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T.V is not called an idiot box for nothing. And no matter how many boons the smartphone is responsible for, as far as children are concerned, it proves to be more of a liability than an asset! In an age where digitization is being sought after, the younger ones are susceptible to high dangers being posed by the increasing exposure to technology. However, there’s no problem without a solution. Read on:-

Stop Recharging:

It is the simplest method to regain control. Your children have an addiction to the TV or a smartphone? Guess what? Both of these work only when YOU recharge them. Thanks to Direct-To-Home set-top box services, TV is rendered useless unless you get a top-up. And the extra conversations on your kids’ phone is possible only because you choose to pay their phone bills. Refuse to do so in extreme cases. In other circumstances, learn to change their post-paid or pre-paid plans such that they get limited access to 4G network and free calls.


The grim reality of the far-reaching effects of going digital stems from the same root – A WiFi connection. Even though you have stopped recharging your child’s phone/T.V. as per their convenience, the WiFi connection seems to duck this new decorum rather easily. Along with the above, try and pose restrictions on your WiFi connection. In case you’re currently operating on say a 3 Mbps speed, turn it down to a 1 Mbps. Take the assistance of your Internet Service Provider if need be to figure out a plan that will suit your requirements.

Parental Controls:

Every television thankfully has the facility of providing parental controls. Use these services to decrease the exposure-bandwidth on your children. The same applies to online streaming services like Netflix and Amazon Prime. Create different profiles for you and your kids, thus enabling restricted access.


It is a widely used service in big corporate houses but the same can be incorporated in your home network. Again take the help of an expert. There are many good local IT companies who provide these services, thus it is not something which will be too expensive or difficult to find.

Give More Time:

No matter how many restrictions you will want to pose, you cannot blame your children for having been given the facilities of technology in this era. Instead what you can do is to spend more time with them. Show them the means of entertainment you were exposed to while growing up yourself. Take them out on picnics and facilitate the importance of going outdoors. Relive your childhood while you grow old with your children.

Enroll Them For Extra-Curricular Activities:

Your kid is succumbing to his/her phone/TV simply because they probably have a little extra time on their hands. Hence, enroll them for extra-curricular activities, either in school or other clubs, and help them build new hobbies aside from academics. However keep no restriction of choice here. Let them pursue whatever it is that their heart desires – right from tennis or cricket to drama club or elocution. This not only takes up their free time but also helps in inculcating better interpersonal skills in them.

Make Smarter Choices:

Just when your child is stubbornly asking you to buy him/her the new iPhone, make smarter choices instead. For example, instead of an iPhone, buy him/her a Kindle. Not only is it a LOT cheaper but it also helps in building a frequent reading habit in your child while also increasing his/her vocabulary. Similarly, there are better alternatives to all kinds of technological products that your kids want you to buy for them.

Set Some Ground Rules:

Over and above the aforesaid, make sure there are certain no-tech ground rules in the house. For example, no phones or digital devices while eating, or no tech during a family weekend, or no social media exposure till a certain age. Suit yourself but more importantly lead by example!

Get him to attend CYL Workshop:

If nothing of the above works or seems difficult, have your children attend my ‘Change Your Life’ Workshop where in each event, hundreds of participants break their years-long addictions to Smoking, Drinking, TV or Mobile FOR EVER.

टीवी तथा मोबाइल फोन के आदि अपने बच्चे को संभालने के तरीके
टी.वी. को ऐसे ही बिना कारण ‘इडियट बॉक्स’ नहीं कहते| और स्मार्ट फोन चाहे जितने भी वरदानों के लिए ज़िम्मेदार क्यों न हो, फिर भी, जहाँ तक बच्चों का सवाल है, वह एक संपत्ति से ज्यादा एक ऋण ही साबित हुआ है! इस ज़माने में जहाँ लोग अंकरूपण (डीजीटाईजेशन) के पीछे पड़े हैं, वहाँ बढती हुई टेक्नोलोजी के सामने उघाड़े होने के गंभीर भय से बच्चे अधिक असुरक्षित हैं| फिर भी, कोई भी समस्या बिना हल के नहीं होती| आगे पढ़ें:-

१. रिचार्ज करना बंद कीजिए:

फिरसे काबू पाने का यह सबसे आसान तरीका है| क्या आपके बच्चे को टीवी या स्मार्ट फोन का व्यसन हो गया है? यह दोनों उपकरण तभी काम करते हैं जब आप उन्हें रिचार्ज करते हैं| डायरेक्ट-टू-होम सेट टॉप बॉक्स का शुक्रिया अदा करना चाहिए क्योंकि टीवी तब तक किसी काम का नहीं है जब तक आप पैसे नहीं भरते| और बच्चों की फोन पर ज्यादा बातें तभी होती हैं जब आप उनका बिल भरते हो| चरम सीमा आने पर आप बिल भरने से साफ़ इंकार कर दें| अन्य परिस्थितियों में उनके पोस्टपेड़ (उत्तरदत्त) या प्रीपेड (पूर्वदत्त) योजनाओं को ऐसे बदल दें की बच्चों को ३जी या ४जी प्रसार (नेटवर्क) का ज्यादा अभिगम (ऐक्सेस) ना मिले, ना ही उन्हें मुफ्त कॉल्स मिले|

२. वाय-फाय (WiFi):

अंकरूपण करने के व्यापक परिणामों की कड़वी सच्चाई उसी मूल से शुरू होती है – एक वाय-फाय का जोड़| आपने अपने बच्चे का फोन या टीवी का पुनर्भरण उनके सहूलियत के हिसाब से बंद किया होने के बावजूद, वाय-फाय का जोड़ इस नए शिष्टाचार को आसानी से शून्य कर देता है| अतः उपरोक्त बंदी के साथ-साथ, अपने वाय-फाय के जोड़ पर भी अंकुश लगाने का प्रयास करें| उदाहरणार्थ, यदि आप वर्तमान में ३ एमबीपीएस की गति से कार्य कर रहें हैं तो उसे १ एमबीपीएस जितना कम कर दें| अपने इंटरनेट सेवा प्रदाता की मदद लेकर आपके लिए जो योजना सबसे बेहतर होगी उसका विचार कीजिये|

३. मात-पिता का निग्रह:

शुक्र है कि हर एक टीवी में माता-पिता द्वारा निग्रह करने की सुविधा दी हुई होती है| इन सुविधाओं का उपयोग करके अपने बच्चों की उघाड-विशदता कम कीजिये| बिलकुल यही बात निरंतर ऑनलाइन प्रवाहित होने वाली सेवाएँ जैसे की ‘नेटफ्लिक्स’ और ‘ऍमेजौन प्राइम’ के लिए भी लागू होती है| अपने लिए और अपने बच्चों के लिए अलग-अलग प्रालेख (प्रोफाइल) बनाइये जिससे सीमित ऐक्सेस संभव हो|

४. फायर वॉल:

यह बडी कम्पनियों में उपयुक्त होने वाली एक सेवा है, लेकिन इसे घर के नेटवर्क के साथ भी सम्मिलित किया जा सकता है| एक बार फिर विशेषज्ञ की मदद लें| कई अच्छी आई.टी. कम्पनियाँ हैं जो यह सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं, अतः यह कोई बहुत महँगी या दुर्लभ चीज़ नहीं है|

५. अधिक समय दें:

आप कितनी भी पाबंदियाँ क्यों ना लगना चाहें, आज के युग में आप अपने बच्चों को कितनी तकनिकी सहूलियतें दी गयीं हैं उसके लिए उन्हें दोषी नहीं मान सकते| ऐसा करने के बजाय आप उन के साथ ज्यादा समय व्यतीत करें| आप जब बड़े हो रहे थे तब आपके लिए क्या मनोरंजन था यह उन्हें बताएं| उन्हें अपने साथ बहार पिकनिक पर ले जाएँ और बाहर जाने के महत्त्व से अवगत करवाएँ| अपने बच्चों के साथ बढ़ते हुए अपने बचपन को फिर से जीयें|

६. उन्हें पाठ्येतर कार्यों में भरती करें:

आपका बच्चा अपने फोन या टीवी से तभी वशीभूत होगा जब उसके पास कुछ खाली समय होगा| अतः उन्हें या तो पाठशाला में या अन्य संघों (क्लबों) में चलते पाठ्येतर कार्यों में भरती कराएँ, और शिक्षण के आलावा दुसरे शौक बढाने में उनकी सहायता करें| और यहाँ कोई पाबंदी ना रखें| जो भी उनकी दिली इच्छा हो वह उन्हें करने दीजिये – टेनिस या क्रिकेट से लेकर नाट्य संघ या वक्तृत्व| यह ना केवल उनका खाली वक्त भर देगा बल्कि उन में बेहतर अंतर्वैयक्तिक कुशलताएँ उत्पन्न करने में भी मदद करेगा|

७.कुछ बुध्दिमान चुनाव करें:

जब आपका बच्चा जिद कर रहा हो कि आप उसके लिए नया आई-फोन खरीदें, तब कुछ बुध्दिमान चुनाव करें| उदाहरणतः आई-फोन के बजाय उसे ‘किनडल’ खरीद कर दें| यह ना केवल अधिक सस्ता है पर यह बारम्बार पढने की अच्छी आदत बनाने में ही मदद करेगा जिसके चलते उसका शब्द-भण्डार काफी बढ़ जायेगा| इसी तरह, आपके बच्चे जिस भी प्रकार का तकनीकी उत्पादन चाहते हैं कि आप उनके लिए खरीदें, उसके लिए कोई ना कोई बेहतर विकल्प ज़रूर होगा|

८. कुछ मूलभूत नियम निश्चित करें:

उपरोक्त सभी बातों से बढ़कर है, यह तय करना कि घर में कुछ मूलभूत ‘नो-टेक’ नियम हों| उदाहरणतः, खाते समय कोई फोन या अंकीय उपकरण नहीं, या परिवार के साथ बिताए जाने वाले सप्ताहांत में ‘नो-टेक’, या किसी नियत आयु तक किसी भी सामजिक माध्यम के सामने उघाड़ नहीं| आप जो ठीक समझें वाही करें, लेकिन अधिक ज़रूरी है उदाहरण बनकर नेतृत्व करना!

९. उसको CYL वर्कशॉप करने भेजिए:

अगर उपरोक्त कुछ भी काम नहीं करता है या मुश्किल लगता है, तो आप अपने बच्चों को मेरा ‘चेंज योर लाइफ वर्कशॉप’ करवाइए, जहाँ हर कार्यक्रम में सेंकडो प्रतियोगी अपने बरसों पुराने व्यसन जैसे धुम्रपान, शराब, टीवी या मोबइल से हमेशा के लिए मुक्ति पाते हैं |

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