While discussing my online course ‘Money & Success’, one of my friends asked me if it is better to be a leader or a manager. Not everyone who is a leader is a manager & vice-versa. There is a very thin line between the two. By merely being in the position of a manager, you don’t become a good leader. Leaders have certain instincts which a manager may or may not have. However, it is essential for you to be able to distinguish between the two such that you understand the difference between the core responsibilities of the most critical roles within a company.

Let’s see how different they are so that you can figure out whether you’re a leader or a manager.

1. Vision: Leaders are generally the visionaries within a company. With their sheer far-sightedness, they can make the rest of the employees follow their dreams. The position of the company in the next 5-10 years depends upon the vision of the leader & not the manager. In fact, managers work towards accomplishing that vision themselves!

2. Risk: Managers are not in the position of taking risks within an organisation. The risk factor within a company solely lies on the shoulders of the leaders. Leaders are willing to take risks to fulfil their objectives whereas managers are appointed to control risk. Therefore, leaders bring about change whereas managers only stick to well-defined rules & regulations.

3. Orders: Leaders give them, managers execute them! Leaders are not systematic enough to carry out orders. On the other hand, managers are organised & know how to make the employees within an organisation work harmoniously.

4. Inspire: Leaders engage people. Managers only delegate responsibilities to people. Leaders understand that a team unified by one purpose shall work more effectively than a group which works separately or on its own. Hence, leaders are responsible for inspiring the employees – to make everyone feel like they belong to something bigger. Managers have however mastered the art of making each employee work in unison. They are experts at making these employees work together as a unified team.

5. Uniqueness: Leaders can easily be themselves. They are used to having their personalities out there which is why they are self-aware. They are always working towards creating a brand for themselves which others can look upto. Hence, they are unique, i.e., they have a style of their own which no one can copy. However, managers are not as authentic. More often than not they follow a code of conduct which may be expected out of them instead of being their own selves.

6. Focus: Leaders focus on objectives, whereas managers set the goals for those objectives. Objectives are long-term whereas goals are short tasks aimed at achieving those objectives. Thus, leaders think long-term whereas managers are focussed on short-term assignments. As a result of which, leaders are learning something new every day, i.e., they grow on a personal level while managing their responsibilities. Managers, on the other hand, are left with perfecting existing skills.

7. Relationships: Leaders feel the need to build relationships because they spend most of their time with people. They ensure that they have the belief & faith of the people around them. However, managers are more analytical. They are only concerned with attaining their set aims. They are not necessarily looking to become emotionally attached to the people they work with. Leaders aim at building loyalty & trust, but managers only focus on working with employees – analyzing their individual performances.

Leaders are the ones who have solutions to all the problems whereas managers simply direct employees to their duties. Now, the million dollar question remains – are you a leader or a manager? Well, if you are one of those who’d like to get upgraded as a leader and sell more effectively, I suggest you one of our favorite books ‘The Great Salesman’ from our product basket. Happy reading!

क्या आप एक नेता हैं या मॅनेजर?


मेरे ऑनलाइन पाठ्यक्रम ‘मनी एंड सक्सेस’ के बारे में चर्चा करते समय, मेरे एक मित्र ने मुझसे पूछा कि क्या नेता होना बेहतर है या फिर मॅनेजर। जरुरी नहीं की हर एक नेता मॅनेजर भी हो या हर मॅनेजर नेता हो। दोनों के बीच एक बहुत पतली रेखा है। केवल मॅनेजर बन जाने से आप एक अच्छे नेता नहीं बनते हैं। नेताओं के पास कुछ सहज प्रवृत्ति होती हैं जो मॅनेजर के पास हो भी सकती है या नहीं भी। हालांकि, आपके लिए यह आवश्यक है कि आप दोनों के बीच अंतर कर सकें। जिससे आप किसी कंपनी के भीतर सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं की मूल जिम्मेदारियों के बीच अंतर को समझ सकें।
चलिए, देखते हैं कि वे कितने अलग हैं ताकि आप यह पता लगा सकें कि आप नेता हैं या मॅनेजर हैं।

1. दूरदर्शिता: नेता आमतौर पर एक कंपनी के भीतर दूरदर्शी होते हैं। केवल अपनी दूरदृष्टि के कारण, वे दुसरे कर्मचारियों को उनके सपनों का पीछा करने लगा सकते हैं। अगले 5-10 वर्षों में कंपनी की स्थिति नेता की दृष्टि पर निर्भर करती है, न कि मॅनेजर के। वास्तव में, मॅनेजर खुद उस दृष्टि को पूरा करने की दिशा में काम करते हैं!

2. जोखिम उठाना: मॅनेजर किसी संगठन के भीतर जोखिम लेने की स्थिति में नहीं होते हैं। किसी कंपनी के भीतर जोखिम का साधन पूरी तरह से नेताओं के कंधों पर होता है। नेता अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जोखिम उठाने के इच्छुक हैं, जबकि मॅनेजरों को जोखिम को नियंत्रित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। इसलिए, नेता परिवर्तन लाते है जबकि मॅनेजर केवल अच्छी तरह से तय किये गए नियमों और विनियमों के साथ चिपक जाते है।

3. आदेश: नेता आदेश देते है, मॅनेजर उन्हें पूरा करते है! नेता आदेशों का पालन करने के लिए पर्याप्त सुव्यवस्थित नहीं होते हैं। दूसरी तरफ, मॅनेजर सुनियोजित होते है और उन्हें पता होता है कि संगठन के भीतर कर्मचारियों से कैसे सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम लिया जाना है।

4. प्रेरित करना: नेता लोगों को बांध कर रखते हैं। मॅनेजर लोगों को केवल जिम्मेदारियों का बँटवारा करते हैं। नेता समझते हैं कि किसी एक उद्देश्य के लिए एकीकृत टीम, अलग-अलग काम करनेवाले समूह की तुलना में अच्छे ढंग से काम करेगी। इसलिए, नेता कर्मचारियों को प्रेरणा देने के लिए जिम्मेदार होते हैं – हर किसी को ऐसा महसूस करवाते है कि वे किसी बड़े उद्देश से जुड़े हैं। दूसरी तरफ, मॅनेजरों ने हर एक कर्मचारी को एकजुट हो कर काम करने की कला में महारत हासिल की होती है। वे इन कर्मचारियों को एक एकीकृत टीम के रूप में मिलकर काम करने के विशेषज्ञ होते हैं।

5. विशिष्टता: नेता आसानी से स्वयं हो सकते हैं। उनका खुद का व्यक्तित्व खुला होता है और इसलिए वे आत्म-जागरूक हैं। वे हमेशा अपने लिए एक ब्रांड बनाने की दिशा में काम करते हैं जिसे दुसरे आदर्श मानते हैं। इसलिए, वे निराले हैं, यानी, उनके पास अपनी शैली है जो कोई भी कॉपी नहीं कर सकता। हालांकि, मॅनेजर उतने सच्चे नहीं हैं। अधिकतर वे सिर्फ आचरण संहिता का पालन करते हैं, जिन्हें पालन करने की उनसे उम्मीद की जाती है। इसलिए वे खुद का व्यक्तित्व आगे नहीं लाते।

6. फोकस: नेता उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि मॅनेजर उन उद्देश्यों के लिए लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उद्देश्य लंबे समय के लिए होते हैं, जबकि उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए लक्ष्य छोटे-छोटे कार्य होते हैं। इस प्रकार, नेता लंबा सोचते है जबकि मॅनेजर तत्काल कामों पर ध्यान केंद्रित करते है। जिसके परिणामस्वरूप, नेता हर दिन कुछ नया सीखते हैं, यानी, वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रबंधन के दौरान व्यक्तिगत स्तर पर बढ़ते हैं। दूसरी तरफ, मॅनेजरों को मौजूदा कौशल को पूरा करने के लिए छोड़ दिया जाता है।

7. रिश्तें: नेताओं को संबंध बनाने की आवश्यकता महसूस होती है क्योंकि वे अपना अधिकांश समय लोगों के साथ बिताते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि उनके आसपास के लोगों का उनपर विश्वास और भरोसा हो। जबकि, मॅनेजर अधिक विश्लेषणात्मक होते हैं। वे केवल अपने निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए चिंतित होते हैं। जरूरी नहीं कि वे जिन लोगों के साथ काम करते हैं उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हो। नेताओं का उद्देश्य वफादारी और विश्वास बनाने का है, लेकिन मॅनेजर केवल कर्मचारियों के साथ काम करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं – उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं।

नेता वे हैं जिनके पास सभी समस्याओं का समाधान होता है जबकि मॅनेजर कर्मचारियों को काम पर लागते है। अब, मुख्य सवाल है – क्या आप एक नेता है या मॅनेजर हैं? खैर, अगर आप उन लोगों में से एक हैं जो नेता के रूप में आगे चाहते हैं और अधिक प्रभावी ढंग से पेश होना चाहते हैं, तो मैं आपको हमारी उत्पादन की टोकरी से हमारे पसंदीदा किताबों में से एक ‘द ग्रेट सेल्समैन’ का सुझाव देता हूं। पढ़ने का आनंद लिजिए!