6 Ideas to Get Rid of Laziness

That feeling of … I don’t want to do anything at all …hits just about everyone. Many succumb to it easily and stay with the habit for years together, till something happens to pull them out of it. However, even the busiest and the most disciplined people have been known to be hit by the ‘laziness bug’ and end up not doing much for days and even weeks together. Here are some interesting ideas on how to work yourself back into becoming active, when you feel laziness swallowing you:

1. Being lazy can come about when you are always in the same place for a long period of time. So get out of the house and go to a park, club, restaurant or some spot where you can see a lot of people, or get into a conversation with someone. Find a magazine, book or something that will invigorate your mind. Check out the key events happening in your city, which can be a musical fest, sports event or a charity show that you can participate in or watch. Involving yourself in such activities will take you away from boring routines, make you move, get in touch with new people and give you an idea that can turn into something bigger. People come to attend my 2 days’ CHANGE YOUR LIFE Workshop, just because by staying in an inspirational atmosphere & meeting new people, they get new energy.

2. Laziness can come from boredom, so the best way to break away from this is by learning a new hobby or skill. It can be something sporty, or some classes in a particular art, craft or language. You can try enrolling into classes that improvise housekeeping or cooking skills or something that takes you out of the city to a new place, where you can discover, write about or photograph places of art, history and culture. Adventurous activities or tours that take you to exotic places are the best ways to get away from boredom, as they get you thinking about something new, interesting which gets back your zest in life.

3. Exercising, Doing Yoga, Tai Chi etc are some of the most effective ways of getting out of laziness. Enroll in a class as this way you have to make yourself ready to go to the location for physical activity. If you feel that doing the same set of physical routines or exercises is boring, get into something new, which gives the same level of movement. When the body gets moving, you become energetic and motivation arises, which helps break out of the dreadful cycle of laziness.

4. Bring routines into your everyday activities so that you are disciplined, which makes you active and energetic. Laziness takes you out of streamlined tasks and takes you into space where you don’t think and act coherently. So step out of it by thinking of fun ways to make yourself disciplined initially after which you can get into more serious things. For example decide to do aerobic or zumba dance for fifteen minutes every morning for a week, followed by a jog around the neighborhood, after which you will read the morning paper and then attend some phone calls. It may be difficult to get started on such a routine at first, but it’s a start to doing nothing at all.

5. Call up a close friend and talk it out. A lazy state of mind can change with just a simple conversation on something like what’s happening around the corner, in someone’s home, at the park even the weather. You might suddenly get an idea that motivates you to think about something that is interesting. This one change can get you out of the cycle of laziness and into the groove of doing a task or activity that motivates you, shows your skills or learn something new. When you talk from the heart to someone in your inner circle, feelings come out and you can find out something that was not present till now. Your mood changes which help to break you out of laziness and brings back the motivation into life.

6. When you have a lot of things to do, facing them can be difficult, so you put them off, triggering laziness. Get out of this by first writing down all tasks that need to be done, prioritize them and start out by doing those tasks that take the least time. After finishing with this lot, move onto those activities that can take longer time, but do them in a stepwise way so that they are not difficult to manage. Write down any problems that you face on paper so that you can think about them later or find a solution by talking with a friend. Finally, if you find yourself thinking about any task that has to be done quickly, get it done right away. As you finish tasks faster, you find yourself more motivated which breaks away the laziness.

अपने आलस्य से छुटकारा पाने के 6 उपाय

यह महसूस करना की, …‘मैं बिल्कुल कुछ भी नहीं करना चाहता/चाहती’…सभी को यह बात कभी न कभी जकड़ लेती है। कई लोग आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं और कई सालों तक यह आदत साथ में रहती हैं, जब तक उन्हें इससे बाहर निकलने के लिए प्रेरणा देने वाली कोई घटना न घट जाए। सबसे व्यस्त और सबसे अधिक अनुशासित लोगों को भी कभी-कभी ‘आलस्य का कीड़ा’ काटता है और वे कई दिनों तक या फिर कभी-कभी तो कई हफ़्तों तक ज्यादा कुछ काम नहीं करते हैं। जब आपको लगता है कि आलस्य आपको निगल रहा है तब खुद को कैसे सक्रिय करें, इस पर निचे कुछ दिलचस्प बातें बतायी गयी हैं:

1. आप तब आलसी हो जाते हैं जब आप हमेशा एक ही जगह पर लंबे समय तक रहते हैं। इसलिए घर से बाहर निकलें और किसी पार्क, क्लब, रेस्तरां या किसी ऐसे स्थान पर जाएं जहां आप बहुत सारे लोगों को देख सकें या किसी के साथ गप्पे मार सकें। कोई पत्रिका, किताब पढ़ें या कुछ ऐसी चीज करे जो आपके दिमाग पर जोर दे। अपने शहर में होने वाली प्रमुख घटनाओं की जानकारी लें। किसी संगीत समारोह, खेल कार्यक्रम या चैरिटी शो में आप भाग ले सकते हैं या उसे देख सकते हैं। इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने से आप बोअर होने वाली दिनचर्या से दूर जायेंगे, आप उठने-बैठने हिलने-डुलने के लिए मजबूर हो जायेंगे, नए लोगों के साथ संपर्क में आयेंगे और आपको कोई ऐसी कल्पना सूझ सकती है जो किसी बड़ी चीज को जन्म दे सकती है। मेरे दो दिनों के ‘Change Your Life’ (चेंज योर लाइफ) वर्कशॉप में हिस्सा लेनेवाले प्रतिभागी इसलिए वर्कशॉप में आते हैं क्योंकि उन्हें नए लोगों से मिलने और प्रेरणादायी वातावरण में रहने से नई एनर्जी मिलती हैं।

2. आलस्य बोरियत से आ सकता है, इसलिए इससे दूर रहने का सबसे अच्छा तरीका होता है कोई नया शौक या कौशल सीखना। आप खेल-कूद में भाग ले सकते हैं या कोई विशेष कला, शिल्प या भाषा सिख सकते हैं। आप हाउसकीपिंग या कुकिंग स्किल्स या किसी चीज़ को इंप्रूव करने के क्लासेस लगा सकते है। ऐसे क्लासेस लगाये जो आपको शहर से बाहर किसी नई जगह पर ले जाने वाले हो, जहाँ आप कला, इतिहास और संस्कृति की जगहों के बारे में जान सकते हैं, लिख सकते हैं या उनके फोटो निकाल सकते हैं। साहसिक गतिविधियाँ करना या घूमने के लिए असाधारण जगहों पर जाना, बोरियत को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। क्योंकि वे आपको कुछ नया, दिलचस्प करने के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं। और आपको जीवन में फिर से उत्साह मिलता है।

3. व्यायाम करना, योग करना, ताई ची आदि आलस्य से बाहर निकलने के कुछ प्रभावी तरीके हैं। आप ऐसी क्लास लगाये जो आपको आपके घर से दूसरी जगह पर जाने के लिए मजबूर करे। यदि आपको लगता है कि एक ही तरह की शारीरिक दिनचर्या या व्यायाम करने से बोअर हो रहे हैं तब कुछ ऐसा नया करें जिससे आपके शरीर में उसी तरह की हलचल हो। जब शरीर में गति होती है, तो आप में एनर्जी आ जाती हैं और प्रेरणा पैदा होती है, जो आलस्य के भयानक चक्र से बाहर निकलने में मदद करती है। मेरे चार दिनों के कैंप ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ) में, उसमें हिस्सा लेने वाले लोगों से मैं यह बात शेयर करता हूं कि वे कैसे आसानी से और अच्छे से ज्यादा एक्टिव हो सकते हैं|

4. खुद को एक्टिव, उर्जावान और अनुशासित बनानेवाले काम करें। आलस्य आपको बुद्धिसंगत कार्यों से दूर ले जाता है और आपको ऐसी स्थिति में ले जाता है जहाँ आप न ठीक से सोच पाते हैं और न ही काम कर पाते हैं। खुद को अनुशासित बनाने के लिए शुरुआत में ऐसे कार्य करें जिससे आपको मजा आये, उसके बाद आप और अधिक गंभीर चीजों में हिस्सा ले सकते हैं। उदाहरण के लिए एक सप्ताह के लिए हर सुबह पंद्रह मिनट के लिए एरोबिक या ज़ुम्बा नृत्य करने का निर्णय लें, इसके बाद अपने इलाके में जॉगिंग करें, जिसके बाद आप सुबह का पेपर पढ़ें और फिर कुछ फोन कॉलों करें। शुरुआत में यह सब करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन कुछ भी नहीं करने से यह अच्छा है।

5. किसी करीबी दोस्त को बुलाइए और उनसे बात कर मन हल्का कीजिये। किसी कोने में, किसी के घर में, पार्क में क्या चल रहा है इस पर बात करें है। मौसम के बारे में बात करना, जैसे साधारण चर्चा करने से भी मन का आलस्य दूर हो सकता है। अचानक कोई दिलचस्प विचार आपके मन में जन्म ले सकते है। यह परिवर्तन आपको आलस्य के चक्र से बाहर निकाल सकता है। यह आपको प्रेरणा देने वाला कोई काम या गतिविधि करने के लिए, अपना स्किल दिखाने या कुछ नया सिखने की ओर ले जायेगा। जब आप अपने खास दोस्तों से बात करते हैं, तो मन की भावनाएं सामने आती हैं और आपको कुछ नया पता चलता है। आपका मूड बदल जाता है जो आपको आलस से बाहर निकालने में मदद करता है और जीवन में प्रेरणा वापस लाता है।

6. जब आपके पास करने के लिए बहुत से काम होते हैं, तो उन्हें करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए आप उन्हें टालते जाते हैं। यह आलस्य को जन्म देता हैं। इससे बाहर निकलने के लिए पहले उन सभी कामों को लिख ले जो आपने करने हैं, उन कामों को प्राथमिकता के अनुरूप रखें और सबसे पहले उन कार्यों को करना शुरू करें जिन्हें कम से कम समय लगता हो। वे ख़त्म हो जाने के बाद उन कामों पर ध्यान दे जिन्हें ज्यादा समय लगता हो। लेकिन उन्हें एक-के-बाद-एक करें ताकि उन्हें मैनेज करना मुश्किल न हो। काम के दौरान जो भी समस्या आती हो आप उसे कागज़ पर लिखे ताकि आप बाद में उनके बारे में सोच सकें या किसी दोस्त से बात करके कोई हल निकाल सकें। अंत में, यदि आप आपके किसी भी कार्य के बारे में सोच रहे हैं जिसे जल्दी से किया जाना है, तो उसे तुरंत पूरा करें। जैसे-जैसे आप काम जल्दी-जल्दी पूरा करते हैं, आप ज्यादा मोटिवेटेड होते हैं। यह आलस्य को दूर करता है।

How Morning Meditation can relieve your Stress

1. How morning meditation relieves stress and anxiety?

Many people meditate regularly during the morning hours. It doesn’t take much of their time. Around 20 minutes of meditation is quite enough to center oneself and kick start the day right. But the question is why we should practice morning meditation? Well just like me there are many others who are not morning people. But it is extremely easy to make it as a habit as long as you inculcate it into your daily routine. People who stick to their morning meditation schedule are left with a tangible feeling of clarity. In fact, this rippling influence of meditation extends all throughout to some of the other crucial spheres of their lives.

2. Ways by which morning meditation relieves stress

Here are some of the ways by which morning meditation relieves stress. It helps you to start your day on a positive note and to train out your mind to react positively towards stress with a high level of creativity and also calmness.

3. No need of coffee

Since meditation actually activates the parasympathetic nervous system of the body, therefore it triggers out a deep state of relaxation. Even when a person wakes up early morning sleep tired, just 20 minutes of the meditation will release energy enhancing endorphins which bring a spring in life. So it helps to reenergize your entire body without solely relying on caffeine.

4. Eat cleaner

Numerous studies have actually found that when people are being stressed or sleep deprived, then they may reach out for bad foods. After developing a momentum from morning meditation, you will discover a strong craving for healthy and clean food that the body will easily be able to digest and turn into a fuel which helps you to operate constantly at a high energy level.

5. Fewer headaches

Although morning meditation doesn’t act as a substitute for medical treatment but it is utilized for the reduction in pain which is being associated with the headaches. Thus, meditation during the morning hours can actually be complemented with the traditional health and wellness boosting approaches. I suffered from frequent headaches during the morning hours and it didn’t vanish till the time I changed eating habits and started meditating.

6. Filters out negative thoughts

The sympathetic nervous system of the body is responsible for triggering out the production of the stress hormone known as cortisol. This hormone is well known for dragging out the energy level of a person. The more the production of cortisol in the body, the more the person will be depressed and anxious. This all fills a person will a lot of negative thoughts. For overcoming the negativity and over thinking, just practice morning meditation daily for a few minutes. It transforms your mind to the quiet and also peaceful one and makes you feel happy and relaxed.

7. Improves sleep

Around half of people suffer from sleep disorders. One of the research studies found that a group of people who performed mindfulness-based morning meditation fell asleep sooner and also stayed asleep for a longer duration of time in comparison to those who didn’t practice it. The meditation practice enables a person to relax and also controls all sorts of runways thoughts that actually interfere with the sleep. Since the body feels relaxed due to the release of stress, it enters the person into a completely peaceful of the state which shortens the time which a person takes to fall asleep and also improves sleep quality.

8. Clears mind

Our brains are the factories of thoughts and we cannot shut it down. By trying out meditation, we can focus on the attention of clearing the mind and stopping all sorts of thoughts in it. When you first settle into a meditation session, just check out how you are simply feeling? Are you busy, tired or anxious? See whatever you are actually bringing to the meditation session is all fine. When you find thoughts and feelings actually arising during the meditation session, then you will view it as friendly and positive and not harsh.


Morning meditation benefits the body and mind and brings many noticeable positive effects in your life. It clears out the mind from negative thoughts and dissolves out the stress and anxiety too.

कैसे सुबह-सुबह ध्यान करना आपको तनाव से छुटकारा दिलाता है

1. सुबह में ध्यान करना तनाव और चिंता से कैसे छुटकारा दिलाता है

कई लोग सुबह के समय नियमित रूप से ध्यान करते हैं। इसमें ज्यादा समय नहीं लगता है। लगभग 20 मिनट का ध्यान अपने आप को केन्द्रित करने और दिन की सही शुरुआत करने के लिए पर्याप्त है। लेकिन सवाल यह है कि हमें सुबह की साधना क्यों करनी चाहिए। ठीक है, मेरी तरह ही कई अन्य लोग भी हैं जो सुबह जल्दी नहीं उठते। लेकिन जब आप रोज सुबह उठना शुरू करेंगे तब यह आसानी से एक आदत बन जाएगी। जो लोग अपने सुबह के ध्यान कार्यक्रम से पक्के जुड़े रहते हैं, उनमे स्पष्टता की एक ठोस भावना रहती है। वास्तव में, ध्यान का यह प्रचंड प्रभाव उनके जीवन के सभी या फिर कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैला हुआ रहता है। मेरे ‘Change Your Life’ (चेंज योर लाइफ़) कार्यशाला के प्रतिभागियों का अनुभव भी बिल्कुल वैसा ही है।

2. सुबह के समय ध्यान करने से तनाव ऐसे दूर होता है

ये कुछ तरीके हैं जिनके द्वारा सुबह का ध्यान तनाव से राहत देता है – आपका दिन अच्छे से शुरू करने में मदद करता है। यह अपने दिमाग को उच्च स्तर की रचनात्मकता के साथ सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है। साथ ही यह आपके दिमाग को शांत रहने में मदद भी करता है।

3. कॉफी की जरूरत नहीं होती

चूंकि ध्यान वास्तव में शरीर के पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को सक्रिय करता है, इसलिए यह रिलैक्स होने की गहरी अवस्था को शुरुआत करता है। यहां तक कि जब कोई व्यक्ति सुबह थका हुआ उठता है, फिर भी बस 20 मिनट का ध्यान करने से एंडोर्फिन को बढ़ाने वाली ऊर्जा जारी होती है जो जीवन में उत्साह लाता है। यह कैफीन पर निर्भर रहे बिना पूरी तरह से आपके पूरे शरीर को पुन: उत्साहित करने में मदद करता है।

4. शुद्ध खाने के लिए उत्तेजित करता है

कई अध्ययनों में पाया गया है कि जब लोग तनावग्रस्त होते हैं या कम नींद लेते हैं, तो वे खराब खाद्य पदार्थ खा सकते हैं। सुबह के ध्यान से एक गति विकसित करने के बाद, स्वस्थ और स्वच्छ भोजन के लिए आपकी इच्छा मजबूत होगी जिसे शरीर आसानी से पचायेगा और ईंधन में बदलेगा। यह ऊर्जा का उच्च स्तर देगा जो आपको लगातार काम करने में मदद करेगा।

5. कम सिरदर्द होना

हालांकि सुबह का ध्यान मेडिकल उपचार के विकल्प के रूप में नहीं है, लेकिन इसका उपयोग उस दर्द में कमी लाने के लिए किया जाता है जो सिरदर्द से जुड़ा हुआ होता है। इस प्रकार, सुबह का ध्यान पारंपरिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाले दृष्टिकोण के साथ पूरक हो सकता है। मुझे भी सुबह लगातार सिरदर्द होता था। यह तब गायब हुआ जब मैंने खाने की आदतों को बदल दिया और ध्यान करना शुरू कर दिया।

6. नकारात्मक विचारों को बाहर निकालता है

कोर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन के उत्पादन को ट्रिगर करने के लिए शरीर की सिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र जिम्मेदार है। यह हार्मोन व्यक्ति के ऊर्जा स्तर को कम करता है। शरीर में कोर्टिसोल का उत्पादन जितना अधिक होगा, व्यक्ति उतना ही उदास और चिंतित होगा। यह सब व्यक्ति को बहुत सारे नकारात्मक विचारों से भर देता है। नकारात्मकता और बहुत अधिक सोचना, इसपर काबू पाने के लिए, बस कुछ मिनटों के लिए प्रतिदिन सुबह ध्यान करें। यह आपके दिमाग को शांत और स्थिर करता है। साथ ही साथ
आपको खुश और तनावमुक्त महसूस कराता है।

7. नींद में सुधार करता है

लगभग आधे लोग नींद की बीमारी से पीड़ित हैं। शोध अध्ययनों में पाया गया कि सचेत रूप से सुबह ध्यान करने वाले लोग, उन लोगों की तुलना में जल्दी सो जाते हैं और अधिक समय तक सोते हैं, जिन्होंने इसकी प्रैक्टिस नहीं की। ध्यान, व्यक्ति को रिलैक्स करने में मदद करता है। यह दिमाग में दौड़ने वाले सभी प्रकार विचारों को भी नियंत्रित करता है जो नींद आने नहीं देते हैं। तनाव मुक्त होने के कारण शरीर रिलैक्स महसूस करता है। यह व्यक्ति को पूरी तरह से शांत अवस्था में प्रवेश कराता है। यह नींद आने का समय कम कर देता है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार लाता है।

8. मन को साफ करता है

हमारा दिमाग विचारों का कारखाना है और हम इसे बंद नहीं कर सकते। ध्यान के द्वारा हम दिमाग को साफ करने और उसमें सभी तरह के विचारों को रोकने पर फोकस कर सकते हैं। जब आप पहली बार ध्यान करने बैठते हैं, तो बस यह देखें कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं? क्या आप व्यस्त, थके हुए या चिंतित हैं? आप जो भी ध्यान में देख रहे हैं वह सब ठीक है। जब आप ध्यान के दौरान विचार और भावनाओं को उत्पन्न होते देखते हैं, तो आप उन्हें अनुकूल और सकारात्मक रूप में देखेंगे, कठोरता से नहीं।


सुबह ध्यान करना शरीर और दिमाग को लाभ पहुंचाता है और आपके जीवन में कई महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव लाता है। यह बुरे विचारों से मन को साफ करता है और तनाव और चिंता को भी दूर भगाता है। यदि आप चाहें, तो सुबह ‘Dynamic Yoga’ (डायनेमिक योग) की 15 मिनट की प्रैक्टिस से भी शुरुआत कर सकते हैं। यह करना आसान है और कहीं भी किया जा सकता है।
यदि आपको यह ब्लॉग पसंद आया हो, तो लाइक, कमेंट और शेयर करना न भूलें।

5 Easy Home Exercise Tips

Are you spending too much time in the office or working overnight shifts or you are falling tight on money this month? Whatever is the reason, but many of the times arise when we are unable to make it to the gym itself. But as long as you are not using this excuse to skip your exercise, you are actually golden. Now there is no reason which can actually stop you for building muscles, strengthening and sizing yourself at home. You can train yourself with minimal equipment or even just the body weight sessions are more than enough to put your body to the desired shape. These simple forms of exercises help you out staying on track no matter where you are. Using these versatile moves, you can develop a comprehensive at home work out which fits your abilities and meet your fitness goals.

In this article, you will actually be taken through a series of convenient choices for exercising at your own home.

1. Push-ups –

This may appear to you as an old school gym idea but it the classic push-ups which give you a lot. In fact, it works on almost each and every muscle of the body and assists you in strengthening the chests, arms and also core at the same time. So, now here is a goal for you.10 to 15 minutes of push-ups each and every day by the end of this season. And don’t fear you can easily get into it.

2. Chair sit –

Stand with the feet wider than hips. With a tight core, you have to sit on a chair. Try to control the body on the way down itself. Once you touch the chair, just stand up without the movement of feet. Work out up to 30-40 of the chair sits every day. This gentle exercise improves mobility, prevent falls and can be easily performed at home.

3. Classic plank –

You can do it while starting your exercise. It acts as warm up and stabilizes the body muscles. It is also one of the most effective forms of exercise for developing abs along with the development of core strength. Just place forearms on the ground, your elbows down the shoulders and the body forms a straight line from head to feet. Squeeze glutes for engaging core and hold this position. Work out for up to 60-second classic plank a day. Since many of the people have hanging bellies and they want to get rid of it, they can just start their exercise regimen at home with plank which tones the abs.

4. Body weight squats –

Well, you can perform this exercise virtually anywhere without any sort of equipment and limited of the space. Stand with your shoulder width apart with the feet turn out in a slight way. Get on to the knees and stay there all throughout. Now just squat down, sit back and also spread out the knees apart. After descending below the parallel, just drive back up. This functional movement works on almost all leg muscles.

5. Skipping –

This is a simple home-based exercise In fact, it is quite easy to do and fun to do. There are many different types of skipping which can actually be tried like a cross over, back & forward or single leg skipping. This form of exercise leads to the burning of calories and also boosts the rate of heart as well. It leads to an improvement in the cardiovascular system and burns quite an intensive amount of calories within a short duration.


Whether you are too busy to go out to the gym, saving money or you just crave for a convenient workout, exercising at your place can be an easy option for you. You can start with our 15 min Dynamic Breathing technique which you can perform at any time & even at your office as well. Is it a challenge for you to figure out the ways to do it? What if you don’t have much of the space or equipment? You can incorporate a few of the tweaks mentioned in the article in daily routine which helps you to stay on the course itself. So let’s these tips overcome the challenges and inspire you to get a whole lot healthier this season.

घर पर व्यायाम करने के 5 आसान टिप्स:

क्या आप इस महीने ऑफिस में बहुत ज्यादा समय बिता रहे हैं या रात की शिफ्ट में काम कर रहे हैं या पैसे की तंगी से जूझ रहे हैं? कई बार हम ऐसे अनेक कारणों से जिम नहीं जा पाते हैं। अब घर पर ही मसल्स बनाने से, ताकत बढ़ाने या वजन बढ़ाने/घटाने से आपको कोई नहीं रोक सकता! आप खुद को बहुत कम उपकरणों के साथ ट्रेन कर सकते हैं। केवल बॉडी वेट सेशन से भी आप आपके शरीर को जैसे चाहे उस आकार में ला सकते हैं। चाहे आप जहाँ भी हों, व्यायाम के ये सरल रूप आपको पटरी पर रहने में मदद करेंगे। ये स्टेप्स करके, आप आपकी ताकत और आपके फिटनेस टार्गेट के अनुसार, ऐसा वर्क आउट विकसित कर सकते हैं जो घर पर किया जा सकता हैं।

मेरे ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ़) रेसिडेंशियल कोर्स में, मैं पूरा एक दिन स्वास्थ्य पर बात करता हूँ जहाँ अपने शरीर को फिट रखने के बारे में कुछ अद्भुत सीक्रेट सिखाये जाते हैं। इस लेख में, आपको अपने घर पर व्यायाम करने हेतु कुछ बातें बतायी जाएगी। याद रखें, यह जिम जाने का विकल्प नहीं है, लेकिन ये टिप्स तब उपयोगी होते हैं जब आपके पास ज्यादा समय नहीं हैं, आप व्यायाम नहीं कर रहे हैं या किसी कारण से जिम नहीं जा सकते हैं।

1. पुश-अप

यह आपको एक पुराने ज़माने का व्यायाम लग सकता है लेकिन यह पारम्परिक पुश-अप ही है जो आपको तंदुरुस्त बनाता है। यह शरीर की लगभग हर एक मसल पर काम करता है और एक साथ आपको चेस्ट, आर्म्स और कोर को मजबूत बनाने में सहायता करता है। चलिए, आपके लिए एक गोल रखते है: यह सीजन खत्म होने तक प्रत्येक दिन 5 मिनट पुश-अप करना।

2. चेयर सिट

कूल्हों की दूरी से ज्यादा दूर तक पैर फैलाकर खड़े हो जाइये। टाइट कोर के साथ, कुर्सी पर बैठ जाइये। शरीर को निचे की तरफ ले जाते समय ही उसे नियंत्रित करने का प्रयास करें। एक बार जब आप कुर्सी को छूते हैं, तो बस पैरों को हिलाए बिना खड़े हो जाइये। हर दिन 30-40 चेयर सीट्स करें। यह आसान व्यायाम गतिशीलता में सुधार लाता है, हमें गिरने से रोकता है और आसानी से घर पर किया जा सकता है।

3. क्लासिक प्लांक

आप अपना व्यायाम शुरू करते समय इसे कर सकते हैं। यह वार्म अप के रूप में काम करता है और शरीर के मसल्स को स्थिर करता है। यह कोर ताकत के साथ-साथ एब्स विकसित करने का एक अच्छा तरीका है। ज़मीन पर हाथों को कोहनी तक रखें, आपकी कोहनियाँ कंधों से नीचे हो और शरीर सिर से पांव तक एक सीधी रेखा बनाता हो। कोर को बनाने के लिए कूल्हों पर दबाव डालें और इसी स्थिति में रहें। दिन में 60 सेकंड तक क्लासिक प्लैंक करें। चूँकि बहुत से लोगों के पेट बाहर निकले होते हैं और वे इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, इसलिए वे घर पर ही प्लांक के साथ अपना व्यायाम शुरू कर सकते हैं। यह एब्स को टोन करती है।

4. बॉडी वेट स्क्वैट्स

आप यह व्यायाम बिना किसी उपकरण और जगह की कमी के बिना कहीं भी कर सकते हैं। अपने कंधों को चौड़ा कीजिये और खड़े हो जाइए। साथ ही पैरों को हल्का सा बाहर की ओर मोड़ दें। घुटनों तक बैठें और पूरा समय ऐसे ही रहें। अब निचे जाइये और घुटनों को भी अलग कीजिये। पैरेलल निचे आने के बाद, अब वापस खड़े हो जाइये। यह व्यायाम पैरों के लगभग सभी मसल्स पर काम करता है।

5. रस्सी कूदना

यह बहुत ही आसान व्यायाम है जिसे आप घर पर कर सकते हैं। रस्सी कूदना काफी आसान और मजेदार है। कई अलग-अलग प्रकार के स्किपिंग हैं जिन्हें किया जा सकता है जैसे क्रॉस ओवर, आगे-पीछे कूदना या एक पैर पर रस्सी कूदना। यह व्यायाम कैलोरी जलाती है और दिल के वेग को भी बढ़ाती है। यह कार्डियोवास्कुलर सिस्टम में सुधार लाती है और कम समय में काफी मात्रा में कैलोरी को जला देती है।

एक बोनस टिप: 15-मिनट के ‘डायनामिक योग’ से शुरू करें। यह प्राणायाम, स्ट्रेच और ध्यान का मेल-मिलाप है जो आप कहीं भी कर सकते है, आपके ऑफिस में भी!
चाहे आप बिजी होने के कारण जिम नहीं जा सकते हैं, पैसे की बचत कर रहे हैं या आप कोई ऐसा व्यायाम करना चाहते हैं जो आपके लिए सुविधाजनक हो, तब अपनी जगह पर ही व्यायाम करना आपके लिए एक आसान विकल्प हो सकता है। लेख में बताए गए कुछ ट्विक्स को आप अपने हर दिन की दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। यह आपको मैदान में बने रहने में मदद करेगा। तो चलिए, आशा करते हैं कि ये सुझाव आपको इस सीजन में चुनौतियों से उबरने और पूरी तरह से स्वस्थ होने की प्रेरणा दें।
यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो जरुर लाइक, कमेंट और शेयर करें।

Are you constantly complaining ?

Why constant complaining is lethal for you?

Life can sometimes be extremely stressful. We constantly face a lot of challenges in our day to day lives that add to the stress. This sometimes makes us enter into the complaining mode. We start complaining constantly to our family members, friends, colleagues and even to the strangers whom we meet in the elevators. We will see millions of people actually complaining about everything or just nothing for all. The Gilbertson cited that people who accept bad things in their lives have a much better prospect of happiness than one who doesn’t.

Of course, constant complaining influences mental health in a negative manner. It is contagious too and drives others to negative emotions as well. Even by getting surrounded by the bad-mouthed pals, we tend to solidify our negative thoughts. Due to an inherent tendency of humans towards empathy, they are subconsciously trying out the similar emotions which their friends might have experienced. But what many of the people don’t realize is that the way we complain has huge implications on our mental health and lives. The participants of my ‘Change Your Life’ workshop create a breakthrough when they simply avoid this one negative habit of constant complaining.

Let’s find out how venting is actually making the things quite worse for you.

Here are a few of the negative implications of constant complaining.

1) Adds to stress

When you are complaining about anything, you are trying to relive whatever is actually upsetting you. Thus it makes sense that the constant habit might stress you right out there. A licensed professional counsellor claims that this is related to the hyperaroused state which many of the people might enter during their venting session. Well, it is all right to be keyed up in this state once in a while but indulging in such behaviour regularly may take a toll of your health.

2) Enhances negativity

The constant complaining actually trains the body to enter into the vicious of the stress cycle and also negativity which is of course not good for the health. When the negative thoughts hit the brain hard, it actually reinforces the automatic response which triggers more of the negative thoughts. In this way, we are actually putting ourselves into the cycle of abuse.

3) Might ruin relationships

When we go through the tough times in our lives, it is our loved ones that offer constant support. But it is extremely crucial for you to stop complaining before you realize that you have actually abused the generosity as well as the care of your family and friends. It might be possible that due to constant complaining some of the friends might feel burnt out and pushed away.

4) Complaining is bad for health

Well, it is not a sort of exaggeration to claim that chronic complaining affects a person’s health. When we complain, our bodies release a stress hormone called cortisol. This hormone enters the body into the fight or flight mode which increases the blood pressure, sugar level and makes our body susceptible to an increase cholesterol level, diabetes and also heart problems. Well, our brain becomes quite vulnerable to the strokes too.

5) Slow burn

What many of us don’t realize is that the constant complaining doesn’t manifest our issues straight away. Just like a clock itself the same issue just tick and move on. There is also a slight neurological transformation each and every time. Just imagine tearing out a page from your dictionary. The dictionary may contain hundreds and thousands of pages but when you actually rip of one it becomes lesser and lesser. This is what you are essentially doing with the brain as well when you are constantly complaining and entering your brain into the negativity. Tearing single page at a time doesn’t seem to manifest a serious issue at all but when the same act is repeated years after years, it transforms the brain and its elements showcasing damage.


Just like excessive smoking or drinking even the complaining is bad for us. Save yourself and your loved ones from further misery by looking for cleaner solutions to the problems and adopting a self-regulation strategy. Try to resolve the issues that are troubling you. The better you actually turn towards avoiding the negativity, rage or anxiety, the healthier you will become in the overall haul.

Like, comment and share this blog with others. And if you’d like to get more of such tips, watch my FREE ‘Dynamic Yoga’ program on YouTube.

क्या आप लगातार शिकायत करते रहते हैं?

जीवन कभी-कभी बहुत तनावपूर्ण हो सकता है। हम अपने हर रोज के जीवन में बहुत सी चुनौतियों का सामना करते हैं जो तनाव को बढ़ाते हैं। यह कभी-कभी हमें शिकायत करने की स्थिति में ले जाता है। हम अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों, सहकर्मियों और यहां तक कि उन अजनबियों से भी शिकायत करना शुरू कर देते हैं जिनसे हम अभी-अभी लिफ्ट में मिले हैं। हम लाखों लोगों को हर चीज के बारे में शिकायत करते पाएंगे या यूँही किसी भी चीज को लेकर शिकायत करते देखेंगे। गिल्बर्टसन ने कहा हैं कि जो लोग अपने जीवन में बुरी चीजों को स्वीकार नहीं करते हैं, उनकी तुलना में बुरी चीजे स्वीकार करने वालों के पास खुश होने के ज्यादा मौके होते है।

लगातार शिकायत करना हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। यह नकारात्मक भावना फैलती है और दूसरों में भी नकारात्मकता भर देती है। यहां तक कि गाली-गलौच करनेवाले दोस्तों से घिरे रहने से भी हम अपने नकारात्मक विचारों को मजबूत करते हैं। मनुष्यों में, स्वाभाव से ही सहानुभूति की प्रवृत्ति होती है। इस कारण, वे अवचेतन रूप से समान भावनाओं को आज़माते हैं जो उनके दोस्तों ने अनुभव किया होगा। लेकिन बहुत से लोगों में यह समजदारी नहीं है कि हमारे शिकायत करते रहने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य और जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। मेरी ‘Change Your Life’ (चेंज योर लाइफ़) कार्यशाला के प्रतिभागी, लगातार शिकायत करने की इस एक नकारात्मक आदत से जब बचते हैं तब खुद में वे बहुत बड़ा बदलाव लाते हैं।

चलिए, जानते है कि उत्तेजनाओं को बाहर निकालने से आपके लिए चीजें कैसी और बुरी बनती है।

लगातार शिकायत करते रहने की आदत के कुछ बुरे प्रभाव यहां दिए गए हैं।

1) तनाव बढ़ाता है

जब आप किसी भी चीज़ के बारे में शिकायत करते हैं, तो आपको जो भी चीजें परेशान कर रही हैं, आप उसे फिर से अनुभव करते हैं। इस प्रकार लगातार परेशान रहने की यह आदत आपको तनाव में डाल सकती है। एक लाइसेंस प्राप्त पेशेवर काउंसलर/ सलाहकार का दावा है कि यह स्थिति उस अवस्था जैसी है जो कई लोग अपने गुस्सा निकालने के दौरान अनुभव करते हैं। कभी-कभार किसी एक समय के लिए यह स्थिति महसूस करना सही है, लेकिन नियमित रूप से इस तरह के व्यवहार में डूबे रहने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

2) नकारात्मकता को बढ़ाता है

हमेशा शिकायत करना शरीर को, तनाव और नकारात्मकता के दुष्चक्र में डालता है, जो निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। जब नकारात्मक विचार दिमाग पर जोर से वार करते हैं, तो यह अपने आप नकारात्मक विचारों की एक कड़ी शुरू कर देता है। इस तरह, हम खुद को हानि पहुँचाने के चक्कर में डालते हैं।

3) संबंधों को बर्बाद कर सकता है

जब हम अपने जीवन में कठिनाईयों से गुजरते हैं, तो हमारे प्रियजन हमें हमेशा मदत करते हैं। आपने अपने परिवार और दोस्तों के प्यार, उदारता और देखभाल का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए। इसलिए आपने शिकायत करना बंद करना बहुत जरुरी है। लगातार शिकायत के कारण कुछ दोस्त थककर आपसे दूर चले जा सकते है।

4) शिकायत करना सेहत के लिए बुरा है

खैर, यह एकदम पक्का है कि हमेशा शिकायत करते रहने से व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ता है। जब हम शिकायत करते हैं, तो हमारा शरीर कोर्टिसोल नामक एक तनाव हार्मोन को शरीर में छोड़ता हैं। यह हार्मोन हमारे शरीर को ऐसी अवस्था में ले जाता है जो ब्लड प्रेशर और शुगर के स्तर को बढ़ाता है। यह कोलेस्ट्रॉल का स्तर, डायबिटीज और हृदय की समस्याओं को बढ़ाने के लिए हमारे शरीर को तैयार करता है। हमें दिमाग का स्ट्रोक भी हो सकता है।

5) धीरे-धीरे कमजोर होना

हममें से कई लोगों को यह समझ में नहीं आता कि लगातार शिकायत करने से हमारे मुद्दे सीधे सामने नहीं आते हैं। किसी घड़ी की तरह ही एक मुद्दा बस टिक-टिक करता है और आगे बढ़ता है। लेकिन हर बार एक मामूली न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) परिवर्तन भी होता है। आप अपने शब्दकोश (डिशनरी) से एक पन्ना फाड़ने की कल्पना कीजिये। एक शब्दकोश में सैकड़ों और हजारों पेज हो सकते हैं लेकिन जब आप एक-एक पन्ने को फाड़ते जाते हैं तो आपकी डिशनरी कम-कम होती जाती है। जब आप लगातार शिकायत करते हैं और अपने दिमाग को नकारत्मकता में ले जाते हैं तब आप बस यहीं करते हैं। एक समय में एक पन्ना फाड़ना बिल्कुल भी नुकसान नहीं करता है, लेकिन जब आप एक ही काम को वर्षों तक करते रहते हो, तब उसका असर दिखता है। उसी तरह हमेशा शिकायत करते रहना, दिमाग और उसके तत्वों को नुकसान पहुंचाता है।

निष्कर्ष (पाठ)

जैसे बहुत अधिक धूम्रपान करना या शराब पीना हमारे लिए बुरा है, उसी प्रकार अधिक मात्रा में शिकायत करना भी हमारे लिए हानिकारक है। समस्याओं के अच्छे समाधान की तलाश करें। खुद को नियंत्रण में रखने की नीति अपनाकर अपने आप को और अपने प्रियजनों को अधिक दुख से बचाएं। उन मुद्दों को हल करने की कोशिश करें जो आपको परेशान कर रहे हैं। जितना आप नकारात्मकता, क्रोध या चिंता से बचने की कोशिश करते हैं उतना अच्छा है, क्योंकि ऐसा करने से आप संपूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएंगे।

इस ब्लॉग को अन्य लोगों के साथ लाइक, कमेंट और शेयर करें। अगर आप इस तरह के और टिप्स पाना चाहते हैं, तो YouTube पर मेरा ‘Dynamic Yoga’ (डायनामिक योगा ) कार्यक्रम मुफ़्त में देखें।

How Comparison Can Damage Your Brain

This post is for all those who at some point in their lives have stood second and were made to feel bad. Where does this come from? From comparisons. Why couldn’t you come first? Well, don’t bother to answer. You are first in your own right. Today we are going to talk about how comparisons damage, not just your self-respect, but also your brain! It is killing your brain cells, and you might as well realize it now!

Drawing comparisons is the easiest thing to do. You look at two good things and pin it against each other and get no new conclusions. Your brain should be doing something innovative and creative, but instead, it is stuck in making comparisons! Whether you realize it or not, but such comparisons will only make you unhappy. You will never be good enough! It is a toxic behavior which will constantly nag your mind. Soon, subconsciously, you will begin to feel like you were never good enough! How will your brain ever generate new ideas if you keep feeding it such negativity? And how will you see your life change? What you think is who you are. It is simple; thoughts become things. If you feed your mind negativity, what else will your life manifest but unfavorable circumstances? This is the predominant thing we discuss during my FREE ‘Change Your Life’ seminar.

Here, it is important to mention that being competitive & being comparative are two different things altogether. Competitive people learn from others’ failures or successes. They don’t compare how different their life would be with/without someone else’s success or failure. Comparative people tend to feed their brain with comparisons that lead to delusions. They lose sight of what is essential in life and begin to chase perfectionism. With time, this leads to stress & anxiety and a sincere lack of confidence in your own abilities. Soon, despite full capabilities, you will sink lower in life and never seek new opportunities for yourself.

Imagine your brain to be like a piece of machinery. Machines need to be well-oiled & get regular maintenance for proper functioning. If you keep using machines endlessly & tirelessly, it will give up well before it should. Incessant comparing does the same to your brain. It tires it down and snatches away room for improvement.

Soon comparison becomes obsessive. It leads you to feel jealous of everyone around you. You turn your friends & allies against you. Soon you stop making efforts for betterment. And this can happen over time without slightest of realizations. Now, the question is – Do you want to stall your life’s progress?

In short, comparing yourself with others is like self-destruction. You are purposely putting yourself through emotional damage which is affecting your brain, thoughts & thus your life. Even the ones who are best at what they do sometimes feel like they are inadequate. But they do not stop making progress in life. And it is important to understand that the ones who are best in their respective fields are so because of many other aspects that you may be unaware about.

In case you are so habituated with making comparisons, do it for further improvement. How much did they work every day? What kind of sacrifices did they make for becoming number 1? What kind of obstacles did they face & how did they overcome them? What are their strengths and weaknesses? How are they continuously honing their skills?

There is always a positive side to every negative habit. You just need to know how to make the switch! You can watch my live recorded workshop in ‘Winning Habits’ DVD and learn how to shift your habits. Hope this discussion throws enough light for you to stop making comparisons. Instead, I hope you learn and are motivated to see others succeed in life!

कैसे किसी के साथ तुलना करना आपके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है

यह पोस्ट उन सभी के लिए है जो अपने जीवन में कभी तो दूसरे स्थान पर रहे हैं और इस कारण उन्हें बुरा महसूस कराया गया था। ऐसा व्यवहार कहां से आता है? तुलना करने से। हमसे पूछा जाता है कि आप प्रथम क्यों नहीं आ सकते थे? खैर, ऐसे प्रश्नों का जवाब देना जरुरी नहीं है। आप अपने आप में तो प्रथम हैं ही। आज हम इस बात पर चर्चा करने जा रहे हैं कि तुलना करने से कैसे न केवल आपके आत्म सम्मान, बल्कि आपके मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचता है! यह आपके मस्तिष्क की कोशिकाओं को मार रहा है और आप इसे अब भी महसूस कर सकते हैं!

तुलना करना सबसे आसान काम है। आप दो अच्छी चीजों को देखते हैं और इसे एक दूसरे के खिलाफ रखते हैं और कोई नया निष्कर्ष नहीं निकलता। आपका मस्तिष्क कुछ नया और रचनात्मक करना चाहिए, लेकिन इसके बजाय, यह तुलना करने में फंस गया है! चाहे आप इसे महसूस करें या नहीं, लेकिन ऐसी तुलना केवल आपको दुखी ही करेगी। आप कभी भी खुश नहीं होंगे! यह ऐसा बुरा व्यवहार है जो लगातार आपके दिमाग को सतायेगा। जल्द ही, मन में, आप महसूस करना शुरू कर देंगे कि आप कभी भी अच्छे नहीं थे! यदि आप इस तरह की नकारात्मकता जारी रखते हैं तो आपका मस्तिष्क कभी भी नए विचार कैसे उत्पन्न करेगा? और आप अपने जीवन में परिवर्तन कैसे देखेंगे? जो आप सोचते हैं वैसे ही बनते है। यह समझना आसान है; विचारों से ही चीज़ें बन जाती हैं। यदि आप अपने दिमाग में नकारात्मक विचार रखते हैं, तो आपके जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों के आलावा और क्या प्रकट होगा? यह महत्वपूर्ण विषय है जिसे हम अपने मुफ़्त ‘चेंज योर लाइफ’ संगोष्ठी के दौरान चर्चा करते हैं।

यहां, यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि प्रतिस्पर्धी होना और तुलनात्मक होना यह पूरी तरह से दो अलग-अलग चीजें हैं। प्रतिस्पर्धी लोग दूसरों की असफलताओं या सफलताओं से सीखते हैं। वे तुलना नहीं करते कि उनका जीवन किसी और की सफलता या विफलता के बिना कितना अलग होगा। तुलनात्मक लोग अपने दिमाग में दूसरों के साथ तुलना करते रहते हैं, जो और कुछ नहीं बल्कि सिर्फ भ्रम पैदा करता हैं। वे जीवन की आवश्यक चीज़ों को देखना भूल जाते हैं और पूर्णता (परफेक्शन) का पीछा करना शुरू करते हैं। धीरे-धीरे, इससे तनाव और चिंता बढ़ती है और खुद की क्षमताओं में आत्मविश्वास की गंभीर कमी आती है। जल्द ही, सारी क्षमताओं के बावजूद, आप जीवन में निचे गिरते जाते हैं और अपने लिए कभी भी नए अवसर नहीं तलाशते।

कल्पना करें कि आपका मस्तिष्क मशीनरी के टुकड़ों की तरह बना है। मशीनों को अच्छी तरह से तेल लगाने और सही ढ़ंग से कार्य करने के लिए नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है। यदि आप मशीनों का बिना रुके लगातार उपयोग करते रहते हैं, तो समय से पहले ही वह काम करना बंद कर देगा। लगातार तुलना करना भी आपके दिमाग को वैसा ही बनाती है। यह इसे थका देती है और सुधार के अवसरों को छीन लेती है।

जल्द ही तुलना करना एक जुनून बन जाता है। यह आपको अपने आस-पास के हर किसी के साथ ईर्ष्या महसूस करने पर मजबूर कर देता है। यह आपको अपने दोस्तों और सहयोगियों को आपके खिलाफ करता हैं। जल्द ही आप सुधार के लिए प्रयास करना बंद कर देते है। यह कब हो जायेगा आपको पता भी नहीं चलेगा। अब, सवाल यह है – क्या आप अपनी जिंदगी में प्रगति को रोकना चाहते हैं?

संक्षेप में, दूसरों के साथ तुलना करना स्वयं का विनाश करने की तरह है। आप जानबूझकर खुद का भावनात्मक नुकसान कर रहे हैं जो आपके मस्तिष्क, विचारों और अंत में आपके जीवन को प्रभावित कर रहा है। यहां तक कि जो बढ़िया कार्य करते हैं, वे भी कभी-कभी ऐसा महसूस करते हैं कि वे पूरी तरह से समर्थ नहीं हैं। लेकिन वे जीवन में प्रगति करना बंद नहीं करते। यह समझना महत्वपूर्ण है कि जो लोग अपने संबंधित क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ हैं वे ऐसे कई अन्य पहलुओं के कारण हैं जिनके बारे में आप अनजान हो सकते हैं।

यदि आपको तुलना करने की इतनी आदत हैं, तो आप इसे और सुधार करने के लिए उपयोग में लाये। वे हर दिन कितना काम करते थे? नंबर 1 बनने के लिए उन्होंने किस तरह के बलिदान किए? उन्होंने किस तरह की बाधाओं का सामना किया और उन्होंने उन्हें कैसे दूर किया? उनकी ताकत और कमजोरियां क्या हैं? वे लगातार अपने कौशल को कैसे बढ़ा रहे हैं? इत्यादि…

हर नकारात्मक आदत का हमेशा सकारात्मक पक्ष होता है। आपको सिर्फ यह जानने की जरूरत है कि कैसे बदले! आप ‘विनिंग हैबिट्स’ DVD डीवीडी में मेरी लाइव रिकॉर्ड की गई कार्यशाला देख सकते हैं और अपनी आदतों को कैसे बदल सकते हैं यह सीख सकते हैं। आशा है कि यह चर्चा तुलना करने से रोकने के लिए आपके लिए उपयोगी होगी। मुझे उम्मीद है कि आप सीखेंगे और दूसरों को जीवन में सफल होते देख खुद भी प्रेरित होंगे!

5 Tips To Develop Healthy Eating Habits

Most people I interact with want to lose weight or get fitter. Sometimes people tell me that in spite of hitting the gym, doing Yoga regularly or getting adequate physical movement, they are unable to see healthy changes in their bodies. If you belong to the same category of people, today’s post is going to be a hard-hitting reality check.

If you think that eating EVERYTHING and, in comparison, doing a lot of exercise will help you lose weight or fat then you are wrong! The food you consume is directly proportionate to your health. Even if you are training frequently but lack control or discipline as far as your eating habits are concerned then this struggle will persist. Instead what you need to do is to start building a healthy eating habit & get adequate physical activity to maintain and/or lose weight or body fat.

1. Eat On Time:

Eating on time is extremely essential for good health. Eating a salad at 1 a.m. does not absolve you of the consequences. Thus, in order to start eating right it is first important that you start eating on time. Most people have amusing eating habits. They tend to have a light breakfast, a heavier lunch & the heaviest dinner. If you eat your heaviest meal an hour before going to bed it defeats the purpose of inculcating a healthy habit. Thus, timing is significant. Try to eat before 10 a.m. & refrain from eating post 8 p.m. This slight change of routine will keep reminding you of how you must eat healthy too!

2. Keep It Colourful:

A key component to ensure that you are eating healthy is to have colourful elements on your plate. This means that you need to incorporate three to four different components in your meal. It could be raita or a salad with veggies & daal with roti etc. But make sure that you have at least three different segments in your meal. If you don’t then it becomes a highly alarming matter which you may need to take care of at the earliest. Instead of thinking about the portions of carbohydrates to proteins to vitamins, check on the component & variety of food on your plate. This way you also tend to eat a moderate amount instead of over-indulging.

3. Local is better:

One of the hugest mistakes we tend to make while shifting our food habits is to go Gourmet, i.e., we instantly look for the American way of making salads & buy foreign foods like quinoa, avocados etc. However, if you want to make a sustainable change in your eating habit then sticking to local food is better. Indian food is also capable of being healthy while giving you your essential nutrients. Also, the food habits of the West are not a benchmark. Their climatic circumstances are quite opposite to ours, so what they eat & consider healthy might not work for us.

4. Learn To Cook:

Once you learn to cook you shall slowly learn the science of understanding which ingredient is healthy & which is not. Once that begins to make sense, you shall automatically become wary of what you put in your mouth. Also, there is a huge myth doing the rounds that diet food needs to be boiled & bland. However, once you learn to cook you shall understand that boiled food does not guarantee health and that there are other non-bland ways of making food that may keep your health wholesome.

5. Try new combinations:

Most people get bored of eating healthy because they eat one or two specified things in an alternate manner. If you keep yourself limited then it is only obvious that you shall get bored. Try to make new combination & be unafraid of trying unconventional ingredients to keep your taste palette in check!

In my premium program ‘Ultimate Life’, I spend one whole day on ‘Health’ where participants get in-depth knowledge of diet and exercise. If you are one of those who want to get healthier, this program is a must for you.

स्वस्थ भोजन की आदतें विकसित करने की 5 युक्तियाँ

जिन लोगों के साथ मैं बातचीत करता हूं उनमें से ज्यादातर लोग या तो वजन कम करना चाहते हैं या और ज्यादा फिट होना चाहते हैं। कभी-कभी लोग मुझे बताते हैं कि जिम में जाने के बावजूद, नियमित रूप से योग करने या पर्याप्त शारीरिक हलचल करने के बावजूद उन्हें अपने शरीर में परिवर्तन नहीं दिखता हैं। यदि आप इन लोगों की श्रेणी के हैं, तो आज की पोस्ट आपके लिए एक रियलिटी चेक होने जा रही है।

यदि आपको लगता है कि सब कुछ खाने से और बहुत व्यायाम करने से आपका वजन या फैट कम हो जायेगा तो आप गलत हैं! जो खाना आप खाते हैं उसका आपके स्वास्थ्य से सीधा रिश्ता है। यदि आप अक्सर व्यायाम करते हैं लेकिन आपकी खाने की आदतों पर नियंत्रण या अनुशासन की कमी है तो यह संघर्ष जारी रहेगा। इसके बजाय आपको स्वस्थ खाने की आदत बनाने और वजन या शरीर के फैट को बनाए रखने और / या खोने के लिए पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी करने की आवश्यकता है।

1. समय पर खाएं:

समय पर भोजन अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। रात एक बजे सलाद खाने से आप परिणामों से दोषमुक्त नहीं होते है। इस प्रकार, सही से खाना शुरू करने के लिए पहली शर्त यह है कि आप समय पर खाना खाएं। अधिकांश लोगों में खाने की मनोरंजक आदतें होती हैं। वे हल्का नाश्ता, भारी भोजन और उससे भी भारी रात का खाना खाते है। यदि सोने से एक घंटा पहले आप अपना सबसे भारी भोजन करते हैं तो यह कोई अच्छी आदत नहीं है। इस प्रकार, समय महत्वपूर्ण है। रात के 10 बजे से पहले खाना खाने की कोशिश करें। हो सके तो रात के 8 बजे के बाद खाने से बिलकुल बचें। दिनचर्या में यह मामूली परिवर्तन आपको याद दिलाएगा कि आपको स्वस्थ कैसे खाना चाहिए!

2. खाने को रंगबिरंगी रखें:

आप स्वस्थ भोजन कर रहे हैं या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि, आपकी प्लेट पर अलग-अलग रंग के खाने होने चाहिए। इसका मतलब है कि आपको अपने भोजन में तीन से चार अलग-अलग चीजों को शामिल करने की आवश्यकता है। यह रायता या सलाद के साथ सब्जियां और दाल के साथ रोटी इत्यादी हो सकता है। लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आपके भोजन में कम से कम तीन अलग-अलग प्रकार हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो यह अच्छा नहीं है और आपको इसे जल्द से जल्द बदलने की आवश्यकता है। कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रोटीन और विटामिन के हिस्सों के बारे में सोचने के बजाय, अपनी प्लेट पर परोसे गए भोजन के विभिन्न चीजें और प्रकार की जांच करें। इस तरह आप अधिक खाने के बजाय ठीक-ठाक भी खाते हैं।

3. स्थानीय चीजें बेहतर है:

हमारी खाद्य आदतों को बदलते समय हम जो गड़बड़ी करते हैं, उनमें से एक है पेटू हो जाना, यानी, हम तुरन्त अमेरिकी तरीके से सलाद बनाने और क्विनोहा, एवोकैडो इत्यादि जैसे विदेशी खाद्य पदार्थ खरीदने में लग जाते हैं। हालांकि, अगर आप अपनी खाने की आदत में पक्का परिवर्तन करना चाहते हैं तो स्थानीय खाना खाना बेहतर है। भारतीय भोजन आपको आवश्यक पोषक तत्व देने के साथ-साथ स्वस्थ भी रखने में सक्षम है। इसके अलावा, पश्चिम की खाद्य आदतें स्वस्थ खाने की कोई मानदण्ड नहीं हैं। उनकी जलवायु परिस्थितियां हमारे विपरीत हैं, इसलिए वे जो खाते हैं और स्वस्थ मानते हैं, वे हमारे लिए काम नहीं कर सकते।

4. खाना पकाना सीखें:

जब आप खाना बनाना सीखेंगे तो धीरे-धीरे आपकी समझ में आ जायेगा कि कौन सी चीज स्वस्थ है और कौनसा नहीं है। एक बार जब यह समझने लगता है, तो आप अपने मुंह में जो कुछ भी डालते हैं, उसके बारे में सावधान रहेंगे। इसके अलावा, यह एक बड़ी गलत धारणा है कि डाइट वाला खाना उबला हुआ और स्वादहीन होना चाहिए। जब आप खाना बनाना सीखेंगे तो आप समझ जाएंगे कि उबला हुआ भोजन स्वास्थ्य रहने की गारंटी नहीं देता है और भोजन बनाने के अन्य अच्छे तरीके हैं जो आपके स्वास्थ्य को अच्छा रख सकते हैं।

5. खाने में नए-नए चीजों के मेल-मिलाप (कॉम्बिनेशन्स) को आजमाएं:

ज्यादातर लोग स्वस्थ खाने से ऊब जाते हैं क्योंकि वे तय की हुई एक या दो चीजों को ही उलट-पलटकर खाते हैं। यदि आप अपने आप को सीमित रखते हैं तो आप ऊब जाएंगे। खाने में नए-नए चीजों के मेल-मिलाप (कॉम्बिनेशन्स) बनाने की कोशिश करें और स्वाद के लिए अपरंपरागत सामग्री और मसालों का उपयोग करने से ना डरें!

मेरे कार्यक्रम ‘अल्टीमेट लाइफ’ में, मैं एक पूरा दिन ‘स्वास्थ्य’ पर खर्च करता हूं जहां सहभागियों को आहार और व्यायाम का गहरा ज्ञान दिया जाता हैं। यदि आप उनमें से एक हैं जो स्वस्थ होना चाहते हैं, तो यह कार्यक्रम आपके लिए बहुत जरूरी है।