Practice Yoga at Home

Most of us want to transform ourselves physically, but of course we are unable to do so. Why? We have many excuses that we repeatedly tell ourselves to convince our minds that we are victims to our unhappy physique. Gym seems too exasperating and tiring, and other forms of exercise we are oblivious to. We need an expert to guide us but then again we slave ourselves to our justifications; which is a very wide spectrum ranging from having to move out of the comforts of our home to monetary restraints. We can come up with all kinds of defense mechanisms to shield our laziness and yet complain about our health problems. All we need is to visit our Indian roots. Yoga- a spiritual and ascetic discipline is a simple way to achieve a healthy regime within the four walls of our home. It is a source of being more productive, calm, happy, relaxed and stress-free. The same can be achieved by keeping a few simple things in mind:-

1. Time & Place: Traditionally speaking, early morning and Yoga is a match made in heaven. However, given our busy lifestyles it rests entirely upon you to choose the most convenient time-slot that you can allocate to solely yourself. A morning session is the most favorable as it ensures you have the best start to the day. Furthermore, choose the most comfortable and spacious part of your house to practice Yoga privately. It should be a place that helps you gain a certain sense of positive vibrations/energy and with time your energy/warmth shall also emanate to fill that particular space with more positivity. Make sure that spot remains consistently steady for you to do Yoga as a daily-routine practice. If the time remains varying make sure the place in which you practice is the same spot and vice-versa.

2. Athleisure & Essentials: Keep your Yoga attire simplistic and comfortable. Nothing too tight and body-hugging. Yoga requires a lot of stretching and tight-clothing could play against that. Further, Yoga preaches having to keep a steady mind to meditate, and if constant attention has to be given to the clothes it could be a big distraction! Also, make sure you are practicing Yoga using a proper Yoga mat. It is inexpensive and does great benefit to maintaining your postures as opposed to when Yoga is practiced on the ground or any normal mat/carpet etc.

3. Empty Stomach: Before you begin, make sure your stomach is relatively empty. There is no point of performing any kind of an exercise on a full-stomach. Make sure there’s a gap of at least 4 hours in-between your meal and your Yoga-session.

4. Practice in groups: If possible make sure you practice Yoga with your family. It helps to inculcate a healthy habit within your family and makes it more fun. That way you can remain motivated & disciplined to be consistent with this custom and break lethargy.

5. Break The Monotony: Doing the same postures everyday can make you feel a certain monotony which could be one of the major reasons for you to give up on such a healthy regime. Yoga is a lot more than that. It has a varied spectrum including Pranayam (breathing exercises), meditation etc. Make sure you cover different techniques to help you to keep at it constantly like a routine-task.

6. Push Yourself: Fitness, at the end of the day, is about pushing your limits and reaching out for more. Be varying in the kind of postures you do and test your limits by stretching a little bit more and aiming for postures that could help you improve your range. The same goes for various meditations and breathing exercises.

7. Warm Ups: It is important to place significance on staging before actually starting off with Yoga. Make sure you warm yourself up by doing some brisk exercises to even some cardio to get your blood flowing, so that you can perform asanas with more vitality.

8. Be Reasonable & Patient: Yes, push yourself but don’t let that drive you unreasonable. Be gentle with your body and be more patient to realize the stage when you are able to go up a notch higher than usual. Also, be patient. It is not a race; be patient and gentle with your body to organically help it to become more flexible and fit in due course of time. Practice a 15-minute process of ‘Dynamic Yoga’ by Sneh Desai including pranayam, stretching and sajag yog nindra each day to get rid of any diseases or to get desired fitness.

घर पर ही योगाभ्यास करें

हम सब में से ज्यादातर लोग खुद में शारीरिक परिवर्तन देखना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने में असमर्थ होते हैं| क्यों? हमारे पास कई बहाने होते हैं जो हम खुद को बार-बार सुनाते हैं ताकि हम अपने मन को यकीन दिला सकें की हम अपने दुखी शरीर के शिकार हैं और रहेंगे| व्यायामशाला बड़ी ही चिढाने वाली व थकाने वाली लगाती है, और हम अन्य प्रकार के व्यायामों को तो जानते ही नहीं| हमें किसी विशेषज्ञ की ज़रुरत है जो हमें सही मार्गदर्शन दे सके, लेकिन एक बार फिर हम खुद के समर्थनों के गुलाम बन जाते हैं; जिनकी, घर के आरामदेय माहौल में से बाहर निकलने से लेकर पैसों की तंगी तक की, विशाल श्रेणी होती है| हम हर प्रकार की सुरक्षा व्यवस्थाओं को आगे करते हैं ताकि वह हमारे आलस को एक कवच से ढक दे, और फिर हम जोर शोर से अपने स्वास्थ्य समस्याओं की तकरार करना जारी रखते हैं| हमें केवल अपने भारतीय जड़ों तक जाने की आवश्यकता है| योग – एक आध्यात्मिक व सिध्द अभ्यास – स्वस्थ व्यवस्था पाने का आसान तरीका है – और इसे हम अपने घर की चार दीवारों में रहकर भी कर सकते हैं| यह अधिक कार्यशील, अधिक शांत व सुखी, अधिक निश्चिन्त व तनाव मुक्त बनने का सर्व श्रेष्ठ जरिया है| यह सब आसानी से हासिल किया जा सकता है; बस कुछ छोटी बातों को ध्यान में रखने की ज़रुरत है:-

१. समय व स्थान: पारंपरिक तरह से बात की जाए तो, प्रातःकाल एवं योग स्वर्ग में बनी जोड़ी है| फिर भी, हमारे अत्यधिक मसरूफ जीवन शैली को देखते हुए, यह आप पर ही निर्भर है की आप अपने हिसाब से खुद के लिए सबसे बेहतर समय चुने जब आप केवल खुद के लिए ही कुछ करें या सोचें| सवेरे का समय बेहद लाभप्रद होता है क्योंकि यह निश्चित करता है की आपके दिन की शुरुवात बेहतरीन हो| इसके अतिरिक्त, अपने घर का सबसे आरामदेय व खुला स्थान चुनो, ताकि आप योगाभ्यास पूरी एकान्तता में कर सकें| जगह ऐसी हो जो आपको कुछ हद तक हकारात्मक कम्पन / उर्जा प्राप्त करा सके और समय के साथ आप में से उर्जा / गरमाहट उत्पन्न हो और उस स्थान को और भी हकारात्म्कता से भर दे| निश्चय कर लो की हर रोज़ योगाभ्यास करने के लिए, वही स्थान आपके लिए सुसंगत रहे| पर ध्यान रहे कि, यदि समय बदलता रहता हो तो स्थान ना बदले और स्थान बदलता रहता हो तो समय ना बदले|

२. वस्त्र तथा आधारभूत तत्त्व: योगभ्यास के वस्त्र सादे व आरामदेय रखिये| कुछ अति तंग और शरीर से लिपटा हुआ ना पहने| योग में शरीर को काफी खींचना पड़ता है और तंग कपड़ों में यह मुमकिन नहीं है| और फिर, योग मन को शांत व स्थिर रखने की सलाह देता है; ऐसे में यदि कपड़ों पर बार-बार ध्यान जाये तो बहुत बड़ा ध्यान भंग हो सकता है! दूसरी बात, योगाभ्यास केवल योग-चटाई पर ही करें| यह काफी सस्ती होती है और साधारण चटाई या आसन की तुलना में यह आपको योगिक आसन बनाए रखने में काफी मददरूप होगी|

३. खाली पेट: शुरू करने से पहले पेट करीबन खाली है यह निश्चित कर लो| भरे पेट के साथ किसी भी प्रकार की कसरत करना बेमतलब का होता है| आपके खाने के समय में और योगाभ्यास के समय में कम से कम ४ घंटों का अंतर होना ही चाहिए|

४. समूह में अभ्यास करें: जहाँ तक मुमकिन हो कोशिश करो की आप योगाभ्यास अपने परिवार के साथ करें| अपने परिवार में एक स्वास्थ्य वर्धक आदत डालना हमेशा लाभ दायक ही होगा और इससे कार्य और भी मजेदार बन जाता है| इस के कारण आप भी नियमित रहने के लिए और आलस ना करने के लिए प्रेरित व अनुशासित रह सकते हैं|

५. एकरसता को तोड़ दो: हर रोज़ एक ही तरह के आसन करने से कुछ हद तक एकरसता पैदा हो सकती है जो आपको अपनी इतनी स्वास्थ्यप्रद व्यवस्था तोड़ने का सबसे बड़ा कारण साबित होगी| योग इससे कहीं ज्यादा है| इसमें अनेक प्रकार की कसरतों का समवेश होता है, जैसे की ‘प्राणायाम’ (श्वासोच्छ्वास सम्बन्धी कसरत), ‘ध्यान’, आदि| आप कई तरह की तकनीक अपने रोजिंदा कार्यक्रम में समां लें ताकि आप इसे दिनचर्या की तरह हर रोज़ कर सकें|

६. खुद को धकेलो: अंत में, शारीरिक स्वास्थ्य अपनी सीमाओं को पीछे धकेल कर और ज्यादा हासिल करने के बारे में ही तो है| आप जो भी आसन करते हैं उनमें विविधता रखें और अपने शरीर को हर रोज़ थोडा और खींच कर तथा अधिक कठिन आसन करने की कोशिश करके अपनी सीमाओं की परीक्षा लें| यही बात अनेक प्रकार से चिंतन करने तथा श्वासोच्छ्वास की क्रियाओं के लिए भी सही है|

७. तैयारी: योगाभ्यास शुरू करने से पहले कार्यक्षेत्र व शरीर को महत्त्व देना बहुत ज़रूरी है| थोड़ी फुर्तीली या ह्रदय सम्बन्धी कसरत करके रक्त के बहाव को तेज़ करके खुद को अच्छे से तैयार करना अति आवश्यक है जिससे की आप सारे आसन अधिक उत्साह से कर सकें|

८. तर्कसंगत बनो तथा धीरज रखो: हाँ, खुद को धकेलो लेकिन इतना नहीं की आप अतर्कसंगत होकर हद से ज्यादा कर बैठें| अपने शरीर के साथ सौम्य व्यवहार करो और जब तक आप अपने लक्ष्य से थोडा आगे निकल जाओ तब तक सबर से काम लो| और धीरज रखो| यह कोई प्रतियोगिता नहीं है; सबर करो और अपने शरीर के साथ कोमलता से पेश आकर, समय के साथ, उसे अधिक लचीला व स्वस्थ बनने के लिए जैविक रूप से मदद करो|