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I was at Naturopathy Centre conducting 4-days Camp ‘Ultimate Life’ where one of the participants asked me about his ever-bothering issue with his father. Every other sentence he said was, “But he never understands me.” Most of the teenagers or even young-adults that I interact with on a daily basis have this common issue. This post is targeted at catering to the sometimes (or for some people ‘often’) straining relationship that we share with our parents. Now the first way to diffuse this tension or stress is to know that having an unsure equation with your parents is NORMAL, i.e., EVERYONE GOES THROUGH IT.

So once you generalize this problem, you shall be able to look at its solution very objectively too. The major reason for a see-saw like a relationship that we have with our parents is because of the obvious generational gap. They belong to a generation we know too little or sometimes nothing about. This is a fact, not an excuse for you to build problems with your parents. You cannot cite ‘generational gap’ as a problem or an issue that you share with your parents. The only way to deal with it is to accept it. Of course, there’s a generational gap and that’s what makes it beautiful in the first place!

The problem actually arises when this generational gap leads to a lack of communication between you and your parents. This is when you will begin to feel like your parents don’t understand you. But for once, why don’t you take the responsibility for this problem and then look at the said issue in a new light? Have you ever tried to rationally convey your point of view in front of them? Why does it ALWAYS have to be an intense argument or a fight? Why can’t it be a conversation? A relationship is always built upon both parties working equally hard at it. So by rebelling if you think that you are doing your part of the job, then you are highly mistaken!

Learn to talk often. By talking I mean having meaningful conversations. Talk about your interests actively with your parents instead of only sharing them with your close friends. This is the problem. All of us are so comfortable with being our true selves only with our friends that we don’t take our parents seriously or our parents don’t actually understand/know who we truly are. So instead of talk about your likes, dislikes, favorites, failures, problems within your friends’ circle etc. with your parents. A huge part of correct communication is also active listening. So don’t just rant about your things to your parents, but also listen to them when they are talking instead of ignoring. Sometimes our parents tend to keep their emotions inside, so when you feel like they are not telling you everything, take the responsibility of asking them questions. This could be something as simple as asking them about how their day went!

The generation gap will always be a victim unless you do something about it. Take interest in what they like such that they take interest in what you do as well. Make your parents a part of your new world with your new technologies and social media. Teach your parents certain things that might interest them and in turn, you shall be surprised at how fun-loving they tend to become. Of course, this too is a two-way street. So let them also teach you certain things that solely belong to their generation, and learn those things with equal interest. Don’t make them feel like they don’t belong! This is the simplest way to spend quality time together!

One significant loophole that exists in the relation we have with our parents is that we don’t think before we speak! This is why sometimes we hurt our parents unintentionally, even if sometimes we are right! This is extremely important during disagreements – to think before speaking. Disagreements should lead to debates and discussions and NOT fights and quarrels. So learn to eat up your words once in a while especially if it can save you the trouble of an argument! Also, it might seem idealistic but take their advice. They are more experienced in life and even though their generation/methods seem outdated, sometimes they tend to work! Don’t make them feel unworthy. Listen and heed to their advice.

You can choose to read my book ‘Formula for Students’ and gift ‘Formula for Parents’ book (Available in Gujarati & English as well) to your mom-dad for a loving and harmonious relationship.

These are some of the very basic mistakes that we commit and then feel a sincere emotional gap between us and our parents. It is just about shifting that perspective and changing certain basic habits to feel oneness again. And it is okay to fight once in a while, it is NORMAL. That’s what makes you a family. Don’t dramatize it, learn from it and make continuous efforts to ensure that your relationship is a healthy one!

अगर आप महसूस करते हैं की आपके माता-पिता आपको समझते नहीं है, तो इसे पढ़िए


मैं 4 दिनों के शिविर ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ) आयोजित करने वाले नेचुरोपैथी सेंटर में था, जहां सहभागियों में से एक ने मुझे उनके पिता के साथ उन्हें हमेशा चिंतित करनेवाले मुद्दे के बारे में पूछा। बातचीत में हर दूसरे वाक्य के बाद वे कहते, “लेकिन वे मुझे कभी समझते नहीं है।” जिनसे मैं रोज बातचीत करता हूं, उन अधिकांश किशोर या युवा-वयस्कों का यह आम मुद्दा है। यह पोस्ट उन लोगों के लिए है जो कभी-कभी (या कुछ लोग ‘अक्सर ‘) अपने माता-पिता के साथ तनावपूर्ण संबंध साझा करते हैं। अब इस तनाव या दबाव को दूर करने का पहला तरीका यह जानना है कि आपके माता-पिता के साथ आपका अनिश्चित समीकरण होना सामान्य है, यानी, हर कोई इसका सामना करता है।

तो एक बार जब आप इस समस्या को सामान्य बनाते हैं, तो आप इसके समाधान को बहुत ही सहजता से देख पाएंगे। स्पष्ट रूप से, हमारे माता-पिता के साथ खट्टे-मीठे संबंधों का मुख्य कारण है हमारे माता-पिता के साथ जनरेशन गैप (पीढ़ी का अंतर)। वे उस पीढ़ी के हैं जिनके बारे में हम बहुत कम जानते हैं या कभी-कभी कुछ भी नहीं जानते। यह एक तथ्य है, आपके माता-पिता के साथ समस्याएं पैदा करने का बहाना नहीं। आप अपने माता-पिता के साथ साझा करने वाले किसी समस्या या विवाद को ‘पीढ़ी के अंतर’ के रूप में सामने नहीं ला सकते। इसका निपटारा करने का एकमात्र तरीका है इसे स्वीकार करना। जनरेशन गैप तो होता ही है, यह सच है और यही कारण है जो इसे सुंदर बनाता है!

वास्तव में समस्या तब उत्पन्न होती है जब इस जनरेशन गैप के कारण से आप और आपके माता-पिता के बीच बातचीत की कमी होती है। तब आप महसूस करना शुरू कर देंगे की आपके माता-पिता आपको समझते नहीं हैं। लेकिन एक बार, आप इस समस्या की ज़िम्मेदारी क्यों नहीं लेते और फिर इस मुद्दे को एक नई रोशनी में देखते? क्या आपने कभी तर्कसंगत रूप से उनके सामने अपनी बात रखने की कोशिश की है? आपस में हमेशा एक गहन तर्क या लड़ाई क्यों होनी चाहिए? वार्तालाप क्यों नहीं हो सकता है? हमेशा दोनों पक्षों ने समान रूप से उसपर कठिन मेहनत करने से ही एक रिश्ता बनाया जाता है। तो अगर आपको लगता है कि आप विद्रोह करके अपना कर्तव्य पूरा कर रहे है, तो आप बहुत गलत हैं!

ज्यादा से ज्यादा बात करना सीखें। बात करने से मेरा अर्थ सार्थक बातचीत करना है। केवल अपने करीबी दोस्तों को बताने के बजाय अपनी रुचियों के बारे में अपने माता-पिता के साथ बात करें। यही समस्या है। हम सभी अपने सच्चे रूप में केवल अपने दोस्तों के साथ इतने सहज हैं कि हम अपने माता-पिता को गंभीरता से नहीं लेते हैं। हमारे माता-पिता नहीं जानते कि हम वास्तव में कैसे हैं। अपने माता-पिता के साथ आपकी पसंद, नापसंद, पसंदीदा चीजे, असफलताएं, आपके दोस्तों के सर्कल की समस्याएं इत्यादि के बारे में बात करे। सही बातचीत का मतलब सक्रिय रूप से सुनना भी है। तो अपने माता-पिता से केवल अपनी चीजों के बारे में न बड़बड़ाये, बल्कि बातचीत के समय उन्हें अनदेखा करने के बजाए उनकी बात भी सुनिए। कभी-कभी हमारे माता-पिता अपनी भावनाओं को अंदर रखते हैं, इसलिए जब आपको लगता है कि वे आपको सबकुछ नहीं बता रहे हैं, तो उन्हें प्रश्न पूछने की ज़िम्मेदारी लें। उनका दिन कैसा रहा ऐसी सरल बातें पूछिए!

जबतक आप जनरेशन गैप के बारे में कुछ नहीं करते तब तक वह हमेशा एक बहाना रहेगा। वे जो भी पसंद करते हैं उसमें रुचि लें जैसे जो आप करते है उसमें वे रुचि लेते हैं। अपने माता-पिता को अपनी नई तकनीकियों और सोशल मीडिया के साथ अपनी नई दुनिया का हिस्सा बनाएं। अपने माता-पिता को कुछ ऐसी चीजें सिखाएं जो उन्हें दिलचस्प लगे और यह जानकर आप आश्चर्यचकित होंगे कि वे कितने जिंदादिल बन सकते हैं। बेशक, यह भी दो-तरफा होने वाली बात है। तो उन्हें आपको कुछ चीजें भी सीखाने दो जो पूरी तरह से उनकी पीढ़ी के हैं और उन चीजों को उत्साह के साथ सीखें। उन्हें ऐसा महसूस न कराए जैसे वे संबंधित नहीं हैं! मिलकर अच्छा समय बिताने का यह सबसे आसान तरीका है!

हमारे माता-पिता के साथ संबंधो में एक महत्वपूर्ण कमी यह है कि हम बोलने से पहले नहीं सोचते! यही कारण है कि कभी-कभी हम अपने माता-पिता को अनजाने में चोट पहुंचाते हैं, भले ही हम सही हों! असहमति के दौरान यह बेहद महत्वपूर्ण है – बोलने से पहले सोचना। असहमति बहस और चर्चाओं में ख़त्म होनी चाहिए न की लड़ाई-झगड़े में। तो कभी-कभी अपने शब्दों को निगलना सीखिए, खासकर अगर यह आपको झगडे से बचा सकता है! साथ ही, यह आदर्शवादी प्रतीत हो सकता है लेकिन उनकी सलाह ले लीजिये। वे जीवन में अधिक अनुभवी हैं और भले ही उनकी पीढ़ी / विधियां पुरानी लगती हो, कभी-कभी वे काम भी कर जाती हैं! उन्हें अयोग्य महसूस न कराये। उनकी सलाह सुनिए और उस पर पर ध्यान दीजिये।

आप एक प्रेमपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण रिश्ते के लिए मेरी पुस्तक ‘Formula for Students’ (फ़ॉर्मूला फॉर स्टूडेंट्स) पढ़ सकते है और माता-पिता को उपहार में ‘Formula for Parents’ (फार्मूला फॉर पेरेंट्स) यह पुस्तक भेंट दे सकते हैं।

ये कुछ बुनियादी गलतियां हैं जो हम करते हैं और फिर हम और हमारे माता-पिता के बीच एक भावनात्मक अंतर महसूस करते हैं। यह सिर्फ उस दृस्टि को बदलने और एकता महसूस करने के लिए कुछ बुनियादी आदतों को बदलने के बारे में है। और कभी-कभार लड़ना ठीक है, यह सामान्य है। इन्ही कारणों से तो एक परिवार बनता है। इसे नाटकीय न बनाये, इससे सीखें और आपका रिश्ता स्वस्थ बनाने के लिए लगातार प्रयास करें!

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