3. Solitude: In the wake of fast-pacing lives we often forget to prioritise ourselves and get some quiet alone time. Waking up with the sun makes sure of just that. It is the perfect time to keep all the technologies at bay and commit to some positive solitude. It really helps in getting a fresh perspective to each day and be meditative and contemplative.
  1. Ample Time: With everything becoming so work-centric, our hobbies take a backseat quite quickly. Waking up early makes sure we have more time to allocate to such long lost passions before resuming routine work.
  2. Productivity: The quietude of the morning with the sun beaming is probably the best time to be able to focus on your pending work and increase your level of productivity. What you could have taken hours to complete at night, could be wrapped up much earlier with a fresh and rested mind in the morning; with almost no distractions to disarm your concentration.
  3. Breakfast: All the happiness of the day depends on a leisurely breakfast! Breakfast is the most important meal of the day, which we generally skip or consume inadequately. It in turn makes us prone to health risks such as high blood pressure and an unhealthy assortment of blood-fats to name a few. But a healthy meal in the morning and you know you are sorted. Rising early gives you that kind of freedom and space to inhabit such a healthy regime.
  4. Exercise: We tell ourselves we have other times of the day to exercise but we know deep in our hearts that we are feeding ourselves a big fat lie. Comparatively, a morning exercise habit has lower risks of being procrastinated. It helps improve both mental and physical energy, increase your metabolism and cultivate some consistency.
  5. Organise: It is all about self-discipline. Early mornings make sure you have everything well-organised including your thoughts and plan your day well ahead. This way you know you govern your life instead of being governed byit.

So How Does One Become an Early Riser?

  1. Slow and Steady: Any habit that needs to be cultivated has to be dealt with patience. Do not be unrealistic and drastic about making such a life-altering change. Be slow and steady and give your body time to adjust. Start with as low as just 15-30 minutes of waking up earlier than usual and then make this process more gradual and organic till you make it a habit.
  2. Do not overthink: Once that alarm buzzes do not rationalize with yourself about the “extra 5 minutes of sleep” that you could use; because those 5 minutes turn to 50 in no time! Keep that alarm clock away from your bed so that you would have to get up to snooze it, and once you are off your bed make sure you stay up.
    1. Motivate Yourself Continuously:


      Sure you work hard and you need to cut some slack once in a while, but to grow yourself into this habit you need more discipline than normal. So motivate yourself. Tell yourself why it is important to grow into this habit; focusing majorly on the pros than cons, and do not stop even after becoming habitual. You don’t just need to build this habit but want to keep at it every single day.

    2. Sleep Early: This is probably the most important thing to do. Stop the unproductive activities before bed and just sleep instead. If you sleep late then waking up early will seem like a huge task and will not come easy at all. However, sleeping early will come to you easier than anything else!
    3. Look Forward To It: If you do something you really are looking forward to the next morning you will LOVE to wake up early because you will want to accomplish it. Always start your morning by doing what you will love doing no matter what. If you keep really dreadful tasks in the morning, it will not give you a good enough reason to make the extra effort. So set your goals and love them!
  1. Do not laze around: Do not wake up just to laze around and waste time. Be productive. The more you achieve early morning the more time you shall have at hand to comfortably perform the routine tasks you generally rush through. No one likes rushing through tasks that can be comfortably performed.


“Early to bed, early to rise, makes a man healthy, wealthy and wise.” Seems like a really small price to pay to get the life you desire!

सुबह जल्दी उठाना: जल्दी उठने के फायदे, और इसे कैसे किया जाये

जो लोग समय के आयोजन की अदक्षता से झूझ रहे हैं वह रोज़ सुबह जल्दी उठने की आदत का सही मायनों में उपयोग कर सकते हैं; एक ऐसी आदत जो अपने आप ही काफी स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे भी साथ लाती है| परन्तु यह बदलाव जैविक होना चाहिये ताकि आप अपना छोटा कोना ढूंढकर, आपके लिए क्या सबसे अधिक लाभप्रद होगा वह जानकार, उसी प्रकार से कार्य करके दिन को बेहतरीन तरीके से शुरू कर सकते हैं| यह कठिन हो सकता है, लेकिन हर रोज़ से केवल १५ मिनट जल्दी उठने का एक प्रामाणिक प्रयास भी आपके जीवन का स्तर सुधार सकता है|

पेश है रात के उल्लू की अपेक्षा सुबह-सवेरे जल्दी उठने को चुनने के कई बेहतरीन फायदे :-

१. सवेरे का सूरज: सूरज की रोशनी, खास करके सुबह की, विटामिन डी का एक श्रेष्ठ स्रोत होती है| यह विटामिन डी कैल्शियम के शोषण में मददरूप होता है जिससे हड्डियों व दांतों को भंगुर होने से बचाया जा सकता है| सुबह का सूरज, प्रकृति की शान होने के साथ साथ एक अवसाद विरोधी औषधि भी है जो एंडोर्फिन को उन्मुक्त करके सामयिक अवसाद से झूझने में सहायक होता है| यह एक ऐसा आरोग्यकर नुस्खा है जो आप अवश्य ही खोना नहीं चाहते!


२. नींद का बेहतर प्रतिमान: जिन लोगों को देर रात तक काम करना अच्छा लगता है वह ज्यादातर समय कम नींद व थकान के मारे धीमे पड़ गए होते है| उपरी सतह से यह आदत उपजाऊ तथा स्वस्थ लग सकती है, लेकिन लम्बे अर्से में यह विचित्र शयन प्रतिमान व अतिशय बेचैनी की ओर ले जाएगी| और फिर, जल्दी सोने व जल्दी उठने से यह निश्चित है की आप पूरी मात्र में नींद ले सकेंगे और आने वाले दिन का स्वागत सामान्य से अधिक जोश के साथ कर सकेंगे|

३. एकांत: इस दौड़-भाग भरी ज़िन्दगी में हम कई बार अपने आप को थोडासा महत्व देकर खुद के साथ कुछ शांत क्षण बिताना भी भूल जाते हैं| सूर्य के साथ उठना इस कमी को सुनिश्चित रूप से पूरा करता है| सारी तकनीकी वस्तुओं को दूर रखने का और खुद को थोडेसे हकारात्मक एकांत को सुपुर्द करने का यह सबसे बेहतरीन समय है| इससे हर दिन को एक ताजगी भरे नज़रिए से देखने में तथा चिंतनशील और विचारमग्न रहने में बहुत ही सहायता मिलती है|

४. भरपूर समय: सब कुछ इतना व्यवसाय-केन्द्रित हो गया है की अपने शौक जल्दी ही भुला जाते हैं| जल्दी उठना इस बात को निश्चित करता है की रोजमर्रा का काम शुरू करने से पहले हम इन सब जूनूनों के लिए वक्त निकाल सकते हैं|

५. उपयोगिता: सुबह-सवेरे का शांत वातावरण जब केवल सूरज ही मुस्कुरा रहा हो, अपने बाकि रहते कामों को पूरा करने पर सही ध्यान देने का सबसे बेहतरीन समय है, जिससे की आपकी उपयोगिता भी बढ़ जायेगी| जिस काम को पूरा करने में आप को रात को घंटों लग सकते थे उसे फटा-फट ख़त्म किया जा सकता है क्योंकि इस वक्त मन ताज़ा व आराम लिया हुआ होता है और आपके ध्यान को भंग करने वाले विकर्षण भी बहुत कम होते हैं|

६. सवेरे का नाश्ता: पूरे दिन की ख़ुशी अच्छे व इत्मीनान से किये हुए सवेरे के नाश्ते पर निर्भर होती है! सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है, लेकिन ज्यादातर हम इसे ही टाल जाते हैं या अपर्याप्त मात्र में करते हैं| इसके फल:स्वरूप हम स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों के लिए जैसे की उच्चरक्तचाप और अनेक अस्वास्थ्यकर रूधिर पित्तसान्द्रवों के लिए मायल हो जाते है| परन्तु सुबह-सवेरे एक स्वास्थ्यप्रद भोजन करो और खुद को सुलझा मानों| जल्दी उठने से आपको इस प्रकार की आझादी मिल जाती है जिससे आपको एक सव्स्थप्रद व्यवस्था में रहने की जगह मिल जाती है|

७. व्यायाम: हम खुद को यह कहते रहते हैं की हमारे पास कसरत करने के लिए काफी समय है लेकिन दिल ही दिल में हम जानते हैं की यह सबसे बड़ा झूठ है जो हम खुद से बोल रहे हैं| कसरत करने की सुबह की आदत ऐसी है जिसे आगे धकेले जाने का खतरा कम होता है| अतः मानसिक तथा शारीरिक, दोनों ही स्वास्थ्य सुधरते हैं, चयापचय की क्रिया अधिक होती है, और कसरत करने में नियमितता भी पैदा होती है|

८. नियोजन: यह सब आत्मानुशासन के बारे में है| सवेरे जल्दी उठने से आपको हर चीज़/बात, तथा अपने विचारों को भी सुनियोजित करने का पूरा समय मिल जायेगा, जिससे आप अपने दिन को पहले से ही आयोजित कर सकेंगे| अतः आपको यह जानकारी होगी की आप अपनी ज़िन्दगी के मालिक हैं, नाकि ज़िन्दगी आपकी|

तो किस तरह जल्दी उठने वाला बना जाता है?

१. आहिस्ता और अटल: किसी भी आदत को विकसित करना हो तो धीरज से काम लेना पड़ता है| ऐसे जीवन बदलने वाले परिवर्तन लाने के लिए अवास्तविक व उग्र बनने से काम नहीं चलेगा| आहिस्ता जाओ और अटल रहो तथा अपने शरीर को नियमित होने का पूरा समय दो| जिस समय आप उठते हैं उससे केवल १५ या ३० मिनट जल्दी उठने से शुरू करो और धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को अधिक जैविक बनाओ जब तक की यह एक आदत नहीं बन जाती|

२. बहुत ज्यादा मत सोचो:
एक बार वह आलार्म बज जाता है तो खुद को “बस ५ मिनट और” से फुसलाकर सही सिध्द करने की कोशिश भी मत करो; क्योंकि कुछ ही समय में यही ५ मिनट ५० बन जायेंगे! आलार्म घड़ी को अपने बिस्तर से दूर रखो ताकि उसे बंद करने के लिए आपको पलंग पर से उठना ही पड़ेगा| और एक बार आप उठ खड़े हुए तो पक्का कर लीजिये की आप बिस्तर से बाहर ही रहेंगे|

३. खुद को लगातार प्रेरित करते रहें:


यकीनन ही आप कड़ी मेहनत करते हैं और आपको थोडा समय तो सुस्त होने की ज़रुरत है; परन्तु जल्दी उठने की आदत डालने के लिए आपको सामान्य से अधिक अनुशासन की आवश्यकता होगी| अत: खुद को प्रेरित करते रहो| केवल इसीकी अच्छाइयों व बुराइयों पर ध्यान दे करके यह आदत क्यों अच्छी है यह अपने आप को बताओ, और आदत पड़ जाने पर भी रुकना मत| केवल इस आदत को डाल लेना काफी नहीं है, इसे कायम रखना उससे भी अधिक ज़रूरी है|

४. जल्दी सो जाएँ: संभवत: यह सबसे महवपूर्ण कार्य है| सोने के पहले के फ़ालतू काम बंद करके बस सो जाइये| यदि आप देर से सोते हैं तो जल्दी उठाना एक बहुत बड़ा व मुश्किल कार्य लगेगा और आसानी से हो नहीं पायेगा| परन्तु जल्दी सोने जैसा सरल काम दूसरा नहीं है, अतः इसे आप एकदम आसानी से कर लेंगे!

५. इसकी प्रतीक्षा करना: यदि आप कुछ ऐसा काम करने की ठान लेते हैं जो आपको बहुत प्रिय है तो आप ख़ुशी से अगली सुबह का इंतज़ार करंगे और आपको सुबह सवेरे जल्दी उठना अच्छा भी लगेगा क्योंकि आप कुछ सिध्द करना चाहते हैं| चाहे कुछ भी हो, अपनी सुबह को हमेशा अपना मनपसंद काम करके शुरू कीजिये| यदि आप सुबह के लिए कठिन काम रखते हो, तो इससे आपको जल्दी उठकर काम पर लगने की प्रेरणा नहीं मिलेगी, और आप उस अतिरिक्त मेहनत को ना करने के बहाने ढूढने लगेंगे| इसलिए अपने लक्ष्य कायम कीजिये और उनसे बेहद लगाव रखिये|

६. इधर-उधर सुस्ताइये मत: केवल इधर-उधर सुस्त पड़े रहने के लिए व वक्त बरबाद करने के लिए सवेरे जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं है| उपयोगी बनिये| जितना ज्यादा कम सिध्द होगा उतना ही वक्त आपके हाथ में होगा अपने सारे काम आसानी से पूरे करने के लिए| किसीको भी हर वक्त भागना अच्छा नहीं लगता; खास करके उन कार्यों के लिए जो आप आसानी से व आराम से कर सकते हैं|

अंग्रेजी में क्या खूब कहा है – ‘Early to bed, early to rise, makes a man healthy, wealthy and wise.’ – जल्दी सोना व जल्दी उठाना, आदमी को स्वस्थ, धनवान, व सयाना बनता है|
जैसा जीवन चाहिए वैसा जीवन जीने के लिए यह कितनी छोटी कीमत है!