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“A reader lives a thousand lives before he dies, said Jojen. The man who never reads lives only one.”
― George R.R. Martin, A Dance with Dragons

Perception of the world we live in can be grappled by two methods – experience and books. Experience is a more hands-on approach to leading life but is somehow limited. Books, on the other hand, are treasure chests filled with imagination and truth alike; posing no boundaries or limitations to your adventures. However, reading is a habit not everyone is well acquainted with. Hence, let’s enumerate reasons as to how reading impacts us and why we should read more.

1.It helps improve your mind: There are numerous stories that one can read both fiction and non-fiction. It is found that those who read have a more attuned brain than those who indulge in other passive hobbies and activities. It improves your brain both psychologically and cognitively; thereby helping you in acquiring and processing information more efficiently.

2.Better focus and concentration: Reading a book is nothing like reading a newspaper or a magazine or even a blog. It takes concentrated effort to sit down with a book and try to decipher the information it provides. It sounds difficult, but the more you do it the easier it gets for you to block the outside world and immerse yourself into a completely new one.

3.It is informative: Unlike newspapers, who report mostly current affairs, reading books can provide you with detailed information on so many different cultures, religions, caste, creed and sects. Magazines and newspapers can only give you a gist of everything happening around the world; but books take that a step ahead. Furthermore, it innately immerses you in the physical world of where the story takes place making you want to explore and learn more.

4.Helps build your vocabulary: How many times have we tried and failed in trying to learn new words and wanting to use them differently every now and then to improve our confidence? How many online courses have failed to help us accomplish a better vocabulary? Reading makes it utmost fun. And it does not even require an extra effort! Once you start enjoying the process of reading, your vocabulary enhances itself. Especially with the advent of Kindle readers and the likes, there is an offline Oxford dictionary available at your fingertips. From looking up words, to knowing how to pronounce it, to the complete etymology of a given word – everything is as easy as pie!

5.It improves your verbal skills: When you know more, it is easier for you to communicate with utmost precision- meaning you are able to describe how you feel a lot better. Not only is it beneficial in day-to-day casual conversations but also helps in making an impression at work meeting etc.

6.It improves your writing skills: The one golden rule for writers everywhere is to read more and more and more! The more you read, the better you write. Reading helps you understand the mind and the authorial voice of the writer – which in turn makes an impression on your mind and how you would write and perceive the society you live in.

7.It improves your imagination: Unlike play writing or script writing, books are descriptive in nature. They don’t merely provide basic information of plot but also enhance it by delving deep into the minds of the characters and the world they live in. Hence, by default it helps you to improve your imagination. You find yourself in the world that the book creates and you start picturing it. Once you start reading, your mind becomes more pictorial and hence improves your imaginative and creative skills and your memory.

8.It makes you smarter and interesting: As stated earlier, books are informative. The more you consume the more knowledge you derive. It is basically research in a relatively short amount of time. Avid readers tend to display a better understanding of how things work and in general about people. In a competitive world as ours, being book-smart is essential- especially for children in their academics. It makes you interesting as well without being too forthcoming!

9.It reduces stress: Reading silently by yourself for sixty minutes a day can help slow-down your heart rate and ease tension in muscles. It relaxes you and thus reduces stress. According to a research, it works better than other methods of reducing stress like listening to music, going for a walk or having a cup of tea. This is because reading forces you to concentrate and to mentally get out of your current whereabouts and situations and transports your mind elsewhere completely.

10.It has entertainment value: Reading is not a chore. We read profusely because it has entertainment value – Something out of the box and beyond normal. It is a lot, lot better than sitting in front of the T.V.! Reading amuses us while improving our life skills – and there is no better deal!

TAKEAWAY – Instead of another paragraph of conclusion let’s end this how we started it – with a quote.

“I find television very educating. Every time somebody turns on the set, I go into the other room and read a book.”

– Groucho Marx

हमें अधिक क्यों पढ़ना चाहिए?

जोजें ने कहा “एक पाठक मरने से पहले हज़ार जिन्दगियां जीता है| जो मनुष्य पढता नहीं वह एक ही ज़िन्दगी जीता है |” 

– जॉर्ज आर. आर. मार्टिन, ‘अ डांस विथ ड्रैगन्स’

ये दुनिया की जिसमें हम रहेते हैं, उसका प्रत्यक्ष ज्ञान दो तरह से हमारी पकड़ में आ सकता है – अनुभव और किताबें| जिन्दगी जीने की पध्दती का मार्गदर्शन अनुभव से हो सकता है पर यह सिमित है| दूसरी ओर किताबें, खजाने कि संदुक की तरह कल्पना और सत्य से भरी हैं; जो हमारे साहस पर कोई सीमा या प्रतिबंद नहीं लगाते हैं| फिर भी, पढ़ना एक ऐसी आदत है, जीससे हर कोई अभ्यस्त नहीं होता| अतः एक एक करके कारण देने होंगे की पढने से हमारी जिन्दगी पर क्या प्रभाव पड़ता है और हमने क्यों ज्यादा पढना चाहिए|

१. मन को सुधारने में मदद करता है: काल्पनिक और वास्तविक दोनों ही तरह की अनगिनत कहानियाँ हैं जो हर कोइ पढ़ सकता है| यह देखा गया है की जो लोग निष्क्रिय शौक रखते हैं, उनकी तुलना में पढने वालों का दिमाग ज्यादा लय में होता है| यह आपके दिमाग को मनोवैज्ञानिक और ज्ञानात्मक दोनों ही तरीके से सुधरता है: जिससे ज्ञान को पाने में और उस पर प्रक्रिया करने में ज्यादा कार्यक्षमता रहेती है|

२. बेहतर ध्यान और एकाग्रता: पुस्तक पढना मतलब समाचार पत्र, पत्रिका या ब्लॉग पढ़ने जैसा बिलकुल नहीं है| कोई पुस्तक लेके बेठना और ध्यानपूर्वक प्रयत्न करके जो गूढार्थ दिया गया है उसे समझने में वक्त लगता है| सुनने में यह मुश्किल जरूर लगता है, पर जितना ज्यादा आप पढ़ोगे उतना ही, बाहरी दुनिया से विमुख होना, और खुद एक नई ही दुनिया में डूबा देना, सरल होता जायेगा|

३. यह शिक्षाप्रद है: समाचार पत्रों की तरह मात्र चालू घटना क्रमों के बारे में ही नहीं, बल्कि किताबें पढने से हमें अलग अलग संस्कृतियों, भाषाओं, जातियों, व संप्रदायों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है| समाचारपत्र या पत्रिकाएँ आपको सिर्फ आपके आसपास की दुनिया में क्या हो रहा है उसकी विस्तृत जानकारी देते हैं; जबकि किताबें इससे एक कदम आगे ले जाती है| और ज्यादा कहूँ तो वे [किताबें] आपको शारीरिक रूप से घटनास्थल पर सहजता से पहुंचाकर तल्लीन कर देती है जिसके फलःस्वरूप आप को अधिक जानकारी प्राप्त करने में तथा अधिक सिखने में मदद होती है|

४. आपका शब्द भंडार बढ़ाने में सहायक: अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हमने कितनी बार नए शब्द सीखना और उनका अलग अलग तरह से प्रयोग करने की कोशिश की है और नाकाम हुए? कितने ऑनलाइन कोर्स हमारे शब्द भंडार को बढ़ाने में निष्फल साबित हुए हैं? पढना इसे अत्यधिक मज़ेदार बना देता है| और उसके लिए ज्यादा प्रयत्न भी नहीं करना पड़ता! एक बार आप पढने की प्रक्रिया का आनंद लेने लगते हो, तो आपका शब्द भंडार अपने आप ही बढ़ता जाता है| खास करके ‘किंडल’ जैसे पाठकों के  आगमन के कारण ‘ऑक्सफ़ोर्ड’ जैसा शब्दकोष आपके अंगुलाग्रों पर उपलब्ध है| उस में शब्द को ढूँढने से, व उसके उच्चारण से ले कर शब्द की सम्पूर्ण व्युत्पत्ति तक – सब कुछ एकदम आसान हो जाता है|

५. आपकी शाब्दिक निपुणता सुधर जाती है: जब आप ज्यादा जानते हो, तो आपको अपनी बात एकदम सटीक तरीके से करने में आशिक आसानी होती है – अर्थात आप जो भी महसूस करते हो उसे आप बेहतर शब्दों से बयां कर सकते हो| रोज बरोज के सामान्य वार्तालापों में ही नहीं परन्तु कार्यस्थल के अधिवेशन आदि में भी आप प्रभावशाली साबित होते हैं|

६. आपकी लेखन शैली सुधर जाती है: हर जगह लेखकों के लिए सुवर्ण अक्षरों में लिखा हुआ एक ही नियम है – पढो, ज्यादासे ज्यादा पढो! जितना ज्यादा आप पढोगे उतना अच्छा आप लिखोगे| पढ़ ने से आपको लेखकीय दिमाग तथा वाणी को समझने में मदद मिलेगी – जिसे के चलते आपके दिलोदिमाग व लेखन शैली पर, तथा आप जिस समाज में रहते हो और उसको आप कैसे देखते-समझते हो – इन सब पर एक प्रभाव पड़ता है|

७. आपकी कल्पना शक्ति को उत्कृष्ठ बनाता है: नाट्यलेखन व कथानक लेखन से काफी भिन्न, किताबें वर्णनात्मक होती हैं| वे न केवल कथावस्तु की बुनियादी जानकारी देती हैं पर खूब छानबीन करके, पत्रों के दिमाग में घुसकर वे जहाँ व जिस दुनिया में रहते है वहीँ हमें ले जाती है| इस वजह से वे बकाया आपकी कल्पना शक्ति बेहतर बनाने में मदद करती है| आप अपने आप को किताब की दुनिया में पाते हो और आप उसका दृश्य बनाने लगते हो| एक बार आप किताब पढना शुरू कर देते हो तो आपका दिमाग चित्रात्मक हो जाता है, अतः आपकी कल्प्नात्मक और सर्जनात्मक शक्तियाँ तथा स्मरणशक्ति बेहतर हो जाती है|

८. यह आपको तेज़-तर्रार और रोचक बनाता है: आगे कहा वैसे, किताबें शिक्षाप्रद होती हैं| आप जितनी ज्यादा पढ़ते हो उतना ज्यादा ज्ञान आप पाते हो| यह मूलतः कम समय में किया गया संशोधन है| उत्साही वाचक चीजें कैसे काम करती है तथा सामान्यतः लोगों के बारे में अधिक समझ-बूझ दर्शाते हैं| हमारे स्पर्धात्मक जगत में “पुस्तक ज्ञानी” होना अति जरुरी है – खास करके बच्चों को उनकी बेहतर शिक्षा के लिए| यह आपको स्पष्टवादी ना बनाते हुए भी रोचक बनाता है|

९. यह तनाव कम करता है: दिन में ६० मिनिट शांतिसे मन में पढने से ह्रदय की गति को कम करने में मदद मिलती है, और माँसपेशियों में तनाव कम होता है| यह आपको विश्रांति देता है जिससे आपका तनाव कम हो जाता है| एक अन्वेषण के अनुसार, यह तनाव कम करने के अन्य तरीके जैसे संगीत सुनना, चलने जाना, या चाय पीना, से अधिक बेहतर साबित हुआ है| ऐसा इस लिए होता है क्योंकि पढना जबदस्ती से आपका ध्यान अपने हालातों व ठौर-ठिकानों से हटाके पूर्ण तरह से दूसरी जगह पर केन्द्रित करने व वहीँ पहुँच जाने में मदद करता है|

१०. इस में मनोरंजन के गुण भी शामिल है: पढना रोजका काम [उबाऊ काम] नहीं है| हम अधिक मात्रा में पढ़ते हैं क्योंकि उस में मनोरंजन के गुण भी शामिल है – कुछ जरा हटके और सामान्य से अधिक| यह टी.वि. के सामने बैठे रहने से तो बहुत ही ज्यादा बेहतर है! हमारी जिन्दगी की निपुणता को बढ़ाने के साथ साथ पढना हमारा मन भी बहलाता है – और इससे अच्छा सौदा हो ही नहीं सकता!

इतना ले जाओ – उपसंहार में एक नया परिच्छेद लिखने के बदले हमने जैसे शुरू किया था वैसे ही समाप्त करते हैं: – एक उध्दरण (उक्ति) के साथ…

“मैं टेलीविज़न को बहुत ही ज्ञान प्रद मानता हूँ| जब भी कोई इसे चालू करता है, मैं दुसरे कमरे में जा कर पुस्तक पढ़ता हूँ|”

ग्रौचो मार्क्स

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