When I meet participants in my ‘Money & Success’ Workshop, they often feel that money will solve all their problems and give them happiness. All of us say this, but how many of us truly abide by it? Very few. This is because most of us feel that MONEY=HAPPINESS. But can money truly buy everything?? Money is something but it is NOT everything. I am not saying that it is insignificant or unimportant, but looking at life through merely a financial perspective will prove to be a very narrow mindset. This is why this post is dedicated to throwing light on how happiness can be found even in the darkest phase of our lives and how it can be independent of the amount of money you earn.

“You are not rich until you have something money can’t buy.”

The first step towards understanding this concept is to let go of the opinion that money is the be all and end all. People feel happiness in different ways, and if money were the sole criteria for the same, a large chunk of today’s population would be termed as “unhappy”. But practically, that’s not true. In fact, I think for starters success (no matter how small) is what makes you feel positive emotions such as happy. By success I don’t mean landing your dream job or cracking a deal/contract. By success I mean doing anything which others think that you shall never be able to achieve. It could be in education; For example, if your relatives feel like you shall never be able to get more than 80%, and when you work hard and derive more than the so-called popular opinion is when you feel like a true achiever. This is happiness. And the best part is that the process is extremely gratifying. Proving people wrong through your deeds in a positive manner is the most basic non-materialistic method of feeling happy.

One of the other most important things that hinders happiness more than financial issues is the need to impress others. And unfortunately we tend to do that the most by showing our financial superiority. This sense of comparison is what holds most people back from true happiness. All of this is a by-product of making constant comparisons with others. We constantly want more than what the other person has. Instead why can’t we actually try and focus on their virtues? What about the good qualities they have that you can learn from or improve in? Focusing on the positives will never deplete it, i.e., positivity brings more positivity.

Now, talking about the other side of the argument, money can bring about happiness only when it is spent in life experiences instead of material items. Experiences make you a better person, demanding you to improve and giving you a reason to evolve. Material things only demand more and more money out of you. Imagine buying a latest smartphone; it will give you a certain sense of happiness at the point of purchase after which in a year or so it will become the need of the hour to replace it with a newer/updated model. But how often have you talked about the amount of fun that you had on a specific trip or a holiday? Or that time when you took a solo trip? Or that drive you took with your family? Or your first bungee jump experience? See what I mean? I emphasize much on this in my premium 4-days program ‘Ultimate Life’.

Happiness truly lies in the small things. Going out of your comfort zone, meeting new people, interacting with strangers, listening to others’ problems and supporting each other. No matter what your income is at the moment, if you are unable to help someone or talk about these little things/experiences in life, not all the money in the world can bring you happiness. Thus, obviously aim for the moon as far as your career/job/business is concerned, but if you want happiness be someone who is greater than merely a statement of profit and loss!

क्या धन आपको खुशियाँ दे सकती है?

जब मैं अपने ‘Money & Success’ (धन और सफलता) कार्यशाला में प्रतिभागियों से मिलता हूं, तो वे अक्सर महसूस करते हैं कि पैसा उनकी सभी समस्याओं का समाधान करेगा और उन्हें खुशी देगा। हम सभी यह कहते हैं, लेकिन हम में से कितने वास्तव में इसका पालन करते हैं? बहुत कम। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम में से अधिकांश को लगता है कि पैसा = खुशियाँ। लेकिन क्या पैसा वास्तव में सबकुछ खरीद सकता है ?? पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब कुछ नहीं है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह महत्वहीन या नगण्य है, लेकिन जीवन को केवल धन की नजर से देखना बहुत ही संकीर्ण मानसिकता साबित होगी। यही कारण है कि यह पोस्ट हमारे जीवन के सबसे अंधेरे चरण में भी खुशियाँ कैसे पायी जा सकती है और वह आपके द्वारा अर्जित धन की राशि से कैसे स्वतंत्र हो सकती है, इस बात पर प्रकाश डालती है।

“जब तक कि आपके पास धन से न खरीदी जा सकनेवाली कोई चीज़ है तब तक आप धनवान नहीं हैं।”

इस अवधारणा को समझने की दिशा में पहला कदम यह है कि इस विचार को छोड़ दें कि पैसा सब कुछ है। लोग अलग-अलग तरीकों से खुशी महसूस करते हैं, और यदि धन एकमात्र मानदंड रहता, तो आज की आबादी का एक बड़ा हिस्सा “दुखी” कहा जाता। लेकिन व्यावहारिक रूप से, यह सच नहीं है। असल में, मुझे लगता है कि शुरुआत में जब सफलता पाते हैं (फिर वह कितनी ही छोटी क्यों ना हो) आप खुशी जैसी सकारात्मक भावना महसूस करते है। सफलता से मेरा मतलब यह नहीं है कि आपको अपने सपनों की नौकरी मिले या व्यवसाय में कोई अच्छी डील हो। सफलता से मेरा मतलब है कि कुछ ऐसा करना जो दूसरों को लगता है कि आप कभी हासिल नहीं कर पाएंगे। यह शिक्षा में हो सकता है; उदाहरण के लिए, यदि आपके रिश्तेदार ऐसा महसूस करते हैं कि आप 80% से अधिक नहीं प्राप्त कर पाएंगे और जब आप कड़ी मेहनत करते हैं और तथाकथित लोकप्रिय राय से अधिक प्राप्त करते हैं तो आप एक सच्चे सफल व्यक्ति की तरह महसूस करते हैं। यह खुशी है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह प्रक्रिया बेहद संतोषजनक होती है। लोगों को अपने कर्मों के माध्यम से गलत सिद्ध करना, ऐसा सकारात्मक तरीके से करना यह खुशी महसूस करने की सबसे बुनियादी गैर-भौतिकवादी तरीका है।

वित्तीय समस्याओं से अधिक खुशी में बाधा डालने वाली अन्य सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है दूसरों को प्रभावित करने की आवश्यकता। दुर्भाग्य से हम अपनी वित्तीय श्रेष्ठता दिखाकर ऐसा बहुत बार करते हैं। तुलना की यह भावना ज्यादातर लोगों को सच्ची खुशी से वंचित रखती है। यह सब दूसरों के साथ लगातार तुलना करने के परिणाम है। हम हमेशा दूसरे व्यक्ति के मुकाबले स्वयं के लिए ज्यादा चाहते हैं। इसके बजाय हम वास्तव में उनके गुणों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश क्यों नहीं कर सकते हैं? उनके पास कौन से अच्छे गुण है जो आप सीख सकते हैं या सुधार सकते हैं? सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करने से वह कभी खत्म नहीं होगी, यानी सकारात्मकता अधिक सकारात्मकता लाती है।

अब, तर्क का दूसरा पक्ष देखते हैं। धन केवल तभी खुशी ला सकता है जब इसे भौतिक वस्तुओं के बजाय जीवन के अनुभवों पर खर्च किया जाता है। अनुभव आपको बेहतर व्यक्ति बनाते हैं। वे आपको सुधारते और विकसित करते हैं। भौतिक चीजें आप से केवल अधिक से अधिक धन की मांग करती हैं। एक नया स्मार्टफोन खरीदने की कल्पना कीजिये; यह आपको खरीदने तक खुशी की भावना देगी जिसके बाद एक वर्ष में इसे एक नए / अपडेटेड मॉडल के साथ बदलने की आवश्यकता बन जाएगी। लेकिन आपने कितनी बार आपके किसी विशिष्ट यात्रा या छुट्टी पर आये मज़े पर बात की है? या उस समय के बारे में बताया है जब आपने अकेले यात्रा की थी? या वह सैर जिसे आपने अपने परिवार के साथ की थी? या आपका पहला बंजी जंप का अनुभव? समझे‚ मेरा क्या मतलब है? मैं अपने अति लाभदायक 4-दिनों के कार्यक्रम ‘Ultimate Life’ (अल्टीमेट लाइफ) में इस पर बहुत जोर देता हूं।

खुशियाँ वास्तव में छोटी-छोटी चीजों में होती है। अपने आराम क्षेत्र से बाहर जाना, नए लोगों से मिलना, अजनबियों से बातचीत करना, दूसरों की समस्याओं को सुनना और एक-दूसरे को मदद करना। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी आय इस समय क्या है, यदि आप किसी की मदद करने में या जीवन की इन छोटी चीजों / अनुभवों के बारे में बात करने में असमर्थ हैं, तो दुनिया की सारी धन-दौलत आपको खुश नहीं कर सकती। इस प्रकार, जहां तक आपके करियर / नौकरी / व्यवसाय का संबंध है आप चाँद पाने का लक्ष्य रखिये, लेकिन यदि आप खुशी चाहते हैं तो केवल लाभ और हानि से बढ़कर होनेवाले एक बढ़िया इंसान बनिये!