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What does a “healthy” relationship mean? It’s quite simple – a relationship which is not toxic. The moment we define a toxic relationship it becomes infinitely easy for us to KNOW exactly what we don’t want and thus, the picture of what we do want in a relationship gains a significant amount of clarity. Hence, let’s first try and define what we do NOT want in a relationship:-

  • Lack of openness.
  • Discomfort.
  • One which makes you feel like you are not adequate.
  • Interference of too many bloated or hurt egos.
  • One which does not allow you to be yourself.
  • One which disturbs your mental peace too often.
  • When the other person is unable to accept your point-of-view.
  • Lack of trust.
  • Constant caging-in.
  • Lack of honesty.
  • Threat to your independence.

So on and so forth. Feel free to add on your own specific points to this list. But what I mean to say is that broadly, most of us do not want the aforesaid in a relationship. Consequentially, any relationship which is majorly free from the above becomes a healthy relationship automatically. But sometimes it becomes too complicated – it goes beyond black and white. In such a situation, where things are grey, how can we know if we are in a healthy relationship? For example when you are not having fun with someone you just know, right? You run out of things to talk about, you don’t agree on anything, you have nothing in common etc. When boredom has some signs to identify it as boredom, a healthy relationship too comes with its own symptoms. Many of my participants have seen 360-degree change in their relationship after attending my 4-days camp ‘Ultimate Life’ where we spend one whole day on building everlasting relationships. Here are a few things about a healthy relationship.

For starters, you begin to feel GOOD ABOUT YOURSELF. This is one of the most common signs of a healthy relationship. You not only feel good and confident about yourself, but you start to take that extra effort to look better, take care of your physical well-being etc. And the plus side is, that with this comes mental peace too. You feel happier in general! You feel comfortable being your own self and in your own skin, i.e., with or without your flaws and feel so grateful to be around people who love you for being you! People run all their lives to find happiness, but in reality isn’t it all too simple? It’s all about surrounding yourself with healthier relationships! People who can make you smile and laugh at the drop of a hat. Thus, when this happens, as a consequence, you begin to LISTEN to those people and gain newer perspectives to life. It is just common sense; when someone makes you happy, you start respecting them and listen to what they have to say much more than feeling the need to only stress upon your own point. You become less stubborn and more accepting. This then extends beyond your immediate family or friends circle. This positivity grows beyond your own life – it EXTENDS TO OTHERS as you become more compassionate. You understand the importance of listening (and not just acknowledging) others’ problems.

Similarly, healthier relationships restore your TRUST in the good and positive that life has to offer. Living in the security of the fact that someone else shall not hurt you knowingly, builds trust not just within the two of you but also in humanity in general. This automatically leads to more HONESTY. The trust that you can be truthful and open with your partner, friend, guardian etc. helps you to be more INDEPENDENT – that you can do certain things on your own without pressuring them to be with you all the time, and vice-versa! It frees you from all your physical and emotional shackles. You stop being in the constant fear of being judged and learn to RESPECT one another. One of the best examples of the same is the relationship of Krishna & Radha, the one that I talk about in my Free ‘Krishna Katha’ Program.

I am sure that just talking about the symptoms of a healthy relationship has given you a rough idea to help you judge if you are truly in one yourself! The important point to remember is that people are never going to be perfect; however imperfect people are fully capable of creating perfect relationships!

स्वस्थ संबंधों के लक्षण

“स्वस्थ” संबंध का अर्थ क्या है? यह काफी सरल है – स्वस्थ संबंध वह रिश्ता है जो बुरा नहीं है। जिस क्षण हम किसी बुरे रिश्ते की बात करते हैं, हमारे लिए यह जानना बहुत आसान हो जाता है कि हम वास्तव में क्या नहीं चाहते हैं। इस प्रकार, हम जो संबंध चाहते हैं उसकी तस्वीर स्पष्ट रूप से हमारे सामने आ जाती है। इसलिए, आइए सबसे पहले कोशिश करें और जानें कि हम सबंधों में क्या नहीं चाहते हैं: –

  • खुलेपन की कमी।
  • असुविधा।
  • जो आपको अपर्याप्त महसूस कराता है।
  • बहुत ज्यादा मात्रा में चोट लगा अहंकार।
  • वह जो आपको जैसे आप है वैसा बनने नहीं देता है।
  • वह जो आपकी मानसिक शांति को भंग करता है।
  • जब दूसरा व्यक्ति आपके दृष्टिकोण को स्वीकार करने में असमर्थ है।
  • भरोसे की कमी।
  • लगातार घेरे में बंद रखना।
  • ईमानदारी की कमी।
  • आपकी आजादी के लिए खतरा।

इत्यादी इत्यादी। इस सूची में आप अपने खुद के मुद्दे भी जोड़ सकते हैं। लेकिन मेरा कहना है कि ज्यादातर, हम में से अधिकांश व्यक्ति सबंधों में ऊपर दी हुई बातें नहीं चाहते हैं। नतीजा यह होता है कि, ऊपर दी हुए बातें जिन संबंधों में नहीं है वह रिश्ता आप ही स्वस्थ संबंध बन जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बहुत जटिल हो जाता है – यह सही और गलत से दूर चला जाता है। ऐसी स्थिति में, जहां चीजें जरा मध्यम तरह की हो, हम कैसे जान सकते हैं कि हमारे संबंध स्वस्थ हैं या नहीं? उदाहरण के लिए, जब आपको किसी के साथ मजा नहीं आ रहा हैं तो आप बस जानते हैं, है ना? आपके पास बात करने के लिए विषय नहीं हैं, आप किसी भी चीज़ पर एक दुसरे से सहमत नहीं हैं, आपस में कुछ भी मिलता – जुलता नहीं है। जब बोरियत को बोरियत के रूप में पहचानने के लिए कुछ संकेत हैं, तो एक स्वस्थ संबंध के भी अपने लक्षण है। मेरे 4 दिनों के शिविर ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ) में भाग लेने के बाद कई व्यक्तियों ने अपने रिश्ते में 360 डिग्री परिवर्तन देखा है। यहां हम एक पूरे दिन मजबूत टिकनेवाले रिश्तों पर बात करते हैं। स्वस्थ संबंधों के बारे में कुछ बातें यहां दी गई हैं।

आप अपने बारे में अच्छा महसूस करना शुरू कर देते हैं। यह स्वस्थ संबंधों के सबसे आम संकेतों में से एक है। आप न केवल अपने बारे में अच्छा और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करते हैं, बल्कि आप सुन्दर दिखने के लिए ज्यादा कोशिश करना शुरू करते हैं और अपने शरीर की देखभाल करते हैं। और प्लस साइड यह है कि इसके साथ मानसिक शांति भी आती है। आप सामान्य रूप से खुशी महसूस करते हैं! आप अपनी कमियों के साथ या कमियों के बिना अपने आप में सहज महसूस करते हैं। और उन लोगों के आस-पास रहने के लिए बहुत आभारी महसूस करते हैं जो आपको प्यार करते हैं! लोग खुशीयां पाने के लिए अपना पूरा जीवन भागते रहते हैं, लेकिन सच में क्या यह सब बहुत आसान नहीं है? यह अपने आस-पास स्वस्थ संबंधों को रखने की बात है! ऐसे लोग जो आपको एक छोटी सी बात पर मुस्कुरा और हंसा सकते हैं। तो, जब ऐसा होता है, तब, आप उन लोगों की बातों पर ध्यान देना शुरू करते हैं और आपको जीवन के लिए नया दृष्टिकोण मिलता हैं। यह जरासा सामान्य ज्ञान ही तो है! जब कोई आपको खुश करता है, तो आप केवल अपनी बात न रखते हुए उनका सम्मान करना शुरू करते हैं। आप कम जिद्दी और बातों को माननेवाले हो जाते हैं। यह आपके तत्काल परिवार या दोस्तों के सर्कल से परे फैल जाता है। यह सकारात्मकता आपके जीवन से आगे बढ़ती है – यह दूसरों के लिए भी हो जाती है क्योंकि आप अधिक दयालु बन जाते हैं। आप दूसरों की समस्याओं को सुनने (केवल स्वीकार करना नहीं) के महत्व को समझते हैं।

इस तरह, जीवन हमें जो कुछ अच्छा और सकारात्मक देता है, उसमें आपका विश्वास स्वस्थ संबंध के कारण मजबूत होता है। इस बात की जानकारी रहना कि कोई और आपको जानबूझकर चोट नहीं पहुंचाएगा, न सिर्फ आप दोनों के संबंधों में विश्वास को बढ़ाता है बल्कि मानवता में भी विश्वास बनाता है। यह आप ही ज्यादा इमानदारी को जन्म देता है। जब आप को यह भरोसा होता है कि आप अपने साथी, मित्र, अभिभावक इत्यादि के साथ सच्चे और खुले हो सकते हैं तो आप ज्यादा स्वतंत्र बन जाते हैं। आप यह बात जान जाते है कि हर समय वे साथ न रहते हुए भी आप कुछ चीजें कर सकते हैं और वे भी ऐसा कर सकते है! यह आपको अपने सभी शारीरिक और भावनात्मक बंधनों से मुक्त करता है। आप निर्णय लेने से डरना बंद कर देते हैं और एक-दूसरे का सम्मान करना सीखते हैं। इसके सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक कृष्ण और राधा का रिश्ता है, जिसकी मैं अपने नि:शुल्क ‘कृष्ण कथा’ कार्यक्रम में बात करता हूं।

मुझे विश्वास है कि स्वस्थ रिश्ते के लक्षणों के बारे में बात करने से आपको यह निर्णय लेने में मदद होगी कि आप स्वस्थ और मजबूत संबंध में है या नहीं! यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि लोग कभी भी परिपूर्ण नहीं होते हैं; हालांकि अपरिपक्व लोग भी परिपक्व संबंध अच्छे से बना सकते हैं!

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