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A lifestyle which requires doing multiple things in the least amount of time with efficacy and diligence also requiring a high quality output inevitably leads to stress. However, sometimes the lifestyle that falls onto our laps has little scope for us to be able to manipulate it. Instead what we can adjust and control is our attitude and outlook towards such a lifestyle. If you are such a person, who is unable to strike a balance between work and personal life you might be laden with the new-found stress!

For Starters – Be aware and prioritize. It is a very inward-looking exercise but also the most effective if you are able to contemplate to your benefit. More often than not, people who love their jobs are not stressed out even if they are made to work for abnormal hours – sometimes they choose to do so! Contemplate if what you do coincides with what you love. If not then you were already well-aware of the oncoming hardships and you have no other option but to love where you are already at, especially if it is able to fill the big hole in your pocket. Which leads us to the next step for the contemplation – prioritize. Make a list of the things that are important for you and prioritize accordingly. Setting priorities leaves your mind to not wander onto the little things that lead to stress. This also helps in better time management and leaves you from the guilt of the inability to allocate time and energy to the things that matter to you.

The Physical Aspect Of It – When you are not fit or active physically the stress that today’s fast-paced life has to offer gets to you faster than those leading an active life. While your mind is contemplating as mentioned above, your body must MOVE! Today it is almost impossible to not find a gym or a Yoga facility within the 2 k.m. radius from your vicinity. Enroll yourself to an activity of your choosing. If you prefer the comforts of your own house, then YouTube has made available a tonne of videos to guide yourself into fitness. However, it is preferred to do these physical activities at dawn and outdoors to feel one with nature. Take part in a lot of cardio to manage weight and make sure you meditate on a daily basis to take your mind off of routine difficulties. While you push your borders with vigorous exercises, don’t forget to indulge yourself once in a while. Spa is one such way to ensure well-being and is highly encouraged to relax and rejuvenate. Next, the adage you are what you eat is not something to take lightly. A lasting change can only persist if you work on the inside first. Everyone is different and a diet that works for one might not work for another. So don’t blindly follow trends and visit a nutritionist or a dietician before taking drastic steps! The power of Physiology is explained in detail by Sneh Desai in his signature event ‘Change Your Life’ Workshop.

The Rest – There is a lot more to life than just work and family life. Find that. There may be a lot of hobbies and other passions that you may not have been able to pursue. Reunite with them. If you love reading, writing, public-speaking, dancing, singing, or literally anything – no matter how big or small – make time for it once a week at least. There may also be more goals/dreams in life that you want to slowly but surely achieve; make a vision board and learn to share and revere in these goals that you set out for yourself (If you wish to learn the scientific system of Goal Setting, get one of Sneh Desai’s DVDs ‘Goal- Setting’). Learn to be positive and learn to maintain that positivity to manage stress. This way every bump on the way can be handled with a lot more ease. Also, listening to soothing music can help you calm down and forget your frustrations.

All of these things will ensure that you get a sound sleep at night of at least 7 to 8 hours to help you usher the next day with renewed energy and a lot less stress & tension. Funnily enough, it is important to note that this luxury of ‘stress management’ is but a recent phenomenon – our ancestors were constantly living under stifling circumstances, more often than not trying to make ends meet for survival, and they termed this ‘stress’ as life! So don’t forget to be thankful!

तनाव प्रबंधन


एक जीवन शैली जिस में एक साथ कई कार्य अल्पतम समय में कुशलता व लगन के साथ करने की ज़रुरत हो, और जहाँ उच्च कोटि के परिणाम भी मिलने चाहिए, वह ज़रूर तनाव की ओर ले जाएगी| फिर भी, कभी-कभी हमारी झोली में जो जीवन शैली आ गिरती है उसे बदलने की क्षमता हम में नहीं होती| इसके बदले में हम जिसे नियमित व नियंत्रित कर सकते हैं वह है हमारा रवैया और ऐसी जीवन शैली को देखने का नजरिया| यदि आप ऐसे व्यक्ति हो जो काम और निजी जीवन में संतुलन नहीं कर पाते तो आप नए तनाव के भार से ज़रूर दब रहे होंगे!

शुरुआत के लिए – सचेत रहें और प्राथमिकता को समझें| अगर आपको अपने फायदे के बारे में सोचना हो तो, इस अत्यधिक भीतर झाँकने के, परन्तु बहुत ही असरकारक कार्य को करें| ज्यादातर बार जिन लोगों को अपना काम पसंद होता है उन्हें असाधारण घंटों तक काम करना पड़े तो भी तनाव महसूस नहीं होता – कई बार तो वे खुद ही इसे चुनते हैं! सोचो कि आप जो करते हो वह आपको जो पसंद है उससे एकदम मेल खाता है या नहीं| यदि नहीं, तो आपको पहले से ही आने वाली कठिनाइयों का पता भलीभांति था और आपके पास जो आप कर रहे हो उसे प्यार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, खास करके जब यह आपकी खाली जेब को अच्छे से भरता हो| यह बात हमें अपने अगले पायदान पर ले आती है – प्राथमिकता समझें| आपके लिए जो भी बातें महत्वपूर्ण हो उनकी एक सूचि बनाइए और फिर उन्हें योग्य प्राथमिकता दीजिये| प्राथमिकतायें निश्चित करने से आपका मन तनाव देने वाली छोटी-मोटी बातों की तरफ भटकेगा नहीं| इससे समय का बेहतर प्रबंधन करने में भी सहायता होगी और अपने पसंदीदा कार्यों को वक्त और शक्ति ना दे पाने के कसूर से भी आप मुक्त हो जायेंगे|

उसका भौतिक दृष्टिकोण – आज के शीघ्र दौड़ने वाले जीवन में जब आप तंदुरस्त या शारीरिक ढंग से सक्रिय नहीं होते तब, आने वाला तनाव आपको आप सक्रीय होते तो जितना जकड़ता उससे कई अधिक मात्रा में और बहुत जल्दी जकड लेता है| जब आपका मन उपरोक्त ढंग से सोच रहा होता है, तब आपके शरीर ने प्रयास करना चाहिए| अपने घर के २ की.मी. के दायरे में कोई ‘जिम’ या योग के वर्ग ना मिले ऐसा आज के दौर में मुमकिन नहीं है| अपने पसंदीदा गतिविधि में नाम दर्ज कराएँ| यदि आपको अपने घर का माहौल ही अच्छा लगता हो तो ‘यू-ट्यूब’ पर खुद को तंदुरस्त करने के हजारों वीडियो मिल जायेंगे| लेकिन, इन शारीरिक गतिविधियों को उषा-काल में और बाहर करना अधिक हितावह है, ताकि आप खुद को प्रकृति के करीब पा सकें| अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए काफी सारी ह्रदय सम्बन्धी कसरतों को कीजिये और दिन में कम से कम एक बार तो ध्यान ज़रूर कीजिये ताकि आपका मन रोजमर्रा की छोटी-मोटी तकलीफों के तनाव से मुक्त रहे| जब आप खुद की सीमाएँ पार करने में लगे हुए हैं तब खुद को एकाद बार तुप्त व खुश करना ना भूलें| स्पा एक ऐसा स्थान है जो आपको ना केवल तंदुरस्त बल्कि तनाव मुक्त और जवान होने का एहसास करवाएगा| उसके पश्चात वह कहावत ‘आप वही हैं जो आप खाते हैं’ कोई साधारण सी बात नहीं है| कोई भी बदलाव लम्बे समय तक तब रहेगा जब आप उस पर अंदरूनी तौर पर काम करेंगे| हर व्यक्ति अलग है और एक के लिए काम करने वाला आहार अन्य पर भी उतना ही असर करेगा ऐसा ज़रूरी नहीं है| अतः किसी भी विचारधारा का बिना सोचे समझे अनुसरण ना करें, और कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले किसी अच्छे आहार विज्ञ की सलाह ज़रूर लें|

बाकि सब: काम और परिवार के अलावा ज़िन्दगी और भी बहुत कुछ है| उसे ढूँढो| ऐसे कई शौक या जुनून होंगें जिन्हें आप पूरा नहीं कर सके हैं| उनसे फिरसे मिलिए| यदि आपको पढ़ना, लिखना, वक्तृत्व, नृत्य, गाना, या जो भी पसंद हो – चाहे वह कितनी भी छोटी या बड़ी चीज़ क्यों ना हो – उसके लिए हफ्ते में कम से कम एक बार तो वक्त ज़रूर निकालिए| जीवन में ऐसे कई लक्ष्य/सपने होंगे जिन्हें आप अवश्य पाना चाहते हैं; उनके लिए एक दृश्य-फलक तैयार कीजिये और जो लक्ष्य आपने खुद के लिए बनाये हैं उन्हें दूसरों के साथ बाँटना व पूजना सीखिए| हकारात्मक बनना सीखिए और तनाव का सही प्रबंधन करने के लिए उस हकारात्मकता को बनाये रखना सीखिए| इस तरह मार्ग में आने वाली हर कठिनाई का अधिक आसानी से सामना किया जा सकता है| साथ ही, शांत करने वाला संगीत सुनने से भी आपको शांत रहने में और अपनी निराशाएँ भूलने में सहायता होगी|

यह सारी बातें यह निश्चित करेंगीं कि आपको रात को अच्छी नींद मिले – कम से कम ७ से ८ घंटों की – ताकि आप नए दिन का नई उर्जा व बहुत कम तनाव और परेशानी के साथ स्वागत कर सकें| मज़े की बात यह है की हमें याद रखना चाहिए की ‘तनाव प्रबंधन’ का सुख एक नया तथ्य है; हमारे पूवर्ज लगातार दम घुटनेवाली परिस्थितियों में रहते थे, और केवल जीवित रहने के लिए कड़ा परिश्रम करते थे; वे इसी ‘तनाव’ को ही जिंदगी कहते थे! अतः आभारी होना कभी भी मत भूलना!

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