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What is the one thing all of us are running out of in today’s era? Time. The world is whirring all around us because everyone is in a hurry and there is no time. And because of this unnecessary hurry, all of us are ignoring our natural instincts. All of us are trying to crunch as many activities as possible in just 24 hours forgetting the true purpose of our lives. Are we meant to only run and not stop, reflect and make better choices for ourselves? The only way to gain back our natural behavior is by looking at nature and how it reacts to changing circumstances. Which is why today’s discussion is about how there are some very important things we can learn from nature.

One of the most essential things that we need to incorporate from nature is its way of recovering from destruction. Everyone including the nature around us goes through damage. Although for us it is both physical as well as emotional damage. Nevertheless what is important is how nature tends to repair itself on its own. We on the other hand are constantly dependent on external factors in order to go back to our normal selves. This does more damage to us. We become restless and try all kinds of methods to bring back our mood or energy level to what it usually is – although all we really need to do is identify the changes that we are going through (both physically and/or emotionally) and accept it as something normal or organic. It becomes extremely empowering once we get such control over our lives. No external effort needs to be applied. If we begin to repair our own selves emotionally (quite like nature), no extreme situation shall be able to disturb us. We shall learn to become more dynamic and adjusting according to the changing circumstances.

One huge problem that keeps us from such repairing is our lack of patience. This again is a very significant quality of nature, i.e., the ability to breathe through difficult situations. It is so easy and hassle-free. You don’t really have to do anything just remember to breathe especially when you are feeling uncomfortable due to any specific changes in your life. Have you tried my 15-minutes process of ‘Dynamic Breathing’? These breathing techniques shall help you be more patient. It shall remind you that you do not have to act impulsively. You can take all the time that you need.

By now, I am sure you have understood that it is the law of nature to go at your own pace. There is no hurry, no race. What you already have and will receive later is being determined by you at this very moment – so all you need to take care of is your own self – by not running in a rat race but by leading yourself to a position where you can take controlled decisions in your favor. Trust yourself and work at things at your own pace and by listening to your own self. For which it is important to reflect at your choices – go back in time and look at your previous mistakes and how different they could be if you listened to your heart and not your head. Because that’s what nature does. All its thinking is done through the heart and not the mind. The first instinct that most of us have is generally of the heart – but when we take that instinct and doubt it is what lands us into trouble. I explain this idea in more detail in my advance programs like ‘Awakening’ or ‘Ultimate Life’.

And when trouble comes nature is able to handle it in a much better way than us. For example birds in the West migrate themselves to a warmer country slowly and steadily upon sensing the very first signals of winter. They do not wait for winter to come and settle down. But us? We invite trouble and let it settle down and pressure us to a point of frustration and then device a plan for handling it. We should be ready for anything and everything coming at us. You should be highly prepared – because problems won’t knock at your door before coming in.

In conclusion, the easiest point to remember is that nature is simple. It does not invite complications and is very easy even during complex circumstances. That is how you want to live your life too especially if you are the kind of person who stresses and is full of anxiety.

क्या आपने प्रकृति से ये सीखा है?

इस युग में कौनसी चीज तेजी से कम हो रही है? समय! दुनिया हमारी चारों ओर घूम रही है क्योंकि हर कोई जल्दी में है और हमारे पास कोई समय नहीं है। इस अनावश्यक भागदौड़ के कारण, हम सभी हमारे प्राकृतिक प्रवृत्तियों को अनदेखा कर रहे हैं। हम सभी अपने जीवन के सही उद्देश्य भूलकर 24 घंटों में जितना ज्यादा संभव हो उतना काम करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या हम बगैर रुके केवल भाग दौड़ करने और सोचने तथा अपने लिए अच्छी चीजे चुनने के लिए बने है? प्रकृति को देखकर और जानकार की बदलती परिस्थितियों में वह कैसी प्रतिक्रिया देती है, हमारे प्राकृतिक व्यवहार को वापस पाने का एकमात्र तरीका है। यही कारण है कि आज की चर्चा इस बारे में है कि प्रकृति से कुछ महत्वपूर्ण चीजें हम कैसे सीख सकते हैं।

सबसे आवश्यक चीजों में से एक, जिसे हमें प्रकृति से सिखने की आवश्यकता है – वह है विनाश से ठीक होने का तरीका। हम देखते है की हमारे चारों ओर प्रकृति के साथ-साथ हर किसी का कुछ न कुछ नुकसान हो रहा है। हालांकि हमारे लिए यह भौतिक और भावनात्मक क्षति, दोनों है। फिर भी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रकृति खुद को कैसे सुधारती है। दूसरी ओर हम अपने आप को सामान्य करने के लिए बाहरी कारकों पर लगातार निर्भर रहते हैं। यह हमें अधिक नुकसान पहुंचाता है। हम बेचैन हो जाते हैं और हमारी सामान्य मनोदशा या ऊर्जा स्तर को वापस लाने के लिए हर कोशिश करते हैं। हालांकि हमें वास्तव में शारीरिक और भावनात्मक दोनों, परिवर्तनों की पहचान करना है जो हममें हो रहे हैं। इसे सामान्य या जैविक रूप में स्वीकार करना है। जब हम अपने जीवन पर इस तरह का नियंत्रण प्राप्त करते हैं तो यह बहुत मजबूत हो जाता है। कोई बाहरी प्रयास लागू करने की जरूरत नहीं होती है। अगर हम प्रकृति की तरह की अपने आप को भावनात्मक रूप से सुधारना शुरू करते हैं, तो कोई भी बुरी स्थिति हमें परेशान नहीं कर सकती। हम बदलती परिस्थितियों के अनुसार अधिक गतिशील और अनुकूल होना सीखेंगे।

हमारे धैर्य की कमी एक बड़ी समस्या है जो हमें सुधरने से रोकती है। प्रकृति का दूसरा बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है धैर्य। यानी, मुश्किल परिस्थितियों का आराम से सामना करना! धैर्य रखना बहुत आसान है। इसमें कोई परेशानी नहीं होती है। खासकर जब आप अपने जीवन में किसी भी विशिष्ट बदलाव के कारण असहज महसूस कर रहे हैं तब आपको वास्तव में कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं होती है, इतनी आराम से उसका सामना कीजिये जैसे की आप साँस ले रहे हो। क्या आपने मेरी 15-मिनट की “डायनामिक ब्रीथिंग” (Dynamic Breathing) प्रक्रिया की है? श्वास की यह तकनीक आपको अधिक धीरज रखने में मदद करेगी। यह आपको याद दिलाएगी कि आपको आवेगपूर्ण होकर काम करने की आवश्यकता नहीं है। आप आराम से वह काम कर सकते हैं।

मुझे विश्वास है कि अब आप समझ गए हैं कि यह अपनी गति से काम करना प्रकृति का कानून है। कोई जल्दी नहीं है, कोई दौड़ नहीं है। जो आपके पास पहले से है और जो बाद में मिलनेवाला है, वह इस समय आपके द्वारा निर्धारित किया जा रहा है। इसलिए आपको केवल अपनी खुद की देखभाल करने की ज़रूरत है – चूहे की दौड़ में शामिल होकर नहीं लेकिन खुद को उस स्थिति में ले जाकर जहां आप आपके पक्ष में निर्णय ले सकते हैं। आप अपने आप पर भरोसा करें और अपनी गति से खुद के दिल की सुनकर चीजों पर काम करें। उसके लिए आपके विकल्पों पर सोचना महत्वपूर्ण है। बीते समय के बारे में सोचे और अपनी पिछली गलतियों को देखें। सोचिये की यदि आप अपने दिल की बात सुनते न कि आपके दिमाग की तो चीजे कितनी अलग हो सकती थी। क्योंकि प्रकृति भी ऐसा ही करती है। उनकी सारी सोच दिल के माध्यम से होती है न कि दिमाग से। आमतौर पर हम में से अधिकांश लोग पहली बार दिल से ही सोचते है। लेकिन जब हम उस पर संदेह करते हैं तब यह हमें परेशानी में डाल देता है। मैं इस विचार को ‘अवेकनिंग’ ( Awakening) या ‘अल्टीमेट लाइफ’ (Ultimate Life) जैसे अपने अग्रिम कार्यक्रमों में अधिक अच्छे से समझाता हूं।

जब परेशानी आती है तब प्रकृति उसे हमसे बेहतर तरीके से संभालती है। उदाहरण के लिए पश्चिम में पक्षी जब सर्दीयों के पहले संकेतों को महसूस करने लगते है तब वे धीरे-धीरे किसी गर्म देश में स्थानांतरित होने लगते है। वे सर्दियों के पूरी तरह आने का इंतजार नहीं करते हैं। लेकिन हम? हम परेशानी को आमंत्रित करते हैं और इससे निराश होते है और फिर उसे दूर करने की योजना बनाते हैं। हमने हमारी ओर आनेवाली हर बात के लिए तैयार रहना चाहिए। आपको पहले से ही तैयार रहना चाहिए – क्योंकि समस्याएं आने से पहले आपके दरवाजे पर दस्तक नहीं देगी।

अंत में, यह पक्का याद रखे कि प्रकृति सरल है। यह जटिल परिस्थितियों के दौरान जटिलताओं को आमंत्रित नहीं करती और बहुत आराम से रहती है। यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो तनाव और चिंता से भरे हुए हैं तब आपने इस तरह का जीवन जीना चाहिए।

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